पंजाब में शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के गैर-शिक्षण कार्यों से शिक्षकों को दूर रखने के निर्देशों के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बार फिर शिक्षकों को कक्षा से बाहर कर दिया है। स्टूडेंट्स की परीक्षाएं सिर पर खड़ी है। इस बार यह फैसला प्री-बोर्ड परीक्षाओं के बीच लिया गया है। विभाग ने ड्रॉपआउट और स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान के लिए शिक्षकों को घर-घर सर्वे में लगाने के आदेश दिए हैं। 30 जनवरी तक राज्यव्यापी सर्वे पूरा करने के आदेश 19 जनवरी को पंजाब समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha Abhiyan) के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर की ओर से जारी पत्र में सभी जिला व ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि 3 से 19 वर्ष आयु वर्ग के स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान के लिए 30 जनवरी तक राज्यव्यापी सर्वे पूरा किया जाए। गांवों से लेकर बस स्टैंड तक होगा सर्वे
पत्र के अनुसार यह सर्वे गांवों, वार्डों, ढाणियों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड और अन्य संवेदनशील इलाकों में किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रवासी परिवारों, निर्माण श्रमिकों, सड़क पर रहने वाले बच्चों, दिहाड़ी मजदूरों, घरेलू सहायकों और कबाड़ी बीनने वालों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए प्रेरित करना है। सर्वे की समेकित रिपोर्ट और प्रमाण पत्र, जिला शिक्षा अधिकारियों से सत्यापन के बाद 31 जनवरी तक समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय में जमा कराने होंगे। शिक्षकों ने जताई कड़ी आपत्ति
शिक्षकों का कहना है कि सर्वे का समय पूरी तरह अनुचित है। इस वक्त कक्षा 8, 10 और 12 की प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और छात्र लंबे शीतकालीन छुट्टियों के बाद पहले से ही सिलेबस पूरा करने के दबाव में हैं। लेक्चरर कैडर यूनियन के एक शिक्षक ने कहा कि-इस समय शिक्षकों को रिवीजन और डाउट क्लियरिंग पर ध्यान देना चाहिए। पत्र में यह भी स्पष्ट नहीं है कि सर्वे स्कूल समय में होगा या उसके बाद। साथ ही कई महिला प्राथमिक शिक्षक संवेदनशील इलाकों में जाने में असहज महसूस कर सकती हैं। विभाग का जवाब
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि “यह सर्वे हर साल किया जाता है और इससे सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने में मदद मिलती है। औपचारिक रूप से सर्वे 24 जनवरी से शुरू होगा और केवल उन्हीं शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो परीक्षा के दिनों में कक्षाओं से मुक्त होंगे। फिलहाल, शिक्षकों का मानना है कि ऐसे सर्वे के लिए अलग स्टाफ नियुक्त किया जाना चाहिए ताकि छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा तैयारी प्रभावित न हो।


