Early Liver Disease: यूके में शुरू हुआ यह नया रिसर्च प्रोग्राम सेहत के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका फोकस लिवर की बीमारी को शुरुआती स्टेज में पहचानना है। लिवर हमारे शरीर का सबसे जरूरी अंगों में से एक है, जो खून साफ करने, पाचन में मदद करने और शरीर से जहरीले तत्व बाहर निकालने का काम करता है। जब लिवर खराब होने लगता है और समय पर इलाज नहीं होता, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है।
लिवर की बीमारी साइलेंट किलर क्यों कहलाती है
लिवर डिजीज को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि शुरुआत में इसके कोई साफ लक्षण नहीं दिखते। न दर्द होता है, न कोई बड़ी परेशानी महसूस होती है। लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीते रहते हैं और अंदर ही अंदर लिवर को नुकसान पहुंचता रहता है। आजकल गलत खानपान, मोटापा, शराब का सेवन और टाइप-2 डायबिटीज की वजह से लिवर फैटी होने और खराब होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
शुरुआती पहचान से क्या फायदे होते हैं
सेहत के नजरिए से अगर लिवर की बीमारी जल्दी पकड़ में आ जाए, तो उसे पूरी तरह कंट्रोल या पलटा भी जा सकता है।
- खानपान में सुधार
- शराब से दूरी
- वजन कंट्रोल
- ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण
इन आसान बदलावों से लिवर को दोबारा स्वस्थ बनाया जा सकता है। लेकिन जब बीमारी देर से पकड़ी जाती है, तो सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है।
GP क्लीनिक में स्क्रीनिंग क्यों जरूरी
इस रिसर्च में हाई-रिस्क लोगों की जांच सीधे GP क्लीनिक में की जा रही है, जो सेहत के लिए बड़ा कदम है। ज्यादातर लोग तब तक अस्पताल नहीं जाते, जब तक हालत बिगड़ न जाए। अगर आम हेल्थ चेकअप के दौरान ही लिवर की जांच होने लगे, तो लाखों लोगों को गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है।
बिना दर्द वाले टेस्ट से राहत
सेहत के लिहाज से एक और अच्छी बात यह है कि इसमें बिना सर्जरी और बिना दर्द वाले टेस्ट किए जा रहे हैं। बायोप्सी जैसे टेस्ट से लोग डरते हैं, लेकिन ये नए टेस्ट आसान, सुरक्षित और जल्दी रिजल्ट देने वाले हैं।
पूरे हेल्थ सिस्टम पर असर
अगर ऐसी स्क्रीनिंग सफल होती है, तो इससे न सिर्फ मरीजों की सेहत सुधरेगी, बल्कि हेल्थ सिस्टम पर बोझ भी कम होगा। गंभीर लिवर बीमारी का इलाज महंगा और लंबा होता है, जबकि शुरुआती रोकथाम सस्ती और असरदार है।


