जमुई के बरहट प्रखंड स्थित कटौना नदी घाट पर तय मानक से अधिक बालू खनन का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि मलयपुर थाना क्षेत्र के क्लस्टर-14 में खनन विभाग के नियमों का उल्लंघन कर कई गुना अधिक गहराई तक बालू निकाला जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बालू खनन का वीडियो वायरल कर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, नदी से दिन-रात बालू का उत्खनन किया जा रहा है। आरोप है कि खनन की निर्धारित सीमा का उल्लंघन कर लगभग 10 फीट से भी अधिक गहराई तक खुदाई की जा रही है। ग्रामीणों ने जेसीबी मशीनों से हो रही खुदाई का वीडियो भी बनाया है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी पोकलेन मशीनों का उपयोग कर बालू निकाला जा रहा है, जिससे नदी के बीचों-बीच गहरे गड्ढे बन गए हैं और नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। अवैध खनन का सिलसिला लगातार जारी ग्रामीणों का कहना है कि भारी मशीनों के इस्तेमाल से अवैध खनन का यह सिलसिला लगातार जारी है। खनन मानकों की अनदेखी कर न केवल नदी की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि आसपास के पर्यावरण और कृषि भूमि को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है। नियमानुसार, बालू खनन केवल सीमित और निर्धारित दायरे में ही अनुमत है, लेकिन यहां संवेदक पर मनमाने ढंग से उत्खनन करने का आरोप है। 17 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका इसी बालू घाट के संवेदक पर पूर्व में भी खनन नियमों के उल्लंघन के आरोप में विभाग द्वारा 17 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है। इसके बावजूद, अवैध खनन की गतिविधियां जारी हैं। इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी केशव कुमार पासवान ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए एक टीम गठित की जाएगी और यदि जांच में खनन नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित संवेदक के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जमुई के बरहट प्रखंड स्थित कटौना नदी घाट पर तय मानक से अधिक बालू खनन का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि मलयपुर थाना क्षेत्र के क्लस्टर-14 में खनन विभाग के नियमों का उल्लंघन कर कई गुना अधिक गहराई तक बालू निकाला जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बालू खनन का वीडियो वायरल कर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, नदी से दिन-रात बालू का उत्खनन किया जा रहा है। आरोप है कि खनन की निर्धारित सीमा का उल्लंघन कर लगभग 10 फीट से भी अधिक गहराई तक खुदाई की जा रही है। ग्रामीणों ने जेसीबी मशीनों से हो रही खुदाई का वीडियो भी बनाया है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी पोकलेन मशीनों का उपयोग कर बालू निकाला जा रहा है, जिससे नदी के बीचों-बीच गहरे गड्ढे बन गए हैं और नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। अवैध खनन का सिलसिला लगातार जारी ग्रामीणों का कहना है कि भारी मशीनों के इस्तेमाल से अवैध खनन का यह सिलसिला लगातार जारी है। खनन मानकों की अनदेखी कर न केवल नदी की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि आसपास के पर्यावरण और कृषि भूमि को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है। नियमानुसार, बालू खनन केवल सीमित और निर्धारित दायरे में ही अनुमत है, लेकिन यहां संवेदक पर मनमाने ढंग से उत्खनन करने का आरोप है। 17 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका इसी बालू घाट के संवेदक पर पूर्व में भी खनन नियमों के उल्लंघन के आरोप में विभाग द्वारा 17 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है। इसके बावजूद, अवैध खनन की गतिविधियां जारी हैं। इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी केशव कुमार पासवान ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए एक टीम गठित की जाएगी और यदि जांच में खनन नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित संवेदक के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


