अपार आईडी बनाने की सुस्ती पर शिक्षा विभाग सख्त:नालंदा जिले में 25 जनवरी तक पूरा करने का अल्टीमेटम, 39 फीसदी बच्चों नहीं बना कार्ड

अपार आईडी बनाने की सुस्ती पर शिक्षा विभाग सख्त:नालंदा जिले में 25 जनवरी तक पूरा करने का अल्टीमेटम, 39 फीसदी बच्चों नहीं बना कार्ड

स्कूली बच्चों की पहचान से जुड़े अहम दस्तावेज अपार आईडी को लेकर नालंदा जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आई है। एक साल से चल रही इस मुहिम में जिले के सवा दो लाख से अधिक बच्चे अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं। विभाग की इस सुस्ती पर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 25 जनवरी तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का सख्त निर्देश जारी किया है। जमीनी हकीकत चौंकाने वाली विभाग के आधिकारिक आंकड़े स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। नालंदा जिले में कुल 5,77,248 नामांकित छात्रों में से अब तक महज 3,52,314 का ही अपार कार्ड बन सका है। यानी पूरे 2,24,934 बच्चों का काम अभी भी लंबित पड़ा है। यह संख्या कुल नामांकन का करीब 39 फीसदी है, जो विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 1,26,132 ऐसे छात्र हैं जिनके पास आधार कार्ड उपलब्ध होने के बावजूद उनकी अपार आईडी नहीं बनाई गई है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता की ओर इशारा करता है। इसके अलावा 98,802 बच्चों के पास तो आधार कार्ड ही नहीं है, जिससे समस्या और भी जटिल हो गई है। एक सप्ताह में शून्य प्रगति, विभाग में हड़कंप विभाग की ओर से जारी साप्ताहिक रिपोर्ट(30 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026) ने कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 5 जनवरी को जिले में एक भी बच्चे का अपार कार्ड जनरेट नहीं किया गया। यह शून्य प्रगति विभाग के लिए शर्मनाक स्थिति है। राज्य स्तर पर भी पूरे एक सप्ताह में महज 11,410 कार्ड ही बन पाए, जिसे राज्य परियोजना निदेशक ने अत्यंत खेदजनक और निराशाजनक करार दिया है। दो चरणों में पूरा करना होगा लक्ष्य राज्य परियोजना निदेशक ने जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन बच्चों के पास आधार कार्ड मौजूद है, उनका अपार कार्ड 15 जनवरी तक प्राथमिकता के आधार पर बना लिया जाए। वहीं, जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है, उनका पहले आधार बनवाकर फिर 25 जनवरी तक अपार आईडी की प्रक्रिया पूरी की जाए। यह समय सीमा बेहद कड़ी है और विभाग के सामने अब समय की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है। राज्यभर में 85 लाख बच्चे वंचित यह समस्या केवल नालंदा तक सीमित नहीं है। जारी पत्र के मुताबिक, पूरे बिहार में अभी भी लगभग 85 लाख बच्चों का अपार आईडी बनना शेष है। हालांकि, नालंदा जिले की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक मानी जा रही है, जहां केवल 61.05 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। क्यों जरूरी है अपार आईडी अपार आईडी ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ की अवधारणा पर आधारित है। यह एक डिजिटल शैक्षणिक पहचान पत्र है जिसमें छात्र की पूरी शैक्षणिक कुंडली, परीक्षा परिणाम, छात्रवृत्ति और अन्य उपलब्धियों का संपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। इस आईडी के अभाव में भविष्य में छात्रों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, स्कूल ट्रांसफर और छात्रवृत्ति आवेदन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। स्कूली बच्चों की पहचान से जुड़े अहम दस्तावेज अपार आईडी को लेकर नालंदा जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आई है। एक साल से चल रही इस मुहिम में जिले के सवा दो लाख से अधिक बच्चे अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं। विभाग की इस सुस्ती पर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 25 जनवरी तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का सख्त निर्देश जारी किया है। जमीनी हकीकत चौंकाने वाली विभाग के आधिकारिक आंकड़े स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। नालंदा जिले में कुल 5,77,248 नामांकित छात्रों में से अब तक महज 3,52,314 का ही अपार कार्ड बन सका है। यानी पूरे 2,24,934 बच्चों का काम अभी भी लंबित पड़ा है। यह संख्या कुल नामांकन का करीब 39 फीसदी है, जो विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 1,26,132 ऐसे छात्र हैं जिनके पास आधार कार्ड उपलब्ध होने के बावजूद उनकी अपार आईडी नहीं बनाई गई है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता की ओर इशारा करता है। इसके अलावा 98,802 बच्चों के पास तो आधार कार्ड ही नहीं है, जिससे समस्या और भी जटिल हो गई है। एक सप्ताह में शून्य प्रगति, विभाग में हड़कंप विभाग की ओर से जारी साप्ताहिक रिपोर्ट(30 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026) ने कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 5 जनवरी को जिले में एक भी बच्चे का अपार कार्ड जनरेट नहीं किया गया। यह शून्य प्रगति विभाग के लिए शर्मनाक स्थिति है। राज्य स्तर पर भी पूरे एक सप्ताह में महज 11,410 कार्ड ही बन पाए, जिसे राज्य परियोजना निदेशक ने अत्यंत खेदजनक और निराशाजनक करार दिया है। दो चरणों में पूरा करना होगा लक्ष्य राज्य परियोजना निदेशक ने जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन बच्चों के पास आधार कार्ड मौजूद है, उनका अपार कार्ड 15 जनवरी तक प्राथमिकता के आधार पर बना लिया जाए। वहीं, जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है, उनका पहले आधार बनवाकर फिर 25 जनवरी तक अपार आईडी की प्रक्रिया पूरी की जाए। यह समय सीमा बेहद कड़ी है और विभाग के सामने अब समय की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है। राज्यभर में 85 लाख बच्चे वंचित यह समस्या केवल नालंदा तक सीमित नहीं है। जारी पत्र के मुताबिक, पूरे बिहार में अभी भी लगभग 85 लाख बच्चों का अपार आईडी बनना शेष है। हालांकि, नालंदा जिले की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक मानी जा रही है, जहां केवल 61.05 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। क्यों जरूरी है अपार आईडी अपार आईडी ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ की अवधारणा पर आधारित है। यह एक डिजिटल शैक्षणिक पहचान पत्र है जिसमें छात्र की पूरी शैक्षणिक कुंडली, परीक्षा परिणाम, छात्रवृत्ति और अन्य उपलब्धियों का संपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। इस आईडी के अभाव में भविष्य में छात्रों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, स्कूल ट्रांसफर और छात्रवृत्ति आवेदन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।  

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