सुपौल के सरायगढ़-भपटियाही अंचल क्षेत्र में कोसी नदी व उसके तटवर्ती भू-भाग से बड़े पैमाने पर अवैध बालू उत्खनन का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों की शिकायत पर जिलाधिकारी सावन कुमार ने इस संबंध में खनन विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। हालांकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विभागीय स्तर पर अब तक सिर्फ औपचारिक कार्रवाई की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक प्रतिदिन देर रात से लेकर सुबह व सुबह से शाम तक बालू माफियाओं द्वारा दर्जनों ट्रैक्टर व ट्रॉली के माध्यम से बालू ढुलाई का खेल जारी रहता है। आरोप है कि प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रैक्टर बालू सीधे नदी और उसके आसपास के तटीय इलाकों से निकाले जा रहे हैं। बिना अनुमति और लाइसेंस के हो रहा यह खनन न सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों की लूट है, बल्कि कोसी नदी के प्रवाह और तटबंधों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा माना जा रहा है। प्रति ट्रैक्टर ट्रॉली बालू 2000 रुपए से अधिक की कीमत पर बेचा जा रहा वहीं, माफियाओं द्वारा प्रति ट्रैक्टर ट्रॉली बालू 2000 रुपए से अधिक की कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो आगामी वर्षा व बाढ़ के मौसम में कोसी नदी की धारा बदलने का खतरा बढ़ सकता है। सुरक्षा तटबंध, स्पर और आसपास के गांवों पर सीधा खतरा इससे सुरक्षा तटबंध, स्पर और आसपास के गांवों पर सीधा खतरा मंडरा सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त अभियान चलाकर अवैध खनन पर अंकुश लगाने, माफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाने तथा बालू ढुलाई पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है। इधर, प्रभारी जिला खनन पदाधिकारी पुष्पा कुमारी ने बताया कि विभागीय टीम और पुलिस भी खनन स्थल पर गई थी, लेकिन ट्रैक्टर सहित चालक भी वहां से भाग निकले, बावजूद कार्रवाई की प्रकिया जारी है। सुपौल के सरायगढ़-भपटियाही अंचल क्षेत्र में कोसी नदी व उसके तटवर्ती भू-भाग से बड़े पैमाने पर अवैध बालू उत्खनन का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों की शिकायत पर जिलाधिकारी सावन कुमार ने इस संबंध में खनन विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। हालांकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विभागीय स्तर पर अब तक सिर्फ औपचारिक कार्रवाई की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक प्रतिदिन देर रात से लेकर सुबह व सुबह से शाम तक बालू माफियाओं द्वारा दर्जनों ट्रैक्टर व ट्रॉली के माध्यम से बालू ढुलाई का खेल जारी रहता है। आरोप है कि प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रैक्टर बालू सीधे नदी और उसके आसपास के तटीय इलाकों से निकाले जा रहे हैं। बिना अनुमति और लाइसेंस के हो रहा यह खनन न सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों की लूट है, बल्कि कोसी नदी के प्रवाह और तटबंधों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा माना जा रहा है। प्रति ट्रैक्टर ट्रॉली बालू 2000 रुपए से अधिक की कीमत पर बेचा जा रहा वहीं, माफियाओं द्वारा प्रति ट्रैक्टर ट्रॉली बालू 2000 रुपए से अधिक की कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो आगामी वर्षा व बाढ़ के मौसम में कोसी नदी की धारा बदलने का खतरा बढ़ सकता है। सुरक्षा तटबंध, स्पर और आसपास के गांवों पर सीधा खतरा इससे सुरक्षा तटबंध, स्पर और आसपास के गांवों पर सीधा खतरा मंडरा सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त अभियान चलाकर अवैध खनन पर अंकुश लगाने, माफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाने तथा बालू ढुलाई पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है। इधर, प्रभारी जिला खनन पदाधिकारी पुष्पा कुमारी ने बताया कि विभागीय टीम और पुलिस भी खनन स्थल पर गई थी, लेकिन ट्रैक्टर सहित चालक भी वहां से भाग निकले, बावजूद कार्रवाई की प्रकिया जारी है।


