मानसून से पहले आ जाएंगी ई-बसें:जून तक शहर की सड़कों पर दौड़ेंगी 75 एसी ई-सिटी बसें

मानसून से पहले आ जाएंगी ई-बसें:जून तक शहर की सड़कों पर दौड़ेंगी 75 एसी ई-सिटी बसें

शहर की परिवहन व्यवस्था अब आरामदायक होने जा रही है। लंबे समय से ऑटो रिक्शा और निजी टैक्सियों की मनमानी झेल रहे शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। नगर निगम और परिवहन विभाग का ‘सिटी बस प्रोजेक्ट’ शुरू होने के करीब है। जून तक शहर के 12 प्रमुख रूटों पर 75 इलेक्ट्रिक सिटी बसें दौड़ने लगेंगी। इस प्रोजेक्ट से न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि यातायात के दबाव को भी कम करेगा। मार्च तक ई-बसें आनी थी, मगर बस डिपो का मामला न्यायालय में जाने के कारण कुछ देरी हुई। जयपुर में भी ई-बसों का ट्रायल हुआ है, जिसमें बीकानेर निगम से भी एक अधिकारी शामिल हुए। एमजीएसयू के सामने डिपो तैयार किया जा रहा है। वहीं चार्जिंग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। जयपुर रोड और गंगाशहर रोड पर एक-दो प्वाइंट और बनाए जाएंगे। 125 ई-बसों का खाका तैयार है। पहले चरण में 75 बसें आएंगी, शेष 50 बसें दूसरे चरण में जोड़ी जाएंगी। इन बसों की लंबाई 9 मीटर रखी गई है ताकि ये जूनागढ़, कोटगेट और फड़बाजार जैसे संकरे रास्तों पर भी आसानी से मुड़ सकें। इस पूरे प्रोजेक्ट का जिम्मा मोबिलिटी कंपनी को दिया गया है, जो अगले 10 वर्षों तक इन बसों के संचालन और रखरखाव का काम संभालेगी। डीटीओ- निगम उपायुक्त और ट्रैफिक पुलिस को एक बार रूट चेक करने के लिए कहा गया है। बसें देशनोक, एयरपोर्ट, खारा इंडस्ट्रियल, इंजीनियरिंग कॉलेज और रायसर तक चारों कोनों तक जाएंगी। किराया अभी अधिकृत रूप से जारी नहीं किया गया है। बस ड्राइवर फर्म देगा, मगर कंडक्टर निगम भर्ती करेगा। सालाना 5000 टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा विशेषज्ञों का मानना है कि 75 ई-बसों के आने से शहर में सालाना करीब 5000 टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा। यह बीकानेर को ‘क्लीन और ग्रीन’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। गर्मी में एसी बसों का सफर देगा राहत बसें वातानुकूलित होंगी: बीकानेर की 48 डिग्री वाली गर्मी में भी यात्री ठंडक का अहसास करेंगे। सीसीटीवी और जीपीएस: हर बस में 3 कैमरे होंगे, जिनकी लाइव फीड कंट्रोल रूम में देखी जा सकेगी। पैनिक बटन: छेड़छाड़ या आपात स्थिति में यात्री पैनिक बटन दबा सकेंगे, जिससे तुरंत पुलिस और कंट्रोल रूम को अलर्ट जाएगा। स्मार्ट डोर सिस्टम: बस का गेट हाइड्रोलिक होगा। जब तक गेट पूरी तरह बंद नहीं होगा, बस स्टार्ट नहीं होगी। इससे पायदान पर लटकने से होने वाले हादसों पर 100% लगाम लगेगी। डिजिटल पेमेंट: यात्री न केवल नकद, बल्कि यूपीआई और स्मार्ट कार्ड के जरिए भी टिकट ले सकेंगे। मुख्य रूटों पर बसें और गलियों में दौड़ेंगे ऑटो रिक्शा
सिटी बस सेवा शुरू होने की खबर से स्थानीय ऑटो चालकों में चिंता है। हालांकि, निगम अधिकारियों का कहना है कि सिटी बसें मुख्य रूटों पर चलेंगी, जबकि ऑटो रिक्शा गलियों से मुख्य सड़क तक चलेंगे। इससे ऑटो चालकों का काम व्यवस्थित होगा। आने वाले समय में ऑटो चालकों को भी ई-रिक्शा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। महिलाओं के लिए ‘पिंक’ कंफर्ट और वरिष्ठों को सम्मान
इन बसों में बैठने की क्षमता 25+15 (बैठने और खड़े होने वाले) की होगी। महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए बस में 4 सीटें विशेष रूप से गुलाबी रंग की होंगी। इसके अलावा, दिव्यांगों के लिए लो-फ्लोर रैंप की सुविधा होगी ताकि वे व्हीलचेयर के साथ सीधे बस में प्रवेश कर सकें। 10 हाई-पावर डीसी चार्जर लगाए जा रहे हैं। एक बस मात्र 45 से 60 मिनट में फुल चार्ज हो जाएगी। एक बार की फुल चार्जिंग में बस 180 से 200 किलोमीटर का सफर तय कर सकेगी, जो शहर के भीतर पूरे दिन के फेरों के लिए पर्याप्त है। देशनोक से नाल तक का सफर आसान होगा।

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