सहरसा में भूकंप मॉक ड्रिल, 5 स्थानों पर रेस्क्यू अभ्यास:गोल्डन ऑवर में रेस्क्यू ऑपरेशन का किया अभ्यास, आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई उद्देश्य

सहरसा में भूकंप मॉक ड्रिल, 5 स्थानों पर रेस्क्यू अभ्यास:गोल्डन ऑवर में रेस्क्यू ऑपरेशन का किया अभ्यास, आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई उद्देश्य

सहरसा में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए गुरुवार को एक राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस ‘स्टेट लेवल मॉक एक्सरसाइज ऑन अर्थक्वेक डिजास्टर’ में जिले के पांच अलग-अलग स्थानों पर बचाव और राहत कार्यों का अभ्यास किया गया। इस मॉक ड्रिल में जिला आपदा पदाधिकारी संजीव कुमार चौधरी, एनडीआरएफ के नोडल अधिकारी रंजीत कुमार, होमगार्ड के अग्निशमन पदाधिकारी श्याम सुंदर यादव और जिला सहकारिता पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। रेस्क्यू ऑपरेशन का किया अभ्यास होमगार्ड, अग्निशमन दल, रेड क्रॉस, आपदा मित्र, एसडीआरएफ और पुलिस बल के जवानों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास किया। जिला आपदा पदाधिकारी ने बताया कि सहरसा भूकंप जोन-5 में आता है, जो अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला स्कूल, ओबीसी बालिका छात्रावास, खेल भवन, सदर अस्पताल और हवाई अड्डा को मॉक ड्रिल के लिए चिन्हित किया गया था। इन स्थानों पर भूकंप की काल्पनिक स्थिति बनाकर घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। 23 जिलों में एक साथ कराया जा रहा अभ्यास एनडीआरएफ के नोडल अधिकारी रंजीत कुमार ने जानकारी दी कि यह अभ्यास बिहार के 23 जिलों में एक साथ कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहरसा में एनडीआरएफ की टीम सीधे तौर पर भाग नहीं ले रही है, लेकिन विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग का कार्य नहीं है, बल्कि सभी विभागों के तालमेल से ही प्रभावी राहत कार्य संभव है। रंजीत कुमार ने ‘गोल्डन ऑवर’ की अहमियत समझाते हुए बताया कि आपदा के तुरंत बाद का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ितों तक शीघ्र सहायता पहुंचाई जाए तो जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सहरसा में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए गुरुवार को एक राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस ‘स्टेट लेवल मॉक एक्सरसाइज ऑन अर्थक्वेक डिजास्टर’ में जिले के पांच अलग-अलग स्थानों पर बचाव और राहत कार्यों का अभ्यास किया गया। इस मॉक ड्रिल में जिला आपदा पदाधिकारी संजीव कुमार चौधरी, एनडीआरएफ के नोडल अधिकारी रंजीत कुमार, होमगार्ड के अग्निशमन पदाधिकारी श्याम सुंदर यादव और जिला सहकारिता पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। रेस्क्यू ऑपरेशन का किया अभ्यास होमगार्ड, अग्निशमन दल, रेड क्रॉस, आपदा मित्र, एसडीआरएफ और पुलिस बल के जवानों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास किया। जिला आपदा पदाधिकारी ने बताया कि सहरसा भूकंप जोन-5 में आता है, जो अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला स्कूल, ओबीसी बालिका छात्रावास, खेल भवन, सदर अस्पताल और हवाई अड्डा को मॉक ड्रिल के लिए चिन्हित किया गया था। इन स्थानों पर भूकंप की काल्पनिक स्थिति बनाकर घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। 23 जिलों में एक साथ कराया जा रहा अभ्यास एनडीआरएफ के नोडल अधिकारी रंजीत कुमार ने जानकारी दी कि यह अभ्यास बिहार के 23 जिलों में एक साथ कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहरसा में एनडीआरएफ की टीम सीधे तौर पर भाग नहीं ले रही है, लेकिन विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग का कार्य नहीं है, बल्कि सभी विभागों के तालमेल से ही प्रभावी राहत कार्य संभव है। रंजीत कुमार ने ‘गोल्डन ऑवर’ की अहमियत समझाते हुए बताया कि आपदा के तुरंत बाद का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ितों तक शीघ्र सहायता पहुंचाई जाए तो जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।  

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