मुंगेर में डोरा सप्ताह पूजा संपन्न:महिलाओं ने सवा हाथ डोरा बांधकर की भगवान भास्कर की आराधना, परिवार की सुख-समृद्धि की कामना

मुंगेर में डोरा सप्ताह पूजा संपन्न:महिलाओं ने सवा हाथ डोरा बांधकर की भगवान भास्कर की आराधना, परिवार की सुख-समृद्धि की कामना

मुंगेर में मंगलवार को डोरा सप्ताह पूजा आस्था और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों तथा अन्य स्थानों पर महिलाओं ने विधि-विधान से यह व्रत किया। व्रती महिलाओं ने हाथों में सवा हाथ डोरा बांधकर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड की रतनपुर पंचायत के चिरैयाबाद गांव में बड़ी संख्या में महिलाएं एक साथ एकत्रित होकर सामूहिक पूजा में शामिल हुईं। इस दौरान व्रतियों ने राजा नल और रानी दमयंती से संबंधित सप्ता-विपता कथा का श्रवण किया और उसे सुनाया भी। राजा नल ने अहंकारवश डोरा तोड़ दिया
कथा के अनुसार, रानी सप्ता माता की श्रद्धापूर्वक पूजा करती थीं, परंतु राजा नल ने अहंकारवश डोरा तोड़ दिया। इसके परिणामस्वरूप उनके जीवन में कई विपत्तियां आईं। बाद में पश्चाताप और क्षमा याचना के उपरांत सब कुछ सामान्य हो गया। यह कथा अहंकार त्यागने और आस्था बनाए रखने का संदेश देती है। पूजा के समापन के बाद पुरुष श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। व्रती रुक्मणि देवी ने बताया कि यह व्रत अत्यंत नियम और निष्ठा के साथ किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत से परिवार पर आने वाली विपत्तियां दूर होती हैं और दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है। सुहाग की रक्षा के लिए सिंदूर ग्रहण किया
पूजा के बाद सुहागिन महिलाओं ने भारती के माध्यम से अपने सुहाग की रक्षा के लिए सिंदूर ग्रहण किया। इसके अतिरिक्त, नई नवेली दुल्हनों को खोइचा के रूप में प्रसाद देकर आशीर्वाद प्रदान किया गया। मुंगेर में मंगलवार को डोरा सप्ताह पूजा आस्था और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों तथा अन्य स्थानों पर महिलाओं ने विधि-विधान से यह व्रत किया। व्रती महिलाओं ने हाथों में सवा हाथ डोरा बांधकर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड की रतनपुर पंचायत के चिरैयाबाद गांव में बड़ी संख्या में महिलाएं एक साथ एकत्रित होकर सामूहिक पूजा में शामिल हुईं। इस दौरान व्रतियों ने राजा नल और रानी दमयंती से संबंधित सप्ता-विपता कथा का श्रवण किया और उसे सुनाया भी। राजा नल ने अहंकारवश डोरा तोड़ दिया
कथा के अनुसार, रानी सप्ता माता की श्रद्धापूर्वक पूजा करती थीं, परंतु राजा नल ने अहंकारवश डोरा तोड़ दिया। इसके परिणामस्वरूप उनके जीवन में कई विपत्तियां आईं। बाद में पश्चाताप और क्षमा याचना के उपरांत सब कुछ सामान्य हो गया। यह कथा अहंकार त्यागने और आस्था बनाए रखने का संदेश देती है। पूजा के समापन के बाद पुरुष श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। व्रती रुक्मणि देवी ने बताया कि यह व्रत अत्यंत नियम और निष्ठा के साथ किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत से परिवार पर आने वाली विपत्तियां दूर होती हैं और दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है। सुहाग की रक्षा के लिए सिंदूर ग्रहण किया
पूजा के बाद सुहागिन महिलाओं ने भारती के माध्यम से अपने सुहाग की रक्षा के लिए सिंदूर ग्रहण किया। इसके अतिरिक्त, नई नवेली दुल्हनों को खोइचा के रूप में प्रसाद देकर आशीर्वाद प्रदान किया गया।  

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