खगड़िया में 75 साल पुरानी पांडुलिपियों की खोज:’ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत डिजिटल प्रोटेक्शन,आने वाली पीढ़ियां के लिए विरासत

खगड़िया में 75 साल पुरानी पांडुलिपियों की खोज:’ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत डिजिटल प्रोटेक्शन,आने वाली पीढ़ियां के लिए विरासत

खगड़िया में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत, जिले के गांवों में 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेजों, पांडुलिपियों और ऐतिहासिक पत्रों की खोज तेज कर दी गई है। इस अभियान का उद्देश्य इन अमूल्य धरोहरों को एकत्र कर उनका डिजिटल संरक्षण करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे ज्ञान और इतिहास की विरासत प्राप्त कर सकें। इसी क्रम में शनिवार को खगड़िया के जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी घनश्याम कुमार परबत्ता प्रखंड के माधवपुर स्थित ऐतिहासिक जन पुस्तकालय पहुंचे। उन्होंने यहां महाभारत की वर्षों पुरानी हस्तलिखित चौपाइयों सहित कई दुर्लभ ग्रंथों का गहन निरीक्षण किया। इन पांडुलिपियों की प्राचीनता और सांस्कृतिक महत्व से प्रभावित होकर, उन्होंने तत्काल इन दस्तावेजों को “ज्ञान भारतम् मिशन” के आधिकारिक ऐप पर अपलोड कर डिजिटल संरक्षण की प्रक्रिया शुरू की। निरीक्षण के दौरान, सामाजिक कार्यकर्ता लाल रतन सिंह ने पुस्तकालय की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि माधवपुर का यह जन पुस्तकालय क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान है और इसमें कई दुर्लभ तथा मूल्यवान ग्रंथ सुरक्षित हैं। उन्होंने प्रशासन से पुस्तकालय के शीघ्र जीर्णोद्धार और संरक्षण की मांग की, ताकि यह अमूल्य धरोहर नष्ट न हो। इसके बाद, पदाधिकारी घनश्याम कुमार परबत्ता निवासी स्वतंत्रता सेनानी द्वारिका दास के परिजनों से मिले। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक दस्तावेजों का अवलोकन किया। द्वारिका दास को स्वतंत्रता की 25वीं वर्षगांठ पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा राष्ट्रपति भवन में ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया था। वर्ष 1943 में हजारीबाग सेंट्रल जेल में रहते हुए उन्होंने अपने भाइयों को जो भावुक पत्र लिखा था, वह आज भी उनके परिवार द्वारा सुरक्षित रखा गया है। इस ऐतिहासिक चिट्ठी को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर संरक्षित किया गया, ताकि यह अमूल्य दस्तावेज समय की मार से बच सके और भविष्य की पीढ़ियां इससे प्रेरणा ले सकें। वहीं, खजरैठा निवासी श्रीबाबू गोपाल राय के परिजनों के पास वर्ष 1922 के पोस्टकार्ड पर लिखी गई कई पुरानी चिट्ठियां और दस्तावेज भी सुरक्षित पाए गए हैं। इन दस्तावेजों में उस दौर की भाषा, शैली और सामाजिक परिवेश की झलक मिलती है। पदाधिकारी ने आश्वासन दिया कि इन सभी पांडुलिपियों को भी चरणबद्ध तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर संरक्षित किया जाएगा। पदाधिकारी घनश्याम कुमार ने कहा कि “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत देशभर में एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, सूचीकरण और डिजिटलीकरण का लक्ष्य रखा गया है। खगड़िया जिले में भी इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि उनके घर, मंदिर, मठ, पुस्तकालय, विद्यालय या किसी भी निजी अथवा सरकारी संस्थान में 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेज, ग्रंथ या चिट्ठियां मौजूद हैं, तो वे इसकी सूचना दें, ताकि इन धरोहरों को सुरक्षित किया जा सके। मौके पर मौजूद जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश यादव ने गोगरी प्रखंड के चंदवाडीह क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए वहां वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में प्राचीन सभ्यता और लोकगाथाओं के कई प्रमाण मिलते हैं, जिन्हें उजागर कर इतिहास को समृद्ध किया जा सकता है।
इस दौरान विनय कुमार, वंशिकाश्री, अमित कुमार, जयराम दास, धर्मेंद्र कुमार पप्पू समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे जिले की सांस्कृतिक पहचान को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। खगड़िया में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत, जिले के गांवों में 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेजों, पांडुलिपियों और ऐतिहासिक पत्रों की खोज तेज कर दी गई है। इस अभियान का उद्देश्य इन अमूल्य धरोहरों को एकत्र कर उनका डिजिटल संरक्षण करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे ज्ञान और इतिहास की विरासत प्राप्त कर सकें। इसी क्रम में शनिवार को खगड़िया के जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी घनश्याम कुमार परबत्ता प्रखंड के माधवपुर स्थित ