ईओ के ट्रांसफर और जेई व अकाउंटेंट के निलंबन के बाद भी डीएमसी ऑफिस को रेवाड़ी नगर परिषद से अपने सवालों का इंतजार है। कार्यकारी ईओ ने ज्वाइनिंग के करीब 17 दिन भी पुराने ईओ से डीएमसी ऑफिस द्वारा अनियमितताओं को पूछे गए सवालों का जवाब देने में अभी तक कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। 17 को संभाला था कार्यभार सुशील कुमार भुक्कल की जगह 17 फरवरी को झज्जर नप के ईओ देवेंद्र कुमार ने रेवाड़ी नगर परिषद के कार्यकारी ईओ की जिम्मेदारी संभाली थी। रेवाड़ी नगर परिषद पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए नए ईओ से डीएमसी कार्यालय द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब प्राथमिकता से देने की उम्म्मीद थी। बावजूद इसके कार्यभार ग्रहण करने के बाद करीब एक पखवाड़ा बितने के बाद भी नए ईओ डीएमसी ऑफिस द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दे पाए हैं।
इन सवालों के मांगे थे जवाब डीएमसी ऑफिस ने जेई व अकाउंटेंट के निलंबन के बाद नगर परिषद रेवाड़ी के ईओ से कुछ सवालों के जवाब मांगें थे। जिनमें डिस्पैच क्लर्क हरीश कुमार को छुटि्टयों का वेतन देने, तीन अस्पतालों को नियमों का उलंघन कर एनओसी देने, 900 वर्ग जमीन को आईडी 50 वर्ग गज दिखाने, भू-माफियाओं के साथ मिलकर स्कूल की सरकारी जमीन की आईडी बनाने के आरोपों के जवाब मांगे थे। जेई के बाद आया था क्लर्क का नाम अवैतनिक अवकाश का वेतन लेने के आरोप में स्थानीय निकाय निदेशक ने डीएमसी की रिपोर्ट पर जेई हैप्पी सैनी और अकाउंटेंट जितेंद्र यादव को निलंबित कर दिया था। इसके बाद ईओ पर क्लर्क हरीश को भी छुटि्टयों का वेतन देने के आरोप लगे थे। डीएमसी ने ईओ को पत्र लिखकर इसका जवाब मांगा था। पत्र का जवाब देने की बजाय पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक के भतीजे ईओ सुशील कुमार भुक्कल ने 16 फरवरी को अपने कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर डीएमसी की मंशा पर सवाल उठाते हुए जेई और अकाउंटेंट के निलंबन को नियमों के विरूद्ध बताया था।
डीएमसी की कार्यप्रणाली पर उठाए थे सवाल ईओ यहीं नहीं रूके थे, बल्कि डीएमसी को घेरते हुए ईओ ने एससी होने के चलते खुद को दिवंगत आईपीएस वाई पूरन कुमार की तरह प्रताड़ित करने के आरोप लगा दिए थे। जिसके बाद सरकार ने तीन घंटे बाद ईओ सुशील भुक्कल का ट्रांसफर पंचकूला मुख्यालय में कर झज्जर नगर परिषद के ईओ देवेंद्र कुमार को रेवाड़ी की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी थी। एक सवाल का मिला जवाब डीएमसी ब्रह्मप्रकाश ने कहा कि कुछ सवालों के जवाब नगर परिषद से मांगें गए थे। उनमें से अभी तक एक मामले का जवाब मिला है। जिसका रिव्यू करने के बाद पता चलेगा आगे क्या करना है। बाकी सवालों के जवाब का अभी इंतजार है।


