सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर स्थित टोल प्लाजा पर अब ई-डिटेक्शन सिस्टम लागू हो गया है। इस नई व्यवस्था के तहत, टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों की डिजिटल जांच स्वतः शुरू हो जाएगी। यदि किसी वाहन का बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट या प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUC) अमान्य या एक्सपायर पाया जाता है, तो मौके पर ही ऑनलाइन ई-चालान जारी कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली बिना वैध दस्तावेजों के सड़क पर चलने वाले वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण रखने में सहायक होगी। NIC के तकनीकी सहयोग से विकसित की गई पूरी प्रणाली यह पूरी प्रणाली राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के तकनीकी सहयोग से विकसित की गई है। टोल प्लाजा पर लगे हाई-रेजोल्यूशन कैमरे गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को स्कैन करते हैं। स्कैन की गई जानकारी को तुरंत केंद्रीय डेटाबेस से मिलाया जाता है। कुछ ही सेकंड में सिस्टम यह जांच कर लेता है कि वाहन का बीमा, फिटनेस प्रमाण-पत्र और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र वैध हैं या नहीं। किसी भी दस्तावेज में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित वाहन मालिक के नाम ई-चालान स्वतः जनरेट हो जाता है। डिजिटल कॉपी मोबाइल या डिजिलॉकर में सुरक्षित रखने की भी अपील परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को सलाह दी है कि वे अपने सभी दस्तावेज समय पर अपडेट रखें। इसमें बीमा का नवीनीकरण, फिटनेस सर्टिफिकेट की वैधता जांचना और प्रदूषण प्रमाण-पत्र नियमित रूप से बनवाना शामिल है। विभाग ने दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी मोबाइल या डिजिलॉकर में सुरक्षित रखने की भी अपील की है। जानकारी के अनुसार, इस प्रणाली का पहले चरण में 31 टोल प्लाजा पर ट्रायल रन किया गया था, जिसकी कार्यक्षमता और सटीकता संतोषजनक पाई गई। अब रुन्नीसैदपुर सहित 10 और टोल प्लाजा को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। भविष्य में राज्य के अधिकाधिक टोल प्लाजा को ई-डिटेक्शन सिस्टम से जोड़ने की योजना है। इससे नियम उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी और बिना वैध कागजात वाले वाहनों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है। सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर स्थित टोल प्लाजा पर अब ई-डिटेक्शन सिस्टम लागू हो गया है। इस नई व्यवस्था के तहत, टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों की डिजिटल जांच स्वतः शुरू हो जाएगी। यदि किसी वाहन का बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट या प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUC) अमान्य या एक्सपायर पाया जाता है, तो मौके पर ही ऑनलाइन ई-चालान जारी कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली बिना वैध दस्तावेजों के सड़क पर चलने वाले वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण रखने में सहायक होगी। NIC के तकनीकी सहयोग से विकसित की गई पूरी प्रणाली यह पूरी प्रणाली राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के तकनीकी सहयोग से विकसित की गई है। टोल प्लाजा पर लगे हाई-रेजोल्यूशन कैमरे गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को स्कैन करते हैं। स्कैन की गई जानकारी को तुरंत केंद्रीय डेटाबेस से मिलाया जाता है। कुछ ही सेकंड में सिस्टम यह जांच कर लेता है कि वाहन का बीमा, फिटनेस प्रमाण-पत्र और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र वैध हैं या नहीं। किसी भी दस्तावेज में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित वाहन मालिक के नाम ई-चालान स्वतः जनरेट हो जाता है। डिजिटल कॉपी मोबाइल या डिजिलॉकर में सुरक्षित रखने की भी अपील परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को सलाह दी है कि वे अपने सभी दस्तावेज समय पर अपडेट रखें। इसमें बीमा का नवीनीकरण, फिटनेस सर्टिफिकेट की वैधता जांचना और प्रदूषण प्रमाण-पत्र नियमित रूप से बनवाना शामिल है। विभाग ने दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी मोबाइल या डिजिलॉकर में सुरक्षित रखने की भी अपील की है। जानकारी के अनुसार, इस प्रणाली का पहले चरण में 31 टोल प्लाजा पर ट्रायल रन किया गया था, जिसकी कार्यक्षमता और सटीकता संतोषजनक पाई गई। अब रुन्नीसैदपुर सहित 10 और टोल प्लाजा को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। भविष्य में राज्य के अधिकाधिक टोल प्लाजा को ई-डिटेक्शन सिस्टम से जोड़ने की योजना है। इससे नियम उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी और बिना वैध कागजात वाले वाहनों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है।


