नालंदा में आज उप विकास आयुक्त शुभम कुमार ने एक प्रेस वार्ता की। इन्होंने योजना के व्यापक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। दरअसल, ग्रामीण भारत के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए केंद्र सरकार ने विकसित भारत गारंटी रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 लागू किया है, जो मनरेगा की सीमाओं को पार करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने का वादा करता है। उप विकास आयुक्त ने बताया कि VB-G RAM-G को केवल एक रोजगार योजना न मानकर ग्रामीण विकास के समग्र ढांचे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त ने बताया कि इस अधिनियम के तहत गारंटीकृत मजदूरी रोजगार की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन की गई है, जिससे ग्रामीण परिवारों की संभावित आय में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। योजना केवल मजदूरी आधारित राहत नहीं है, बल्कि टिकाऊ आजीविका, उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण का व्यापक सुधार है। किसानों के हितों की सुरक्षा योजना की एक विशेष बात यह है कि इसमें कृषि काम को प्राथमिकता देते हुए बुआई और कटाई के व्यस्त मौसम में राज्यों को योजना के कार्य अस्थायी रूप से रोकने की अनुमति दी गई है। यह प्रावधान उन आशंकाओं को दूर करता है जो अक्सर रोजगार योजनाओं को लेकर कृषि समुदाय में देखी जाती हैं। साथ ही, बेहतर सिंचाई ढांचे, जलवायु अनुकूल अवसंरचना और पोस्ट हार्वेस्टिंग नुकसान में कमी के माध्यम से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं में सामने आई अनियमितताओं जैसे अपूर्ण काम, मशीनों का अनधिकृत उपयोग और वित्तीय गबन की समस्याओं से निपटने के लिए इस मिशन में आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। एआई आधारित निगरानी प्रणाली, रियल टाइम एमआईएस डैशबोर्ड, जीपीएस और मोबाइल आधारित सत्यापन, और ग्राम पंचायत स्तर पर अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण इसकी मुख्य विशेषताएं हैं। आधार आधारित पंजीकरण और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली से मजदूरी का समय पर, पारदर्शी और सुरक्षित भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, जो पहले एक बड़ी चुनौती रही है। पलायन रोकने की कोशिश ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन एक गंभीर समस्या रही है। इस मिशन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर इस मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकना है। जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कों, संपर्क, भंडारण और बाजार अवसंरचना के विकास से ग्रामीण उद्यमियों और किसानों को बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी। मांग-आधारित मॉडल को छोड़कर मानक वित्तपोषण प्रणाली अपनाई गई है, जिससे राज्यों को पूर्वानुमेय वित्तीय संसाधन मिलेंगे और बजटीय अनुशासन मजबूत होगा। केंद्र और राज्यों के बीच संतुलित लागत-साझेदारी व्यवस्था भी इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। उप विकास आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि यह मिशन विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इसे पीएम गति-शक्ति जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ जोड़ा गया है, ताकि ग्रामीण विकास को एक समग्र दृष्टिकोण मिल सके। प्रेस वार्ता में जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, निर्देशक डीआरडीए, कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा सहित प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे। नालंदा में आज उप विकास आयुक्त शुभम कुमार ने एक प्रेस वार्ता की। इन्होंने योजना के व्यापक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। दरअसल, ग्रामीण भारत के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए केंद्र सरकार ने विकसित भारत गारंटी रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 लागू किया है, जो मनरेगा की सीमाओं को पार करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने का वादा करता है। उप विकास आयुक्त ने बताया कि VB-G RAM-G को केवल एक रोजगार योजना न मानकर ग्रामीण विकास के समग्र ढांचे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त ने बताया कि इस अधिनियम के तहत गारंटीकृत मजदूरी रोजगार की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन की गई है, जिससे ग्रामीण परिवारों की संभावित आय में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। योजना केवल मजदूरी आधारित राहत नहीं है, बल्कि टिकाऊ आजीविका, उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण का व्यापक सुधार है। किसानों के हितों की सुरक्षा योजना की एक विशेष बात यह है कि इसमें कृषि काम को प्राथमिकता देते हुए बुआई और कटाई के व्यस्त मौसम में राज्यों को योजना के कार्य अस्थायी रूप से रोकने की अनुमति दी गई है। यह प्रावधान उन आशंकाओं को दूर करता है जो अक्सर रोजगार योजनाओं को लेकर कृषि समुदाय में देखी जाती हैं। साथ ही, बेहतर सिंचाई ढांचे, जलवायु अनुकूल अवसंरचना और पोस्ट हार्वेस्टिंग नुकसान में कमी के माध्यम से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं में सामने आई अनियमितताओं जैसे अपूर्ण काम, मशीनों का अनधिकृत उपयोग और वित्तीय गबन की समस्याओं से निपटने के लिए इस मिशन में आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। एआई आधारित निगरानी प्रणाली, रियल टाइम एमआईएस डैशबोर्ड, जीपीएस और मोबाइल आधारित सत्यापन, और ग्राम पंचायत स्तर पर अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण इसकी मुख्य विशेषताएं हैं। आधार आधारित पंजीकरण और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली से मजदूरी का समय पर, पारदर्शी और सुरक्षित भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, जो पहले एक बड़ी चुनौती रही है। पलायन रोकने की कोशिश ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन एक गंभीर समस्या रही है। इस मिशन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर इस मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकना है। जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कों, संपर्क, भंडारण और बाजार अवसंरचना के विकास से ग्रामीण उद्यमियों और किसानों को बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी। मांग-आधारित मॉडल को छोड़कर मानक वित्तपोषण प्रणाली अपनाई गई है, जिससे राज्यों को पूर्वानुमेय वित्तीय संसाधन मिलेंगे और बजटीय अनुशासन मजबूत होगा। केंद्र और राज्यों के बीच संतुलित लागत-साझेदारी व्यवस्था भी इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। उप विकास आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि यह मिशन विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इसे पीएम गति-शक्ति जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ जोड़ा गया है, ताकि ग्रामीण विकास को एक समग्र दृष्टिकोण मिल सके। प्रेस वार्ता में जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, निर्देशक डीआरडीए, कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा सहित प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।


