जमुई जिले में राजस्व कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण अंचल कार्यालयों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया है। 11 फरवरी से जारी इस हड़ताल के चलते दाखिल-खारिज, परिमार्जन और जमाबंदी सुधार जैसे महत्वपूर्ण कार्य ठप पड़े हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस हड़ताल का सीधा असर आम लोगों और किसानों पर पड़ रहा है। अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज न होने से जमीन खरीदने वाले लोगों की रसीदें नहीं कट पा रही हैं। इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग के फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से संबंधित कई कार्य भी प्रभावित हुए हैं। अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे
जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों के लिए भी लोगों को अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। अंचल कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सामान्य दिनों में हर महीने लगभग 400 म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के आवेदन प्राप्त होते हैं। हड़ताल के कारण इन मामलों के निष्पादन में भारी कमी आई है। हालांकि, प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कुछ आवेदनों का निपटारा करने का प्रयास किया जा रहा है। राजस्व कर्मियों का प्रभार सौंपने का निर्देश
हड़ताल शुरू होने के बाद, विभागीय निर्देश के तहत अंचल अमीन और पंचायत सचिवों को राजस्व कर्मियों का प्रभार सौंपने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, पंचायत सचिवों ने राजस्व संबंधी कार्यों की जानकारी न होने का हवाला देते हुए यह प्रभार लेने से इनकार कर दिया है। सोमवार को अंचल कार्यालय पहुंचे मंझवे पंचायत के दमनपुरा निवासी मुनिया देवी, शिवनडीह की सरस्वती देवी और पुतेरिया निवासी संतोष राम ने बताया कि वे कई दिनों से अपने जरूरी कार्यों को लेकर अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण कोई काम नहीं हो पा रहा है। अंचलाधिकारी ललिता कुमारी ने बताया कि विभागीय निर्देश के तहत वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अंचल अमीन और पंचायत सचिवों को प्रभार दिया गया था, लेकिन पंचायत सचिवों ने कार्य की जानकारी नहीं होने के कारण प्रभार लेने से इनकार कर दिया। फिलहाल अन्य कर्मियों के माध्यम से सीमित कार्यों का निष्पादन किया जा रहा है। जमुई जिले में राजस्व कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण अंचल कार्यालयों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया है। 11 फरवरी से जारी इस हड़ताल के चलते दाखिल-खारिज, परिमार्जन और जमाबंदी सुधार जैसे महत्वपूर्ण कार्य ठप पड़े हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस हड़ताल का सीधा असर आम लोगों और किसानों पर पड़ रहा है। अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज न होने से जमीन खरीदने वाले लोगों की रसीदें नहीं कट पा रही हैं। इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग के फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से संबंधित कई कार्य भी प्रभावित हुए हैं। अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे
जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों के लिए भी लोगों को अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। अंचल कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सामान्य दिनों में हर महीने लगभग 400 म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के आवेदन प्राप्त होते हैं। हड़ताल के कारण इन मामलों के निष्पादन में भारी कमी आई है। हालांकि, प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कुछ आवेदनों का निपटारा करने का प्रयास किया जा रहा है। राजस्व कर्मियों का प्रभार सौंपने का निर्देश
हड़ताल शुरू होने के बाद, विभागीय निर्देश के तहत अंचल अमीन और पंचायत सचिवों को राजस्व कर्मियों का प्रभार सौंपने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, पंचायत सचिवों ने राजस्व संबंधी कार्यों की जानकारी न होने का हवाला देते हुए यह प्रभार लेने से इनकार कर दिया है। सोमवार को अंचल कार्यालय पहुंचे मंझवे पंचायत के दमनपुरा निवासी मुनिया देवी, शिवनडीह की सरस्वती देवी और पुतेरिया निवासी संतोष राम ने बताया कि वे कई दिनों से अपने जरूरी कार्यों को लेकर अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण कोई काम नहीं हो पा रहा है। अंचलाधिकारी ललिता कुमारी ने बताया कि विभागीय निर्देश के तहत वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अंचल अमीन और पंचायत सचिवों को प्रभार दिया गया था, लेकिन पंचायत सचिवों ने कार्य की जानकारी नहीं होने के कारण प्रभार लेने से इनकार कर दिया। फिलहाल अन्य कर्मियों के माध्यम से सीमित कार्यों का निष्पादन किया जा रहा है।


