धीरेंद्र शास्त्री पर डोटासरा ने ली ‘चुटकी’:सफाई एंबेसडर बोले-‘टॉयलेट में AC लगवाए’; पूनिया ने खोला ‘पुराने चैप्टर’ का पन्ना

नमस्कार राजनीति के रंग भी अजब-गजब हैं। पूर्व सीएम के पैर छूकर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ने पुराने जख्म का पन्ना खोल दिया। नागौर में सफाई के एंबेसडर ने नगर परिषद के अधिकारियों को अनोखी सलाह दे दी। कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने पुष्कर की जमीन से हिंदुओं से 4 बच्चों की अपील की तो डोटासराजी ने पैना जवाब दिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. पुराने विवाद का पन्ना और राजनीति के ‘रंग’ होली के रंग कितने ही पक्के हों, दो-तीन दिन में उतर ही जाते हैं। लेकिन राजनीति के रंगों का कोई तोड़ नहीं। पूनिया जी ने फुरसत के पलों में किताब लिखी थी। ‘अग्निपथ नहीं जनपथ’ (संवाद से संघर्ष तक) नाम की इस पुस्तक को लेकर वे उत्साहित हैं। किसी बड़े नेता से मिलते हैं तो साइन करके पुस्तक भेंट कर देते हैं। पिछले दिनों ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत से मिले। गहलोत जी ने दिल खोलकर स्वागत किया। पूनिया जी ने दिग्गज नेता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। हंसी-खुशी बातें होने लगीं। इसके बाद पूनिया जी ने किताब के आमुख पेज पर अपने हस्ताक्षर किए और गहलोत जी के हाथों में थमा दी। गहलोत जी पन्ने पलटने लगे। इसके बाद उत्साहित पूनिया जी ने किताब का सबसे खास पन्ना खोलकर दिखाया। पन्ने पर गहलोत और पायलट का कार्टून छपा था और नीचे शीर्षक लिखा था- संकट विश्वास का। पूनिया जी ने मजे-मजे में पुराने जख्म कुरेद दिए। गहलोत ने बुरा नहीं माना। बल्कि वही पेज खोलकर छायाकारों को दिखाते हुए पूनिया जी के साथ फोटो खिंचवाया। रहीम ने इन्हीं मौकों के लिए लिखा था- क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात.. 2. सोच साफ तो टॉयलेट साफ लोग अपना चेहरा तो चमका लेते है, लेकिन सोच को नहीं चमका पाते। कई बार दुकान तो ऊंची होती, लेकिन पकवान फीके रह जाते हैं। एक अधिकारी हैं जिनका नाम केके गुप्ता है। इन्होंने डूंगरपुर को क्या से क्या बना दिया। इतना साफ किया कि डूंगरपुर इंदौर से टक्कर लेने लगा। शहर की सफाई रीलों में नजर आने लगी। उनके स्वच्छता अभियान से प्रभावित होकर भजनलाल सरकार ने उन्हें राजस्थान का स्वच्छता एंबेसडर बना दिया। अब इनका काम जिला-जिला घूमकर नगर पालिकाओं-नगर परिषदों और नगर निगमों में सफाई का मंत्र देते हैं। इसी कड़ी में वे नागौर पहुंच गए। वहां सफाई को लेकर उन्होंने नगर परिषद अधिकारियों और कर्मचारियों की क्लास ली। क्लास में जो शिक्षा दी वह गौर करने लायक। उन्होंने कहा- टॉयलेट की सफाई का टेस्ट करना है तो पहले अपने घरों में देखो कि क्या आपके घर के टॉयलेट चमचमा रहे हैं? या वे गंदे पड़े हैं? सरकारी टॉयलेट कई जगह इतने खराब होते हैं कि 5 मिनट खड़े रह जाओ तो गश खाकर गिर पड़ोगे। सबसे पहली जरूरत तो यही है कि माताएं-बहनें टॉयलेट जाकर सुरक्षित आ जाएं, बेहोश न हो जाएं। एक बात याद रखना, टॉयलेट नगरपालिका-नगर निगम के मंदिर होते हैं। मैंने ट्रायबल एरिया में टॉयलेट इतने क्लीन रखवाए कि उनके बाहर चप्पलों की जोड़ियां रखवा दी। घर में भी टॉयलेट के लिए अलग चप्पलें होती हैं। कहा कि टॉयलेट जाना है तो अपने जूते-चप्पल उतार दो। