अयोध्या : चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद देशभर में कई धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। ज्योतिषाचार्यों और धर्मग्रंथों में ग्रहण काल को विशेष माना गया है। गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण जैसे ग्रंथों में ग्रहण के दौरान और उसके बाद शुद्धि व स्नान का महत्व बताया गया है। वहीं खगोल विज्ञान के अनुसार यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है।
क्या न करने की दी जाती है सलाह?
ग्रहण के दौरान रखा भोजन न खाएं : धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण काल में बना या खुला रखा भोजन अशुद्ध हो सकता है। इसलिए ग्रहण समाप्ति के बाद ताजा भोजन बनाने की सलाह दी जाती है। कई परिवारों में भोजन में तुलसी पत्ता डालने की परंपरा भी है।
स्नान किए बिना पूजा-पाठ न करें : मान्यता के अनुसार ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर घर और मंदिर की शुद्धि करना शुभ माना जाता है। इसके बाद ही पूजा-पाठ या हवन करने की परंपरा है।
घर की शुद्धि से पहले भोजन न पकाएं : कई लोग गंगाजल छिड़ककर घर की शुद्धि करते हैं और फिर रसोई में नया भोजन बनाते हैं।
नकारात्मक वातावरण से बचें : ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि ग्रहण के बाद सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना चाहिए और विवाद या कटु शब्दों से दूर रहना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी : कुछ परंपराओं में गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के तुरंत बाद बाहर न निकलने और पहले स्नान-शुद्धि करने की सलाह दी जाती है।
वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
Indian Space Research Organisation (ISRO) और National Aeronautics and Space Administration (NASA) के अनुसार चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है और इससे भोजन या मानव स्वास्थ्य पर सीधा वैज्ञानिक प्रभाव प्रमाणित नहीं है।
इस तरह चंद्र ग्रहण के बाद की परंपराएं आस्था और सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ी हैं, जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण इसे प्राकृतिक घटना मानता है।


