Donald Trump की Iran को दो टूक, Global Oil Supply में कोई भी रुकावट बर्दाश्त नहीं होगी

Donald Trump की Iran को दो टूक, Global Oil Supply में कोई भी रुकावट बर्दाश्त नहीं होगी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेल आपूर्ति को लेकर बयानबाजी फिर तेज हो गई है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि बहुत जल्द तेल की सप्लाई सामान्य होने लगेगी, चाहे इसमें ईरान का सहयोग मिले या नहीं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि तेल का प्रवाह जल्द ही शुरू हो जाएगा और इसमें ईरान की भूमिका उनके लिए ज्यादा मायने नहीं रखती। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के चलते तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। बताया जा रहा है कि ईरान की ओर से इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की संभावना जताई गई है, जिसे पश्चिमी देशों ने सिरे से खारिज कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अस्थायी युद्धविराम के दौरान जहाजों से विशेष शुल्क वसूलने की योजना बना सकता है, हालांकि इस पर अभी आधिकारिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा होता है तो इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
बता दें कि ट्रंप ने अपने बयान में ईरान को लेकर अपनी नीति का भी बचाव किया और कहा कि मौजूदा स्थिति एक बड़ी रणनीतिक सफलता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके प्रयासों के चलते ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तेल आपूर्ति बहाल करने के लिए कौन सा रास्ता अपनाया जाएगा, चाहे वह कूटनीतिक बातचीत हो या अन्य विकल्प। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता पूरी तरह ईरान और समुद्री सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
बता दें कि 28 फरवरी को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात बिगड़े थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी। इस टकराव के चलते तेल कीमतों में तेजी आई और वैश्विक बाजार प्रभावित हुआ।
हाल ही में दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की गई है, जिससे स्थिति में कुछ राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अभी भी क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है और ऊर्जा बाजार पर इसका असर साफ देखा जा रहा है।

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