3 रुपये की ‘नौकरी’ और आम तोड़ने के हुनर के चलते ऐसे टीम इंडिया का सबसे धाकड़ कप्तान बना यह दिग्गज!

3 रुपये की ‘नौकरी’ और आम तोड़ने के हुनर के चलते ऐसे टीम इंडिया का सबसे धाकड़ कप्तान बना यह दिग्गज!

Ajit Wadekar Birthday: भारतीय क्रिकेट के विदेशी जमीन पर झंडे गाड़ने में वैसे तो कई दिग्गजों का नाम शामिल है, लेकिन आज के इस लेख में हम जिस क्रिकेटर के बारे में बताने जा रहे हैं उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है। भारतीय क्रिकेट टीम के जब भी सबसे कूल और धाकड़ कप्तानों की बात होती है, तो अजित वाडेकर का नाम सबसे ऊपर आता है। ये वो कप्तान थे जिन्होंने टीम इंडिया को पहली बार विदेश में सीरीज जीतना सिखाया। 1 अप्रैल 1941 को मुंबई में जन्मे और 77 साल की उम्र में 15 अगस्त 2018 को दुनिया को अलविदा कहने वाले वाडेकर साहब सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक कमाल के कप्तान और कोच भी रहे हैं। आइए जानते हैं अजित वाडेकर की लाइफ के कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में जिन्हें आपने शायद ही सुना होगा।

3 रुपये के चक्कर में बन गए क्रिकेटर

अजित वाडेकर के क्रिकेटर बनने के पीछे सबसे बड़ा हाथ मात्र 3 रुपये का था। दरअसल, वो पढ़ाई में बहुत होशियार थे और इंजीनियर बनना चाहते थे। लेकिन एक दिन कॉलेज बस में उनके सीनियर बालू गुप्ते ने उनसे पूछा, “क्या हमारी टीम के 12वें खिलाड़ी बनोगे? हमें बस एक ऐसा लड़का चाहिए जो मैदान पर पानी पिला सके।” इसके बदले उन्हें रोज के 3 रुपये मिलने वाले थे। साल 1957 में 3 रुपये की वैल्यू काफी ज्यादा होती थी, इसलिए उन्होंने ‘हां’ कह दी और यहीं से अनजाने में उनका क्रिकेट करियर शुरू हो गया।

आम तोड़ने का हुनर मैच में आया काम

वाडेकर साहब को बचपन से ही गणित से लगाव था। उनके पिता चाहते थे कि वो इंजीनियर बनें और मां चाहती थी कि वो डॉक्टर बनें। लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, क्योंकि जहां 3 रुपये की वजह से उन्होंने क्रिकेट में कदम रखे, वहीं एक पत्थर मारकर पेड़ से कई आम एक साथ गिरा देने वाले हुनर की वजह से वो आगे चलकर दुनिया के बेहतरीन स्लिप फील्डर बने।

कोच की सजा ने बनाया फिट खिलाड़ी

कॉलेज की पढ़ाई के चलते वाडेकर साहब अक्सर नेट प्रैक्टिस के लिए देरी से पहुंचते थे। इसके चलते उनके कोच उन्हें सजा के तौर पर मैदान के चक्कर लगवाया करते थे। आगे चलकर वो दौड़ने में इतने एक्सपर्ट हो गए कि उन्हें फील्डिंग करने में कोई परेशानी नहीं होती थी। फिर एक दिन सुनील गावस्कर के अंकल माधव मंत्री ने उनका टैलेंट पहचाना और उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम का खिलाड़ी बना दिया।

विदेशी जमीन पर जीत का झंडा गाड़ा

1971 का साल इंडियन क्रिकेट के लिए किसी त्यौहार से कम नहीं था। वाडेकर की कप्तानी में ही भारत ने पहली बार इंग्लैंड और वेस्टइंडीज को उनके घर में घुसकर हराया। 24 अगस्त 1971 को जब भारत ने इंग्लैंड को 4 विकेट से मात दी, तो पूरी दुनिया में टीम इंडिया का डंका बज गया। इससे पहले न्यूजीलैंड को भी उनके घर में 3-1 से धूल चटाने में वाडेकर का बड़ा रोल था।

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