अररिया के फारबिसगंज में अवैध निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जांच के दौरान हुए विवाद का मामला आखिरकार आपसी सुलह पर समाप्त हो गया। 12 फरवरी को वरीय उप समाहर्ता डॉ. राम बाबू और निजी चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार के बीच हुई हाथापाई ने शहर में बड़ा बवाल खड़ा कर दिया था। इसके बाद निजी डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी, जिससे शहर की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ गई थीं। दो दिन तक मरीज परेशान होते रहे, लेकिन मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हो जाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई है। जांच के दौरान बढ़ा विवाद, CCTV में कैद हुई हाथापाई यह घटना फारबिसगंज के रेफरल अस्पताल रोड स्थित बचपन न्यू एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में हुई थी। जिला प्रशासन की ओर से गठित धावा दल यहां अवैध संचालन, फायर सेफ्टी, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस समेत अन्य मानकों की जांच कर रहा था। जांच के दौरान डॉक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच गर्मागर्म बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। मौके पर मौजूद CCTV कैमरों में पूरा विवाद रिकॉर्ड हो गया। वीडियो वायरल होते ही निजी चिकित्सकों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने तत्काल हड़ताल की घोषणा कर दी। इसके बाद फारबिसगंज के लगभग सभी निजी क्लीनिक, नर्सिंग होम, एक्स-रे सेंटर, अल्ट्रासाउंड लैब और पैथोलॉजी दो दिनों तक बंद रहे। मरीजों की दो दिनों तक रही भारी परेशानी अचानक चिकित्सा सेवाएं ठप होने से मरीजों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पताल या बाहर के शहरों पर निर्भर होना पड़ा। कई लोग दवा और उपचार के लिए भटकते रहे। रेफरल अस्पताल रोड, जो आमतौर पर मरीजों और उनके परिजनों से भरा रहता है, दो दिनों तक सुनसान बना रहा। एसडीएम कार्यालय में सुलह बैठक, दोनों पक्षों में लिखित समझौता जांच से शुरू हुआ विवाद जब पूरे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित करने लगा, तो प्रशासन हरकत में आया। फारबिसगंज अनुमंडलीय कार्यालय में मंगलवार को एक बैठक बुलाई गई, जिसमें IMA के पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित दोनों डॉक्टर मौजूद थे। बैठक में एसडीएम अभय कुमार, एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा, डीपीआरओ मनीष कुमार, थानाध्यक्ष राघवेंद्र कुमार सिंह, IMA सचिव डॉ. अतहर, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. संजीव कुमार समेत कई चिकित्सक उपस्थित रहे। काफी देर चली बातचीत के बाद अंततः दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ। समझौते में कहा गया कि घटना आवेश में हुई और यह आपसी गलतफहमी का परिणाम थी। दोनों पक्ष पुरानी बात भूलकर मामले को समाप्त करने पर सहमत जताए हैं। पुलिस व कोर्ट में दर्ज शिकायतें वापस ली जाएंगी। आगे ऐसी स्थिति न हो, इसके लिए बेहतर समन्वय बनाए रखा जाएगा। समझौते के बाद डॉ. दीपक कुमार और डॉ. राम बाबू ने एक-दूसरे से गले मिलकर मामला समाप्त करने का संकेत दिया। IMA ने हड़ताल खत्म की, शहर की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर लौटीं समझौते के बाद IMA सचिव डॉ. अतहर ने कहा कि आपसी सुलह से मामला खत्म हो गया है और सभी डॉक्टर काम पर लौट चुके हैं। इधर प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि विवाद परिस्थितिजन्य गलतफहमी से हुआ था और इसे मित्रतापूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है। हड़ताल खत्म होते ही बंद पड़े क्लीनिक, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी सेंटर खुल गए। रेफरल अस्पताल रोड पर फिर से रौनक लौट आई। उपचार के लिए भटक रहे मरीजों ने राहत की सांस ली। तनाव के बाद बनी सामंजस्य की मिसाल यह पूरा मामला प्रशासन और निजी चिकित्सकों के बीच बढ़ती तल्खी को उजागर करता है, लेकिन सुलह के बाद दोनों पक्षों ने जिस तरह आपसी संवाद से समाधान निकाला, वह सामंजस्य की मिसाल भी बन गया है। प्रशासनिक सख्ती और चिकित्सकों की नाराजगी के बीच संतुलन कायम करने का संदेश भी इस विवाद के समाधान से सामने आया है। अररिया के फारबिसगंज में अवैध निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जांच के दौरान हुए विवाद का मामला आखिरकार आपसी सुलह पर समाप्त हो गया। 