सीवान मंडल जेल में डीएम-एसपी का ‘साइलेंट इंस्पेक्शन’:वार्डों की तलाशी ली, बंदियों से पूछताछ और सुविधाओं का जायजा लिया

सीवान मंडल जेल में डीएम-एसपी का ‘साइलेंट इंस्पेक्शन’:वार्डों की तलाशी ली, बंदियों से पूछताछ और सुविधाओं का जायजा लिया

सीवान मंडल कारा में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रये और पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा भारी टीम के साथ अचानक औचक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। करीब एक घंटे तक चले इस निरीक्षण के दौरान जेल के सभी वार्ड, किचेन और अस्पताल की गहन तलाशी ली गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद एक भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई। जेल अधीक्षक देवाशीष सिन्हा के अनुसार, डीएम-एसपी अचानक जेल गेट पर पहुंचे और तत्परता के साथ पूरे परिसर का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने वार्डों की तलाशी ली, बंदियों से पूछताछ की और जेल की सुविधाओं का जायजा लिया। लेकिन सवाल यही उठता है कि जब पूरे तामझाम के साथ छापेमारी की गई तो आखिर खाली हाथ क्यों लौटना पड़ा? स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह सिर्फ एक औपचारिकता थी या फिर किसी बड़ी सच्चाई पर पर्दा डालने की कोशिश? जेल जैसे संवेदनशील स्थान पर अक्सर मोबाइल, नशे के सामान और अन्य अवैध वस्तुओं की खबरें सामने आती रही हैं, ऐसे में इतनी बड़ी जांच के बाद भी “कुछ नहीं मिला” कहना कई सवाल खड़े करता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि निरीक्षण के बाद जब मीडिया ने डीएम और एसपी से जानकारी लेने की कोशिश की, तो दोनों अधिकारियों ने पूरी तरह चुप्पी साध ली। न फोन रिसीव किया गया और न ही व्हाट्सएप संदेशों का कोई जवाब दिया गया। यह रवैया खुद प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। आखिर क्यों डीएम-एसपी इस निरीक्षण की पूरी जानकारी साझा करने से बच रहे हैं? क्या अंदर कुछ ऐसा हुआ जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता? या फिर यह पूरा अभियान सिर्फ दिखावे तक ही सीमित था? सीवान की जनता अब जवाब चाहती है। जेल प्रशासन और जिला प्रशासन की इस चुप्पी ने पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कब और क्या सफाई देते हैं। सीवान मंडल कारा में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रये और पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा भारी टीम के साथ अचानक औचक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। करीब एक घंटे तक चले इस निरीक्षण के दौरान जेल के सभी वार्ड, किचेन और अस्पताल की गहन तलाशी ली गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद एक भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई। जेल अधीक्षक देवाशीष सिन्हा के अनुसार, डीएम-एसपी अचानक जेल गेट पर पहुंचे और तत्परता के साथ पूरे परिसर का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने वार्डों की तलाशी ली, बंदियों से पूछताछ की और जेल की सुविधाओं का जायजा लिया। लेकिन सवाल यही उठता है कि जब पूरे तामझाम के साथ छापेमारी की गई तो आखिर खाली हाथ क्यों लौटना पड़ा? स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह सिर्फ एक औपचारिकता थी या फिर किसी बड़ी सच्चाई पर पर्दा डालने की कोशिश? जेल जैसे संवेदनशील स्थान पर अक्सर मोबाइल, नशे के सामान और अन्य अवैध वस्तुओं की खबरें सामने आती रही हैं, ऐसे में इतनी बड़ी जांच के बाद भी “कुछ नहीं मिला” कहना कई सवाल खड़े करता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि निरीक्षण के बाद जब मीडिया ने डीएम और एसपी से जानकारी लेने की कोशिश की, तो दोनों अधिकारियों ने पूरी तरह चुप्पी साध ली। न फोन रिसीव किया गया और न ही व्हाट्सएप संदेशों का कोई जवाब दिया गया। यह रवैया खुद प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। आखिर क्यों डीएम-एसपी इस निरीक्षण की पूरी जानकारी साझा करने से बच रहे हैं? क्या अंदर कुछ ऐसा हुआ जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता? या फिर यह पूरा अभियान सिर्फ दिखावे तक ही सीमित था? सीवान की जनता अब जवाब चाहती है। जेल प्रशासन और जिला प्रशासन की इस चुप्पी ने पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कब और क्या सफाई देते हैं।  

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