ईडी भोपाल ने आज जबलपुर में राजुल ग्रुप के खिलाफ छापे की कार्रवाई कर विदेशी संपत्ति निवेश और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों का खुलासा किया है। इन कारोबारियों के यहां 31 लाख नकद मिले हैं। यह पता चला है कि आरोपियों ने 5.10 लाख यूरो में पुर्तगाल में फ्लैट खरीदा है और 2.1 करोड़ अभी भी लिस्बन के खाते में जमा हैं। इनके द्वारा 4.20 लाख यूरो (लगभग ₹3.65 करोड़) पुर्तगाल ट्रांसफर किए गए। उधर पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश सरवटे के विरुद्ध अभियोजन शिकायत दर्ज की गई है। राजुल ग्रुप के विरुद्ध यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई। ईडी के अनुसार, एम/एस राजुल ग्रुप और उसके साझेदारों से जुड़े तीन परिसरों पर गुरुवार को छापेमारी की गई। इस जांच में सामने आया कि प्रियंक मेहता ने पुर्तगाल के लिस्बन में लगभग 5.10 लाख यूरो में एक फ्लैट खरीदा था और उससे किराए की आय भी प्राप्त कर रहे थे। 5.48 लाख अमेरिकी डॉलर विदेश भेजे यह विदेशी संपत्ति और उससे होने वाली आमदनी को आयकर रिटर्न में घोषित नहीं किया गया था। ईडी की जांच के दौरान ₹31 लाख नकद बरामद किए गए। इसके साथ ही LRS स्कीम के अंतर्गत 5.48 लाख अमेरिकी डॉलर विदेश भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है। इनके द्वारा 4.20 लाख यूरो (लगभग ₹3.65 करोड़) पुर्तगाल ट्रांसफर किए गए। बताया गया कि छापे की जद में आए आरोपियों के यहां से मिले दस्तावेजों की जांच में ₹2.1 करोड़ अभी भी लिस्बन के बैंक खाते में पाई गई है। राजुल बिल्डर्स (आरबी) की स्थापना 1982 में दिलीप मेहता द्वारा एक स्वामित्व वाली कंपनी के रूप में की गई थी। आरबी मध्य प्रदेश के जबलपुर में रियल एस्टेट गतिविधियों में लगी हुई है। जबलपुर के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर पर अभियोजन कम्प्लेन दर्ज उधर एक अन्य मामले में ईडी भोपाल ने आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश प्रसाद सरवटे के खिलाफ भी विशेष कोर्ट (PMLA), जबलपुर में अभियोजन शिकायत दर्ज की है। जांच में सामने आया कि सरवटे ने 2015 से 2025 के बीच अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। उसके द्वारा अवैध धन को बैंकिंग सिस्टम के जरिए वैध दिखाकर भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी में संपत्तियों में निवेश किया गया। ईडी के अनुसार, कुल ₹11.81 करोड़ की अवैध संपत्ति का पता चला है। सरवटे की फरवरी 2026 में समान मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गईं थीं।


