ईरान के साथ मार्च में ही सीजफायर चाहते थे डोनाल्ड ट्रंप, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

ईरान के साथ मार्च में ही सीजफायर चाहते थे डोनाल्ड ट्रंप, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

Donald Trump Iran Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सीजफायर से पहले जमकर धमकी दी थी, लेकिन फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि धमकियों के बीच ट्रंप अंदरखाने सीजफायर की दिशा में काम कर रहे थे। हालांकि मार्च में दोनों देशों के बीच सीजफायर नहीं हुआ था। लेकिन कुछ दिन बाद ही अप्रैल में दो हफ्ते का युद्धविराम हो गया है। 

पर्दे के पीछे चल रही थी डील की कोशिश

रिपोर्ट के मुताबिक, सख्त बयानबाजी के बावजूद अमेरिका पहले से ही संघर्ष रोकने के विकल्प तलाश रहा था। खास तौर पर उसका फोकस दुनिया के अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर था।

अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान हुआ। यह घोषणा उस समय आई जब सिकुड़ ने कुछ ही घंटे पहले ईरान की पूरी सभ्यता खत्म करने की धमकी दी थी।

‘मार्च से ही चाहता था सीजफायर’

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप 21 मार्च से ही युद्धविराम के इंतज़ार थे। उस समय उन्होंने ईरान के पावर प्लांट तबाह करने की धमकी दी थी। बढ़ती तेल की कीमतें और ईरान की मजबूत स्थिति इस जल्दबाजी की बड़ी वजह बताई जा रही है।

पाकिस्तान बना अहम कड़ी

सीजफायर कराने में पाकिस्तान ने बैक चैनल के जरिए अहम भूमिका निभाई। अमेरिका ने इस्लामाबाद पर दबाव डाला कि वह तेहरान को बातचीत के लिए राजी करे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर रहे। तनाव बढ़ने के साथ उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से लगातार बातचीत की।

बाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस प्रस्ताव को पब्लिक किया, हालांकि उनके सोशल मीडिया पोस्ट में ड्राफ्ट शब्द दिखने से सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं। 

IRGC से मंजूरी में अचन

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अन्य नेताओं ने हॉर्मुज के बदले सीजफायर के प्रस्ताव पर पुरातन सहमति दे दी थी, लेकिन इसे लागू करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की मंजूरी जरूरी थी, जो आसान नहीं रही।

ईरान ने रोके हमले

आखिरकार ईरान ने ऐलान किया कि ईरान पर अमेरिकी हमले दो हफ्ते के लिए रोक दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला शहबाज़ शरीफ़ और आसिम मुनीर से बातचीत के बाद लिया गया। वहीं ईरान ने भी इशारा दिया कि अगर उस पर हमला नहीं होता तो वह अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा।

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