राजनांदगांव जिले में राजस्व मामलों के त्वरित और पारदर्शी निराकरण को लेकर कलेक्टर जितेंद्र यादव गंभीर हैं। आम नागरिकों को न्याय और राहत पहुंचाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक के बाद कलेक्टर के निर्देशों के महज 24 घंटे के भीतर जिले के विभिन्न न्यायालयों में लंबित 150 राजस्व प्रकरणों में अंतिम आदेश पारित कर दिए गए। ऑनलाइन समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर जितेंद्र यादव ने सभी राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की जानकारी ली। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जिन प्रकरणों में सुनवाई की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, उनमें अंतिम आदेश पारित करने में अनावश्यक विलंब न किया जाए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रकरणों का त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी निपटारा शासन की प्राथमिकता है। इससे न केवल आम नागरिकों को समय पर न्याय मिलता है, बल्कि प्रशासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि राजस्व कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या लेत-लतीफी स्वीकार नहीं की जाएगी। एक दिन में 150 प्रकरणों का निराकरण कलेक्टर के कड़े रुख के बाद राजस्व अधिकारियों ने सक्रियता दिखाते हुए रिकॉर्ड तोड़ काम किया। एक ही दिन में कुल 150 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसका अनुविभागवार विवरण इस प्रकार है: राजनांदगांव अनुविभाग में अनुविभागीय अधिकारी (SDM), तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने मिलकर सर्वाधिक 99 प्रकरणों में आदेश पारित किए। डोंगरगांव अनुविभाग के राजस्व न्यायालयों द्वारा कुल 28 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया, जबकि डोंगरगढ़ अनुविभाग में एसडीएम और तहसीलदारों की टीम ने 23 लंबित मामलों में अंतिम आदेश जारी किए। इस दौरान नामांतरण एवं बंटवारा, सीमांकन व व्यपवर्तन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। अविवादित और विवादित नामांतरण तथा खाता विभाजन के मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। जमीन की नाप-जोख और उपयोग परिवर्तन से जुड़े फाइलों को जल्द निपटाने के निर्देश भी दिए गए। इसके अतिरिक्त, रबी सीजन के लिए चल रहे डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की जानकारी भी ली गई। स्वामित्व योजना की समीक्षा, अधिकारियों को निर्देश ग्रामीण इलाकों में संपत्ति के अधिकार से जुड़ी स्वामित्व योजना की समीक्षा ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। इस बैठक में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, जिनमें अपर कलेक्टर सी.एल. मार्कण्डेय, प्रेम प्रकाश शर्मा, डिप्टी कलेक्टर विश्वास कुमार, अभिषेक तिवारी और जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार व नायब तहसीलदार मौजूद रहे। कलेक्टर ने अंत में सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने न्यायालयों में प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करें, ताकि भविष्य में आम जनता को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।


