कृषि वर्ष 2025–26 में कृषि सांख्यिकी को सुदृढ़ बनाने और रबी मौसम में फसल कटनी प्रयोग से प्राप्त आंकड़ों को ऐप पर अपलोड करने को लेकर सोमवार को भोजपुर जिले में जिला स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण जिला पदाधिकारी तनय सुल्तानिया की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और फील्ड स्तर के कर्मियों ने भाग लिया। जिला पदाधिकारी ने प्रशिक्षणार्थियों को निर्देशित किया कि कृषि से जुड़े आंकड़ों की गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया और समय के भीतर क्षेत्र से सही आंकड़ों का संकलन किया जाए, ताकि विकासात्मक योजनाओं और नीति निर्धारण में गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों का उपयोग संभव हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गलत या विलंब से अपलोड किए गए आंकड़े भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान ई-स्टैटिस्टिक्स पोर्टल की विस्तृत जानकारी भी दी प्रशिक्षण के दौरान ई-स्टैटिस्टिक्स पोर्टल की विस्तृत जानकारी दी गई। जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को जिंसवार और फसल क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों को पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके साथ ही भारत सरकार के नए DGCES ऐप के माध्यम से अंचल स्तर पर रबी फसलों की फसल कटनी प्रयोग (CCE) से संबंधित आंकड़ों के संग्रह और अपलोड की जानकारी दी गई। कृषि वर्ष 2025–26 के अंतर्गत रबी मौसम में गेहूं के 152, जौ के 144, चना के 52, मसूर के 28, खेसारी के 32 और राई-सरसों के 28 फसल कटनी प्रयोग किए जाने हैं। वहीं CCE एग्री ऐप/पोर्टल के माध्यम से पंचायत स्तर पर रबी गेहूं के कुल 1150 फसल कटनी प्रयोग संपन्न किए जाने हैं। आंकड़ों के अपलोड से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण जिला सांख्यिकी पदाधिकारी मदन नारायण सिंह एवं मास्टर ट्रेनर अवर सांख्यिकी पदाधिकारी मनींद्र कुमार द्वारा दिया गया। इस मौके पर अपर समाहर्ता भोजपुर, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, भारत सरकार के एनएसएसओ की प्रतिनिधि मंजूषा कुमारी सहित सभी अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, राजस्व अधिकारी, प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी मौजूद रहे। बताया गया कि DGCES ऐप से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर फसल उपज दर का आकलन, नीति निर्धारण और खाद्यान्न के आयात-निर्यात संबंधी निर्णय लिए जाते हैं। वहीं CCE एग्री ऐप/पोर्टल से प्राप्त उपज दर के आधार पर राज्य सरकार द्वारा बिहार राज्य फसल सहायता योजना के अंतर्गत किसानों को मुआवजा प्रदान किया जाता है। कृषि वर्ष 2025–26 में कृषि सांख्यिकी को सुदृढ़ बनाने और रबी मौसम में फसल कटनी प्रयोग से प्राप्त आंकड़ों को ऐप पर अपलोड करने को लेकर सोमवार को भोजपुर जिले में जिला स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण जिला पदाधिकारी तनय सुल्तानिया की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और फील्ड स्तर के कर्मियों ने भाग लिया। जिला पदाधिकारी ने प्रशिक्षणार्थियों को निर्देशित किया कि कृषि से जुड़े आंकड़ों की गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया और समय के भीतर क्षेत्र से सही आंकड़ों का संकलन किया जाए, ताकि विकासात्मक योजनाओं और नीति निर्धारण में गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों का उपयोग संभव हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गलत या विलंब से अपलोड किए गए आंकड़े भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान ई-स्टैटिस्टिक्स पोर्टल की विस्तृत जानकारी भी दी प्रशिक्षण के दौरान ई-स्टैटिस्टिक्स पोर्टल की विस्तृत जानकारी दी गई। जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को जिंसवार और फसल क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों को पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके साथ ही भारत सरकार के नए DGCES ऐप के माध्यम से अंचल स्तर पर रबी फसलों की फसल कटनी प्रयोग (CCE) से संबंधित आंकड़ों के संग्रह और अपलोड की जानकारी दी गई। कृषि वर्ष 2025–26 के अंतर्गत रबी मौसम में गेहूं के 152, जौ के 144, चना के 52, मसूर के 28, खेसारी के 32 और राई-सरसों के 28 फसल कटनी प्रयोग किए जाने हैं। वहीं CCE एग्री ऐप/पोर्टल के माध्यम से पंचायत स्तर पर रबी गेहूं के कुल 1150 फसल कटनी प्रयोग संपन्न किए जाने हैं। आंकड़ों के अपलोड से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण जिला सांख्यिकी पदाधिकारी मदन नारायण सिंह एवं मास्टर ट्रेनर अवर सांख्यिकी पदाधिकारी मनींद्र कुमार द्वारा दिया गया। इस मौके पर अपर समाहर्ता भोजपुर, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, भारत सरकार के एनएसएसओ की प्रतिनिधि मंजूषा कुमारी सहित सभी अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, राजस्व अधिकारी, प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी मौजूद रहे। बताया गया कि DGCES ऐप से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर फसल उपज दर का आकलन, नीति निर्धारण और खाद्यान्न के आयात-निर्यात संबंधी निर्णय लिए जाते हैं। वहीं CCE एग्री ऐप/पोर्टल से प्राप्त उपज दर के आधार पर राज्य सरकार द्वारा बिहार राज्य फसल सहायता योजना के अंतर्गत किसानों को मुआवजा प्रदान किया जाता है।


