नालंदा में शिक्षा विभाग के 4 क्लर्क नपे,वेतन पर रोक:बाहरी लोगों को विभागीय दस्तावेज उपलब्ध कराने का आरोप, डीपीओ ने थमाया शोकॉज

नालंदा में शिक्षा विभाग के 4 क्लर्क नपे,वेतन पर रोक:बाहरी लोगों को विभागीय दस्तावेज उपलब्ध कराने का आरोप, डीपीओ ने थमाया शोकॉज

नालंदा जिला शिक्षा विभाग में गोपनीय दस्तावेजों के लीक होने का मामला सामने आया है। स्थापना डीपीओ आनंद शंकर ने विभाग की गोपनीयता भंग करने और बाहरी व्यक्तियों को कार्यालय के अभिलेख उपलब्ध कराने के आरोप में चार लिपिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने न केवल इनसे स्पष्टीकरण (शोकॉज) मांगा है, बल्कि तत्काल प्रभाव से इनके मार्च 2026 के वेतन की निकासी पर भी रोक लगा दी है। इन कर्मियों पर गिरी गाज जिन कर्मियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें प्रधान लिपिक जावेद हसन मंसूरी के साथ लिपिक फणि मोहन, अरुण कुमार और पुरुषोत्तम कुमार शामिल हैं। जानिए क्या है पूरा मामला स्थापना डीपीओ की ओर से जारी पत्र के अनुसार, विभाग को ऐसी सूचना मिल रही थी कि उक्त लिपिकों द्वारा कार्यालय की गोपनीयता भंग की जा रही है। ये कर्मी अधिकारियों के आदेश के बिना ही बाहरी लोगों को कार्यालय के महत्वपूर्ण पत्र, अभिलेख और सूचनाओं की प्रतियां उपलब्ध करा रहे थे। चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरे डीपीओ आनंद शंकर ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी इन चारों लिपिकों को इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर मौखिक रूप से कड़ी चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके, इनके आचरण में कोई सुधार नहीं हुआ, जिसे सरकारी सेवक आचरण नियमावली के प्रतिकूल माना गया है। इन लिपिकों की ओर से बाहरी व्यक्तियों को कागजात उपलब्ध कराए जा रहे थे। जब तक इनका संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता, तब तक मार्च माह का वेतन स्थगित रहेगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इनके खिलाफ उच्चाधिकारियों को कठोर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी। विभाग में मचा हड़कंप इस कार्रवाई के बाद जिला शिक्षा कार्यालय में हड़कंप मच गया है। डीपीओ ने साफ कर दिया है कि कार्यालय की शुचिता और गोपनीयता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब इन कर्मियों को यह साबित करना होगा कि उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई क्यों न की जाए। नालंदा जिला शिक्षा विभाग में गोपनीय दस्तावेजों के लीक होने का मामला सामने आया है। स्थापना डीपीओ आनंद शंकर ने विभाग की गोपनीयता भंग करने और बाहरी व्यक्तियों को कार्यालय के अभिलेख उपलब्ध कराने के आरोप में चार लिपिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने न केवल इनसे स्पष्टीकरण (शोकॉज) मांगा है, बल्कि तत्काल प्रभाव से इनके मार्च 2026 के वेतन की निकासी पर भी रोक लगा दी है। इन कर्मियों पर गिरी गाज जिन कर्मियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें प्रधान लिपिक जावेद हसन मंसूरी के साथ लिपिक फणि मोहन, अरुण कुमार और पुरुषोत्तम कुमार शामिल हैं। जानिए क्या है पूरा मामला स्थापना डीपीओ की ओर से जारी पत्र के अनुसार, विभाग को ऐसी सूचना मिल रही थी कि उक्त लिपिकों द्वारा कार्यालय की गोपनीयता भंग की जा रही है। ये कर्मी अधिकारियों के आदेश के बिना ही बाहरी लोगों को कार्यालय के महत्वपूर्ण पत्र, अभिलेख और सूचनाओं की प्रतियां उपलब्ध करा रहे थे। चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरे डीपीओ आनंद शंकर ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी इन चारों लिपिकों को इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर मौखिक रूप से कड़ी चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके, इनके आचरण में कोई सुधार नहीं हुआ, जिसे सरकारी सेवक आचरण नियमावली के प्रतिकूल माना गया है। इन लिपिकों की ओर से बाहरी व्यक्तियों को कागजात उपलब्ध कराए जा रहे थे। जब तक इनका संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता, तब तक मार्च माह का वेतन स्थगित रहेगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इनके खिलाफ उच्चाधिकारियों को कठोर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी। विभाग में मचा हड़कंप इस कार्रवाई के बाद जिला शिक्षा कार्यालय में हड़कंप मच गया है। डीपीओ ने साफ कर दिया है कि कार्यालय की शुचिता और गोपनीयता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब इन कर्मियों को यह साबित करना होगा कि उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई क्यों न की जाए।  

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