12 फरवरी को वरीय उप समाहर्ता डॉ. राम बाबू और निजी चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार के बीच हुई हाथापाई ने शहर में बड़ा बवाल खड़ा कर दिया था। इसके बाद निजी डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी, जिससे शहर की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ गई थीं। दो दिन तक मरीज परेशान होते रहे, लेकिन मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हो जाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई है। जांच के दौरान बढ़ा विवाद, CCTV में कैद हुई हाथापाई यह घटना फारबिसगंज के रेफरल अस्पताल रोड स्थित बचपन न्यू एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में हुई थी। जिला प्रशासन की ओर से गठित धावा दल यहां अवैध संचालन, फायर सेफ्टी, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस समेत अन्य मानकों की जांच कर रहा था। जांच के दौरान डॉक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच गर्मागर्म बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। मौके पर मौजूद CCTV कैमरों में पूरा विवाद रिकॉर्ड हो गया। वीडियो वायरल होते ही निजी चिकित्सकों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने तत्काल हड़ताल की घोषणा कर दी। इसके बाद फारबिसगंज के लगभग सभी निजी क्लीनिक, नर्सिंग होम, एक्स-रे सेंटर, अल्ट्रासाउंड लैब और पैथोलॉजी दो दिनों तक बंद रहे। मरीजों की दो दिनों तक रही भारी परेशानी अचानक चिकित्सा सेवाएं ठप होने से मरीजों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पताल या बाहर के शहरों पर निर्भर होना पड़ा। कई लोग दवा और उपचार के लिए भटकते रहे। रेफरल अस्पताल रोड, जो आमतौर पर मरीजों और उनके परिजनों से भरा रहता है, दो दिनों तक सुनसान बना रहा। एसडीएम कार्यालय में सुलह बैठक, दोनों पक्षों में लिखित समझौता जांच से शुरू हुआ विवाद जब पूरे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित करने लगा, तो प्रशासन हरकत में आया। फारबिसगंज अनुमंडलीय कार्यालय में मंगलवार को एक बैठक बुलाई गई, जिसमें IMA के पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित दोनों डॉक्टर मौजूद थे। बैठक में एसडीएम अभय कुमार, एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा, डीपीआरओ मनीष कुमार, थानाध्यक्ष राघवेंद्र कुमार सिंह, IMA सचिव डॉ. अतहर, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. संजीव कुमार समेत कई चिकित्सक उपस्थित रहे। काफी देर चली बातचीत के बाद अंततः दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ। समझौते में कहा गया कि घटना आवेश में हुई और यह आपसी गलतफहमी का परिणाम थी। दोनों पक्ष पुरानी बात भूलकर मामले को समाप्त करने पर सहमत जताए हैं। पुलिस व कोर्ट में दर्ज शिकायतें वापस ली जाएंगी। आगे ऐसी स्थिति न हो, इसके लिए बेहतर समन्वय बनाए रखा जाएगा। समझौते के बाद डॉ. दीपक कुमार और डॉ. राम बाबू ने एक-दूसरे से गले मिलकर मामला समाप्त करने का संकेत दिया। IMA ने हड़ताल खत्म की, शहर की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर लौटीं समझौते के बाद IMA सचिव डॉ. अतहर ने कहा कि आपसी सुलह से मामला खत्म हो गया है और सभी डॉक्टर काम पर लौट चुके हैं। इधर प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि विवाद परिस्थितिजन्य गलतफहमी से हुआ था और इसे मित्रतापूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है। हड़ताल खत्म होते ही बंद पड़े क्लीनिक, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी सेंटर खुल गए। रेफरल अस्पताल रोड पर फिर से रौनक लौट आई। उपचार के लिए भटक रहे मरीजों ने राहत की सांस ली। तनाव के बाद बनी सामंजस्य की मिसाल यह पूरा मामला प्रशासन और निजी चिकित्सकों के बीच बढ़ती तल्खी को उजागर करता है, लेकिन सुलह के बाद दोनों पक्षों ने जिस तरह आपसी संवाद से समाधान निकाला, वह सामंजस्य की मिसाल भी बन गया है। प्रशासनिक सख्ती और चिकित्सकों की नाराजगी के बीच संतुलन कायम करने का संदेश भी इस विवाद के समाधान से सामने आया है।


