Strait of Hormuz: मध्य-पूर्व में ईरान से दो सप्ताह के लिए सीजफायर करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ की सुरक्षा के लिए ईरान के साथ मिलकर एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) बनाने पर विचार कर रहा है।
दरअसल, एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के साथ यह नया सहयोग न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि अन्य बाहरी ताकतों के दखल को भी रोकेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इस सहयोग का मतलब ईरान को किसी तरह की छूट देना नहीं है। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं देंगे। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि चीन ने ईरान के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ट्रंप ने क्यों टाला हमला?
ईरान से युद्ध विराम के पीछे क्षेत्रीय शक्तियों का सहयोग का उल्लेख किया। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी दी कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के अनुरोध पर उन्होंने ईरान पर होने वाले बड़े हमले को टाला। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव एक व्यावहारिक आधार है, जिस पर स्थायी शांति के लिए बातचीत की जा सकती है। मौजूदा शर्त के अनुसार, ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलना होगा।
ट्रंप ने आगे कहा, ऐसा करने का कारण यह है कि हम पहले ही सभी सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर चुके हैं और उनसे आगे भी बढ़ चुके हैं। ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति और मध्य पूर्व में शांति से संबंधित एक निर्णायक समझौते की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। हमें ईरान से 10 सूत्री प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। हमारा मानना है कि यह बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार है।
अस्थायी शांति विराम
एक ओर जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति की बात कर रहे हैं तो वहीं सैन्य नेतृत्व ने इसे केवल एक अस्थाई विराम बताया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ पेंटागन में बोलते हुए जनरल डैन केन ने चेतावनी दी कि हमारी सेना ‘कॉम्बैट ऑपरेशंस’ को उसी गति और सटीकता के साथ फिर से शुरू करने के लिए तैयार है, जैसा कि 28 फरवरी से देखा गया है।
जनरल केन ने बताया कि पिछले 38 दिनों के अभियान में अमेरिका ने अपने 13 सैनिकों को खोया है। उन्होंने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए स्पष्ट किया कि सेना तब तक तैनात रहेगी जब तक किसी स्थायी समझौते को पूरी तरह लागू नहीं कर दिया जाता।


