मूसमारा पुल का डायवर्सन बना ‌खतरनाक, स्कूली बच्चों से लेकर ग्रामीण तक खतरे में

मूसमारा पुल का डायवर्सन बना ‌खतरनाक, स्कूली बच्चों से लेकर ग्रामीण तक खतरे में

सिटी रिपोर्टर| नावकोठी रजाकपुर से पीरनगर गम्हरिया को जोड़ने वाली सड़क पर निर्माणाधीन मूसमारा पुल का डायवर्सन ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। वर्षों पुराना अंग्रेजी दौर का पुल तोड़कर नया पुल बनाया जा रहा है, लेकिन निर्माण के दौरान बनाया गया अस्थायी डायवर्सन न तो सुरक्षित है और न ही आवाजाही के लायक। हालात ऐसे हैं कि इस रास्ते से गुजरना मजबूरी बन गया है और हर गुजरता दिन किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पुराना पुल सड़क निर्माण के बाद काफी नीचे हो गया था, जिससे पहले से ही आने-जाने में परेशानी होती थी। अब नया पुल निर्माण शुरू होने के बाद उसके बगल में ऊंचा और संकरा डायवर्सन बना दिया गया है। सड़क के पूरब और पश्चिम दोनों ओर मिट्टी का ऊंचा टीला खड़ा कर दिया गया है। पैदल लोग किसी तरह निकल जाते हैं, लेकिन साइकिल और बाइक से गुजरना जोखिम भरा है। जरा सा संतुलन बिगड़ा और सीधे नीचे गिरने की आशंका बनी रहती है। यह सड़क केवल एक-दो गांवों की नहीं, बल्कि रजाकपुर, डुमरिया, खैरबन, ररिऔना, चक्का, पीरनगर, चकमुजफ्फर, नावकोठी, पहसारा समेत दर्जनों गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि पहसारा पूर्वी पंचायत के देवरा, गरही, मजनूपुर, गम्हरिया और पीरनगर गांवों के बच्चों को उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ररिऔना और मिडिल स्कूल ररिऔना इसी रास्ते से होकर जाना पड़ता है। रोजाना स्कूली बच्चे इस खतरनाक डायवर्सन से जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं। ग्रामीण मनीष कुमार, तपेश्वर यादव, अकलू पासवान, मो. इदरीश और मो. कैफूल ने बताया कि नियम के अनुसार पुल निर्माण से पहले सुरक्षित और सुविधाजनक डायवर्सन सड़क बननी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। चिमनी के बगल से बनी वैकल्पिक सड़क में गहरे गड्ढे हैं और वह खुद काफी नीचे है। खेतों में सिंचाई के बाद पानी भर जाने से उस रास्ते से गुजरना और भी मुश्किल हो जाता है। सिटी रिपोर्टर| नावकोठी रजाकपुर से पीरनगर गम्हरिया को जोड़ने वाली सड़क पर निर्माणाधीन मूसमारा पुल का डायवर्सन ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। वर्षों पुराना अंग्रेजी दौर का पुल तोड़कर नया पुल बनाया जा रहा है, लेकिन निर्माण के दौरान बनाया गया अस्थायी डायवर्सन न तो सुरक्षित है और न ही आवाजाही के लायक। हालात ऐसे हैं कि इस रास्ते से गुजरना मजबूरी बन गया है और हर गुजरता दिन किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पुराना पुल सड़क निर्माण के बाद काफी नीचे हो गया था, जिससे पहले से ही आने-जाने में परेशानी होती थी। अब नया पुल निर्माण शुरू होने के बाद उसके बगल में ऊंचा और संकरा डायवर्सन बना दिया गया है। सड़क के पूरब और पश्चिम दोनों ओर मिट्टी का ऊंचा टीला खड़ा कर दिया गया है। पैदल लोग किसी तरह निकल जाते हैं, लेकिन साइकिल और बाइक से गुजरना जोखिम भरा है। जरा सा संतुलन बिगड़ा और सीधे नीचे गिरने की आशंका बनी रहती है। यह सड़क केवल एक-दो गांवों की नहीं, बल्कि रजाकपुर, डुमरिया, खैरबन, ररिऔना, चक्का, पीरनगर, चकमुजफ्फर, नावकोठी, पहसारा समेत दर्जनों गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि पहसारा पूर्वी पंचायत के देवरा, गरही, मजनूपुर, गम्हरिया और पीरनगर गांवों के बच्चों को उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ररिऔना और मिडिल स्कूल ररिऔना इसी रास्ते से होकर जाना पड़ता है। रोजाना स्कूली बच्चे इस खतरनाक डायवर्सन से जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं। ग्रामीण मनीष कुमार, तपेश्वर यादव, अकलू पासवान, मो. इदरीश और मो. कैफूल ने बताया कि नियम के अनुसार पुल निर्माण से पहले सुरक्षित और सुविधाजनक डायवर्सन सड़क बननी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। चिमनी के बगल से बनी वैकल्पिक सड़क में गहरे गड्ढे हैं और वह खुद काफी नीचे है। खेतों में सिंचाई के बाद पानी भर जाने से उस रास्ते से गुजरना और भी मुश्किल हो जाता है।  

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