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे जूते की मिट्‌टी से हमारा पवित्र टॉयलेट गंदा हो जाए। नागौर के अधिकारी कर्मचारी आवाक। टॉयलेट को लेकर इतनी ऊंची सोच। गुप्ता जी ने आगे कहा- मैंने आदिवासी इलाके के टॉयलेट में एसी लगवा दिए। गुप्ता जी ने कमाल कर दिया है। अब गुजरात पर्यटन की तर्ज पर बस एक स्लोगन की जरूरत है- फागुन सा एहसास होगा जेठ में…कुछ पल तो गुजारो टॉयलेट में। 3. धीरेंद्र शास्त्री की अपील और डोटासरा का तंज पिछले दिनों कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने पुष्कर में कथा की। जन सैलाब उमड़ा। मंच से उन्होंने हिंदुओं को 4 बच्चे पैदा करने का मशवरा दे दिया। इधर राजधानी में विधानसभा चल रही थी। सदन की कार्यवाही के बाद पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा मीडिया से मुखातिब हुए तो एक पत्रकार ने सवाल उछाल दिया। पत्रकार ने पूछा- शास्त्रीजी 4 बच्चों की वकालत कर रहे हैं, इस पर क्या कहेंगे? डोटासरा मंद-मंद मुस्कुराए और फिर तंज भरे लहजे में कहा- शास्त्रीजी बीजेपी की बी टीम हैं। वे जो मशविरा हिंदुओं को दे रहे हैं, वह भाजपा और आरएसएस के लोगों को देना चाहिए। आरएसएस के मुखिया ने विवाह ही नहीं किया। अटल जी ने भी विवाह नहीं किया था। देश के मुखियाजी ने विवाह करके भी नहीं किया। और तो और खुद शास्त्री जी ने अभी तक विवाह नहीं किया है। तो पहले खुद गौर करें और फिर दुनिया को उपदेश दें। डोटासरा के इस बयान के बाद बात धीरेंद्र शास्त्री तक भी पहुंच गई। उनका जवाब आया। कथावाचक महाराज बोले- हम पक्के सनातनी हैं। अभी विवाह नहीं हुआ है लेकिन वादा करते हैं कि विवाह के बाद वहीं करेंगे जो कहा है। 3. चलते-चलते.. सबसे पक्का रंग मेहनत का होता है। श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ में वकील होली पर दिवाली मना रहे हैं। दरअसल वकील नया कोर्ट भवन बनाने और एडीजे की स्थापना की मांग कर रहे थे। आंदोलन महीने भर से चल रहा था। इस दौरान एसडीएम पर चिल्ला चुके थे। बापू की तस्वीर के नीचे दरवाजे पर लातें चला चुके थे। मांग जब नहीं मानी गई तो सड़कों पर उतर गए। मुखौटे लगाकर खूब प्रदर्शन किया। नारेबाजी की। सड़क रोक दी। भूख हड़ताल पर भी बैठ गए। सरकार पर गरीबी का तंज किया। इसके बाद जब कुछ नहीं सूझा तो कटोरे लेकर ट्रैफिक में घुस गए। भीख मांगने लगे। आखिरकार मेहनत रंग लाई। मुख्यमंत्री जी ने नए कोर्ट भवन के निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपए की घोषणा कर दी। इसके बाद धरनास्थल पर खूब ढोल बजे और आतिशबाजी की गई। इनपुट सहयोग- हनुमान तंवर (नागौर), प्रेम सुथार (सूरतगढ़)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *