मुंगेर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित नया टोला दरियापुर गांव में होली के दिन डीजे बजाने को लेकर हुए विवाद के बाद पुलिस पर पथराव की घटना हुई थी। इस घटना के बाद से गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस की कार्रवाई के चलते ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस पर बेवजह मारपीट करने और घरों में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया है। गांव की महिलाओं का कहना है कि पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कई निर्दोष लोगों के साथ मारपीट की और घरों में घुसकर सामान भी तोड़ा। पुलिस ने 11 लोगों को किया गिरफ्तार दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि पुलिस ने इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना में शामिल अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार गांव में छापेमारी कर रही है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के कारण गांव में भय का माहौल है। कई ग्रामीणों ने पुलिस के डर से अपने घरों में ताला लगाकर गांव छोड़ दिया है। पड़ताल के दौरान लगभग 14 घरों में ताला लगा हुआ पाया गया। ग्रामीण बाहरी व्यक्तियों से बात करने से भी बच रहे हैं। उनमें यह डर भी है कि कहीं बाहर से आने वाला कोई व्यक्ति पुलिस का मुखबिर न हो। पुलिस कार्रवाई से मवेशियों पर भी असर यह भी सामने आया कि जिन परिवारों के लोग घर छोड़कर चले गए हैं, उनके मवेशी भी परेशानी में हैं। कई घरों के बाहर और अंदर गाय-भैंस बंधी हुई मिलीं, लेकिन उन्हें चारा-पानी देने वाला कोई नहीं था। स्थानीय लोगों ने बताया कि दो दिनों से कई मवेशी भूखे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लोग पुलिस के डर से घर लौटने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। कुछ लोग गंगा किनारे, तो कुछ बगीचे और दियारा क्षेत्र में शरण लेकर रह रहे हैं।
रातभर छत पर बैठकर गुजारनी पड़ रही रात गांव की महिलाओं से बातचीत के दौरान शुरुआत में वे कुछ भी बताने से हिचक रही थीं। लेकिन भरोसा दिलाने के बाद शोभा देवी, नेहा कुमारी, रूबी देवी, सबिता कुमारी और नवल किशोर पासवान सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि होली के दिन गांव के कुछ युवक डीजे बजा रहे थे। इसी दौरान पुलिस पहुंची और अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इसके बाद कुछ लोगों द्वारा पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। महिलाओं का आरोप है कि इसके बाद लगभग 50 की संख्या में पुलिसकर्मी गांव में पहुंचे और घरों की छत पर चढ़कर दरवाजे-खिड़कियां तोड़ते हुए घरों में घुस गए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों तक को नहीं छोड़ा। कई घरों के दरवाजे, खिड़कियां और वेंटिलेटर तोड़ दिए गए और जो भी पुरुष घर में मिला, उसे पकड़कर साथ ले जाया गया।
कैंसर पीड़ित बुजुर्ग ने सुनाई आपबीती गांव में जांच के दौरान 60 वर्षीय कैंसर पीड़ित नरेश कुमार पासवान ने बताया कि घटना के दिन वे घर में सो रहे थे। उसी दौरान पुलिस छत के रास्ते घर में घुस आई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दीं और उनके साथ भी मारपीट की। उन्होंने बताया कि आज भी उनके घर में टूटे हुए कांच बिखरे पड़े हैं और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं। गांव के कई घरों में इसी तरह के दृश्य देखने को मिल रहे हैं।
इस मामले में सदर डीएसपी अभिषेक आनंद ने कहा कि पुलिस किसी भी निर्दोष व्यक्ति को बेवजह परेशान नहीं करती है। उन्होंने बताया कि घटना में शामिल 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जो लोग फरार हैं, उन्हें जल्द से जल्द आत्मसमर्पण करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस घटना में शामिल नहीं हैं, उन्हें डरने की जरूरत नहीं है और वे अपने घर लौट सकते हैं। अगर किसी को पुलिस से बात करनी है तो वह डीआईजी, एसपी या सदर डीएसपी के सरकारी नंबर पर सीधे संपर्क कर सकता है। पुलिस हर संभव सहयोग