पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप का ‘क्रिप्टिक’ पोस्ट, कहा-दुनिया का सबसे शक्तिशाली रिसेट

पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप का ‘क्रिप्टिक’ पोस्ट, कहा-दुनिया का सबसे शक्तिशाली रिसेट

Donald Trump Trump’s cryptic post: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान के साथ होने वाली अहम शांति वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर लिखा, ‘वर्ल्ड मोस्ट पॉवरफुल रिसेट’ यानी दुनिया का सबसे शक्तिशाली रिसेट।

ट्रंप का यह पोस्ट उस समय आया जब उनके उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान के लिए रवाना हो रहे थे। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने और एक स्थायी समाधान खोजने के लिए शनिवार को इस्लामाबाद में आधिकारिक बातचीत शुरू होने वाली है।

Donald Trump

उधर, अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान रवाना होने से पहले ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ईरान ईमानदारी से बातचीत करे। कोई खेल नहीं खेले। अगर वह चालाकी करने की कोशिश करता है तो अमेरिकी टीम सख्त रुख अपनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि तेहरान गुड फेथ के साथ वार्ता करेगा तो अमेरिका भी खुले तौर पर वार्ता के लिए तैयार है।

होर्मुज पर ईरान का बड़ा ऐलान

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ वार्ता से पहले ईरान की तरफ से बड़ी घोषणा की गई, जिसके मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वालों से तेहरान रियाल में ट्रांजिस फीस वसूलेगा। इसके लिए अहम प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है। ईरानी संसद के नेशनल सिक्योरिटी कमीशन के अध्यक्ष के मुताबिक, यह प्रस्ताव भुगतान प्रणाली बदलने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उसका यह कदम डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मुजताब खामेनेई की खाड़ी देशों को सलाह

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से पहले खाड़ी देशों अपील की है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर भरोसा नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, मौजूदा हालात को समझना जरूरी है। खाड़ी देशों को सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए। हालाकि उनकी सलाह पर किसी खाड़ी देश की तरफ से आधिकारिक तौर पर प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की गई है।

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