Landslide Victory: जापान के आम चुनावों में सनाई ताकाइची (Sanae Takaichi) की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत ने बीजिंग में खतरे की घंटी बजा दी है। जैसे ही यह साफ हुआ कि जापान की कमान अब एक कट्टर राष्ट्रवादी और चीन विरोधी नेता के हाथ में है, शी जिनपिंग के प्रशासन ने कूटनीतिक शिष्टाचार को ताक पर रखते हुए सीधी धमकी दे डाली। चीन ने चेतावनी दी है कि अगर जापान (China Japan Conflict) ने अपनी हदें पार कीं, तो उसे “करारा और निर्णायक जवाब” (Resolute Response) मिलेगा।
सवाल यह है कि ड्रैगन क्यों बौखलाया है ? (Taiwan Issue)
चीन की इस घबराहट की वजह ताकाइची की ‘हॉक’ (Hawk) यानी आक्रामक छवि है। वे जापान की अब तक की सबसे रूढ़िवादी और राष्ट्रवादी प्रधानमंत्रियों में से एक मानी जा रही हैं। ताकाइची का साफ एजेंडा है- जापान की ‘शांतिवादी सेना’ को एक ‘आक्रामक मिलिट्री पावर’ में बदलना। चीन को डर है कि ताकाइची के राज में जापान अब ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका के साथ मिलकर चीन की नाक में दम करेगा। चीनी विदेश मंत्रालय ने चुनाव नतीजों के तुरंत बाद बयान जारी कर कहा, “जापान को इतिहास से सबक लेना चाहिए और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आग से नहीं खेलना चाहिए।”
भारत कनेक्शन: मोदी के लिए ‘अच्छी खबर’, चीन की डबल टेंशन सनाई ताकाइची की जीत भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।
चीन की घेराबंदी: ताकाइची भारत के साथ मिलकर ‘क्वाड’ (Quad) को एक सैन्य गठबंधन (Military Alliance) की तरह मजबूत करने की पक्षधर हैं।
रक्षा सहयोग: भारत और जापान के बीच रक्षा सौदे और हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों को रोकने के लिए सहयोग अब और तेजी से बढ़ेगा।
पुराने रिश्ते: ताकाइची दिवंगत शिंजो आबे की शिष्या मानी जाती हैं, जो पीएम मोदी के बेहद करीबी थे। ऐसे में नई दिल्ली और टोक्यो के बीच ‘स्पेशल केमिस्ट्री’ देखने को मिलेगी जो चीन के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है।
यासुकुनी जा सकती हैं
ताकाइची चीन की सबसे बड़ी चिढ़ ‘यासुकुनी श्राइन’ (Yasukuni Shrine) को लेकर है। ताकाइची ने चुनाव प्रचार में साफ कहा था कि वे बतौर प्रधानमंत्री इस विवादित युद्ध स्मारक का दौरा करेंगी। चीन इसे अपने अपमान के तौर पर देखता है। अगर वे ऐसा करती हैं, तो एशिया में तनाव चरम पर पहुंच जाएगा।
चीन को ताकत से ही रोका जा सकता है
जानकारों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब जापान ने अपनी सुरक्षा नीति को इतना आक्रामक करने का मन बनाया है। ताकाइची का साफ मानना है- “बातचीत से नहीं, ताकत से ही चीन को रोका जा सकता है।”
चीनी मीडिया: चीन के सरकारी भोंपू ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने संपादकीय में लिखा है कि जापान “आत्मघाती रास्ते” पर चल पड़ा है।
ताइवान: ताइवान ने ताकाइची की जीत पर खुशी जताई है और इसे लोकतंत्र की जीत बताया है।
सैन्य अभ्यास: अगले हफ्ते जापान सागर में चीन अपनी नौसेना का शक्ति प्रदर्शन कर सकता है।
राजनयिक टकराव: क्या ताकाइची अपने शपथ ग्रहण में ताइवान के प्रतिनिधि को बुलाएंगी? अगर ऐसा हुआ तो चीन अपने राजदूत को वापस बुला सकता है।
परमाणु हथियार की बहस ?
ताकाइची पहले भी कह चुकी हैं कि जापान को अमेरिकी परमाणु हथियारों (Nuclear Sharing) को अपनी धरती पर तैनात करने पर विचार करना चाहिए। अगर वे इस दिशा में एक कदम भी बढ़ाती हैं, तो यह उत्तर कोरिया और चीन दोनों के लिए सीधा चैलेंज होगा।