करेगी। मुंगेर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित नया टोला दरियापुर गांव में होली के दिन डीजे बजाने को लेकर हुए विवाद के बाद पुलिस पर पथराव की घटना हुई थी। इस घटना के बाद से गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस की कार्रवाई के चलते ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस पर बेवजह मारपीट करने और घरों में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया है। गांव की महिलाओं का कहना है कि पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कई निर्दोष लोगों के साथ मारपीट की और घरों में घुसकर सामान भी तोड़ा। पुलिस ने 11 लोगों को किया गिरफ्तार दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि पुलिस ने इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना में शामिल अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार गांव में छापेमारी कर रही है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के कारण गांव में भय का माहौल है। कई ग्रामीणों ने पुलिस के डर से अपने घरों में ताला लगाकर गांव छोड़ दिया है। पड़ताल के दौरान लगभग 14 घरों में ताला लगा हुआ पाया गया। ग्रामीण बाहरी व्यक्तियों से बात करने से भी बच रहे हैं। उनमें यह डर भी है कि कहीं बाहर से आने वाला कोई व्यक्ति पुलिस का मुखबिर न हो। पुलिस कार्रवाई से मवेशियों पर भी असर यह भी सामने आया कि जिन परिवारों के लोग घर छोड़कर चले गए हैं, उनके मवेशी भी परेशानी में हैं। कई घरों के बाहर और अंदर गाय-भैंस बंधी हुई मिलीं, लेकिन उन्हें चारा-पानी देने वाला कोई नहीं था। स्थानीय लोगों ने बताया कि दो दिनों से कई मवेशी भूखे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लोग पुलिस के डर से घर लौटने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। कुछ लोग गंगा किनारे, तो कुछ बगीचे और दियारा क्षेत्र में शरण लेकर रह रहे हैं।
रातभर छत पर बैठकर गुजारनी पड़ रही रात गांव की महिलाओं से बातचीत के दौरान शुरुआत में वे कुछ भी बताने से हिचक रही थीं। लेकिन भरोसा दिलाने के बाद शोभा देवी, नेहा कुमारी, रूबी देवी, सबिता कुमारी और नवल किशोर पासवान सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि होली के दिन गांव के कुछ युवक डीजे बजा रहे थे। इसी दौरान पुलिस पहुंची और अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इसके बाद कुछ लोगों द्वारा पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। महिलाओं का आरोप है कि इसके बाद लगभग 50 की संख्या में पुलिसकर्मी गांव में पहुंचे और घरों की छत पर चढ़कर दरवाजे-खिड़कियां तोड़ते हुए घरों में घुस गए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों तक को नहीं छोड़ा। कई घरों के दरवाजे, खिड़कियां और वेंटिलेटर तोड़ दिए गए और जो भी पुरुष घर में मिला, उसे पकड़कर साथ ले जाया गया।
कैंसर पीड़ित बुजुर्ग ने सुनाई आपबीती गांव में जांच के दौरान 60 वर्षीय कैंसर पीड़ित नरेश कुमार पासवान ने बताया कि घटना के दिन वे घर में सो रहे थे। उसी दौरान पुलिस छत के रास्ते घर में घुस आई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दीं और उनके साथ भी मारपीट की। उन्होंने बताया कि आज भी उनके घर में टूटे हुए कांच बिखरे पड़े हैं और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं। गांव के कई घरों में इसी तरह के दृश्य देखने को मिल रहे हैं।
इस मामले में सदर डीएसपी अभिषेक आनंद ने कहा कि पुलिस किसी भी निर्दोष व्यक्ति को बेवजह परेशान नहीं करती है। उन्होंने बताया कि घटना में शामिल 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जो लोग फरार हैं, उन्हें जल्द से जल्द आत्मसमर्पण करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस घटना में शामिल नहीं हैं, उन्हें डरने की जरूरत नहीं है और वे अपने घर लौट सकते हैं। अगर किसी को पुलिस से बात करनी है तो वह डीआईजी, एसपी या सदर डीएसपी के सरकारी नंबर पर सीधे संपर्क कर सकता है। पुलिस हर संभव सहयोग करेगी।


