इलाहाबाद हाईकोर्ट में कंपनी याचिका प्रकाश बाजपेई बनाम मेसर्स क्रिस्टल बायोटेक इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मामले में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।
न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की अदालत में चली इस कार्यवाही के दौरान उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच सीमा परिवर्तन के कारण जमीन के मालिकाना हक को लेकर पेंच फंस गया है। सुनवाई के दौरान अलीगढ़ के जिला मजिस्ट्रेट व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए और एक शपथ पत्र दाखिल किया। अपर महाधिवक्ता ने कहा सीमा में बदलाव हुआ अपर महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश (सीमा परिवर्तन) अधिनियम, 1979 लागू होने के बाद सीमाओं में बदलाव हुआ था। इस परिवर्तन के तहत 395.72 एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश राज्य को हस्तांतरित की गई थी, जिसमें से 1.28 एकड़ जमीन विभिन्न व्यक्तियों की है और शेष जमीन ग्राम सभा की संपत्ति मानी गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस सेल डीड के आधार पर ऑफिशियल लिक्विडेटर (ओ एल ) कब्जा लेने का प्रयास कर रहे हैं, वह 1995 से 1997 के बीच हरियाणा में निष्पादित की गई थी, जबकि यह भूमि उससे काफी पहले उत्तर प्रदेश को हस्तांतरित हो चुकी थी। कड़ा विरोध कर दी गईं दलीलें दूसरी ओर, ऑफिशियल लिक्विडेटर के वकील ने इस दलील का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि 23 जुलाई 2018 को दोनों राज्यों के अधिकारियों की उपस्थिति में प्रतीकात्मक कब्जा लिया गया था। उन्होंने नक्शे का हवाला देते हुए दावा किया कि केवल 8 एकड़ जमीन हरियाणा में है और बाकी उत्तर प्रदेश में स्थित है, इसलिए अधिकारियों को कब्जा सौंपना चाहिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने पलवल (हरियाणा) के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत शपथ पत्र के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। साथ ही, अलीगढ़ के जिला मजिस्ट्रेट को अगली सुनवाई की तारीख 4 मई 2026 तक यह बताने को कहा गया है कि जमीन हस्तांतरण के बाद उसे अधिसूचित करने के लिए क्या कदम उठाए गए और वर्तमान में उस जमीन का रख-रखाव कौन कर रहा है। अदालत ने अगली तारीख के लिए अलीगढ़ के जिला मजिस्ट्रेट की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी है।


