गयाजी में डीएम शिक्षकों की समस्याओं पर करेंगे सुनवाई:कल दोपहर ऑन स्पॉट समाधान, ट्रांसफर-पोस्टिंग और छुट्टी की परेशानियां नहीं सुनी जाएगी

गयाजी में डीएम शिक्षकों की समस्याओं पर करेंगे सुनवाई:कल दोपहर ऑन स्पॉट समाधान, ट्रांसफर-पोस्टिंग और छुट्टी की परेशानियां नहीं सुनी जाएगी

शिक्षकों की सालों पुरानी और लंबित समस्याओं को लेकर गया जिला प्रशासन ने एक नई पहल की है। पहली बार ऐसा हो रहा है, जब जिला शिक्षा कार्यालय में खुद डीएम शिक्षकों की सीधी सुनवाई करेंगे। 13 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे से जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर शिक्षा कार्यालय पहुंचकर शिक्षकों की समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही समाधान की दिशा तय करेंगे। यह व्यवस्था जिले में पहली बार की गई है। यह अलग बात है कि इस मौके पर ट्रांसफर-पोस्टिंग और छुट्टी से जुड़ी समस्याएं इंटरटेन नहीं की जाएगी। इस जनसुनवाई को लेकर शिक्षकों में खासा उत्साह है। अब तक करीब 180 शिक्षक अपनी-अपनी समस्याओं को लिखित रूप में कलेक्ट्रेट स्थित हेल्प डेस्क और पूछताछ केंद्र पर जमा कर चुके हैं। इन आवेदनों में वेतन भुगतान, एमएसीपी का लाभ, अंतर वेतन, सेवा निवृत्ति लाभ और लंबित प्रशासनिक मामलों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। शिक्षक और सेवानिवृत्त शिक्षक आवेदन लेकर पहुंचे खरखुरा के सेवानिवृत्त शिक्षक इंद्रदेव प्रसाद ने एमएसीपी के तहत अंतर वेतन भुगतान को लेकर आवेदन दिया है। इसी तरह मानपुर, बोधगया, बेलागंज, गुरारू, मोहनपुर, बाके बाजार, नगर निगम क्षेत्र समेत जिले के अलग-अलग प्रखंडों से शिक्षक और सेवानिवृत्त शिक्षक आवेदन लेकर पहुंचे हैं। इनमें सहायक शिक्षक, प्रधानाध्यापक, विशिष्ट शिक्षक, शिक्षा सेवक और नगर शिक्षक शामिल हैं। जनसुनवाई के दौरान जिला शिक्षा विभाग के तमाम वरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। आवेदक शिक्षक स्वयं अपनी बात रखेंगे। संबंधित फाइलों की मौके पर समीक्षा होगी। जिन मामलों का समाधान तुरंत संभव होगा, उन पर तत्काल आदेश दिए जाएंगे। जटिल मामलों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाएगी। सिस्टम को दुरुस्त करने की दिशा में भी बड़ा संदेश डीएम शशांक शुभंकर की इस पहल को शिक्षकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब तक शिक्षक अपनी समस्याओं को लेकर विभागों के चक्कर काटते रहे हैं। फाइलें टेबल से टेबल घूमती रहीं। कई मामले वर्षों से लंबित हैं। डीएम स्तर पर सीधी सुनवाई से इन मामलों में तेजी आने की उम्मीद जगी है। शिक्षकों का मानना है कि यह पहल केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सिस्टम को दुरुस्त करने की दिशा में बड़ा संदेश देगी। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि यह मॉडल आगे भी जारी रहेगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी इसी तरह की सीधी जनसुनवाई देखने को मिल सकती है। शिक्षकों की सालों पुरानी और लंबित समस्याओं को लेकर गया जिला प्रशासन ने एक नई पहल की है। पहली बार ऐसा हो रहा है, जब जिला शिक्षा कार्यालय में खुद डीएम शिक्षकों की सीधी सुनवाई करेंगे। 13 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे से जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर शिक्षा कार्यालय पहुंचकर शिक्षकों की समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही समाधान की दिशा तय करेंगे। यह व्यवस्था जिले में पहली बार की गई है। यह अलग बात है कि इस मौके पर ट्रांसफर-पोस्टिंग और छुट्टी से जुड़ी समस्याएं इंटरटेन नहीं की जाएगी। इस जनसुनवाई को लेकर शिक्षकों में खासा उत्साह है। अब तक करीब 180 शिक्षक अपनी-अपनी समस्याओं को लिखित रूप में कलेक्ट्रेट स्थित हेल्प डेस्क और पूछताछ केंद्र पर जमा कर चुके हैं। इन आवेदनों में वेतन भुगतान, एमएसीपी का लाभ, अंतर वेतन, सेवा निवृत्ति लाभ और लंबित प्रशासनिक मामलों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। शिक्षक और सेवानिवृत्त शिक्षक आवेदन लेकर पहुंचे खरखुरा के सेवानिवृत्त शिक्षक इंद्रदेव प्रसाद ने एमएसीपी के तहत अंतर वेतन भुगतान को लेकर आवेदन दिया है। इसी तरह मानपुर, बोधगया, बेलागंज, गुरारू, मोहनपुर, बाके बाजार, नगर निगम क्षेत्र समेत जिले के अलग-अलग प्रखंडों से शिक्षक और सेवानिवृत्त शिक्षक आवेदन लेकर पहुंचे हैं। इनमें सहायक शिक्षक, प्रधानाध्यापक, विशिष्ट शिक्षक, शिक्षा सेवक और नगर शिक्षक शामिल हैं। जनसुनवाई के दौरान जिला शिक्षा विभाग के तमाम वरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। आवेदक शिक्षक स्वयं अपनी बात रखेंगे। संबंधित फाइलों की मौके पर समीक्षा होगी। जिन मामलों का समाधान तुरंत संभव होगा, उन पर तत्काल आदेश दिए जाएंगे। जटिल मामलों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाएगी। सिस्टम को दुरुस्त करने की दिशा में भी बड़ा संदेश डीएम शशांक शुभंकर की इस पहल को शिक्षकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब तक शिक्षक अपनी समस्याओं को लेकर विभागों के चक्कर काटते रहे हैं। फाइलें टेबल से टेबल घूमती रहीं। कई मामले वर्षों से लंबित हैं। डीएम स्तर पर सीधी सुनवाई से इन मामलों में तेजी आने की उम्मीद जगी है। शिक्षकों का मानना है कि यह पहल केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सिस्टम को दुरुस्त करने की दिशा में बड़ा संदेश देगी। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि यह मॉडल आगे भी जारी रहेगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी इसी तरह की सीधी जनसुनवाई देखने को मिल सकती है।  

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