वित्त वर्ष 2025-26 का अंत करीब है और 31 मार्च की डेडलाइन से पहले सही निवेश न करने पर नौकरीपेशा और कारोबारी दोनों को भारी नुकसान हो सकता है। टैक्स बचाने के लिए सरकार ने कई कानूनी रास्ते दिए हैं, लेकिन ज्यादातर लोग आखिरी वक्त में चूक जाते हैं और हजारों रुपये की बचत गवां देते हैं। इन कानूनी रास्तों के जरिए निवेशकों को अपनी कमाई बचाने में मदद मिलती है:
सेक्शन 80C से डेढ़ लाख तक की छूट
टैक्स बचाने का सबसे बड़ा जरिया है धारा 80C, जिसके तहत इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS), PPF और टैक्स सेविंग FD में निवेश करके कुल 1.5 लाख रुपये तक की कटौती क्लेम की जा सकती है। ELSS में सबसे कम 3 साल का लॉक-इन होता है और रिटर्न भी बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए यह निवेशकों में सबसे लोकप्रिय विकल्प है।
NPS में निवेश दिलाएगा अतिरिक्त छूट
सेक्शन 80CCD(1B) के तहत नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने पर 50,000 रुपये की अलग से छूट मिलती है, जो 80C की सीमा से ऊपर है। यानी कुल मिलाकर 2 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती सिर्फ इन दो सेक्शन से ली जा सकती है। इसके अलावा, कंपनी द्वारा NPS में किया गया योगदान सेक्शन 80CCD(2) के तहत अलग से छूट योग्य है।
हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम से बचाएं टैक्स
सेक्शन 80D के तहत खुद, पति-पत्नी, बच्चों और माता-पिता के लिए भरे गए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 60 साल से कम उम्र के लोग 25,000 रुपये तक और वरिष्ठ नागरिक 50,000 रुपये तक की कटौती ले सकते हैं। यह न केवल टैक्स बचाता है, बल्कि मेडिकल इमरजेंसी में सुरक्षा भी देता है।

होम लोन पर ब्याज का फायदा उठाएं
जो लोग होम लोन चुका रहे हैं, उनके लिए धारा 24(b) के तहत सेल्फ-ऑक्युपाइड प्रॉपर्टी पर 2 लाख रुपये तक के ब्याज पर छूट मिलती है। पहली बार घर खरीदने वाले सेक्शन 80EEA के तहत अतिरिक्त 1.5 लाख रुपये की छूट भी पा सकते हैं। लोन के मूलधन को लौटाने पर सेक्शन 80C में राहत अलग से मिलती है।
किराया चुकाने वालों के लिए जरूरी
किराए के मकान में रहने वाले कर्मचारी धारा 10(13A) के तहत हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स छूट ले सकते हैं। अगर कंपनी उन्हें HRA देती है, तो वे इस छूट का फायदा उठा सकते हैं। अगर किसी कर्मचारी को HRA नहीं मिलता, तो वह सेक्शन 80GG के तहत साल में अधिकतम 60,000 रुपये तक की टैक्स राहत ले सकता है।
एजुकेशन लोन और दान
उच्च शिक्षा के लिए धारा 80E के तहत लिए गए लोन पर टैक्स बचत मिलती है। यह कटौती अधिकतम 8 वर्षों तक या ब्याज चुकाए जाने तक, जो भी पहले हो, के लिए उपलब्ध है। इसके अलावा, सेक्शन 80G के तहत मान्यता प्राप्त धर्मार्थ संस्थाओं को दिए गए दान पर भी टैक्स छूट क्लेम की जा सकती है।
ध्यान रखें
यह जानना जरूरी है कि ऊपर बताई गई अधिकांश छूटें केवल पुराने टैक्स रिजीम में लागू होती हैं। नए रिजीम में सीमित लाभ मिलते हैं- जैसे कि किराए पर दी गई संपत्ति पर होम लोन ब्याज, नियोक्ता का NPS योगदान और 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन। इसलिए 31 मार्च से पहले अपने टैक्स एडवाइजर से सलाह लें और यह तय करें कि आपके लिए कौन सा रिजीम फायदेमंद है।


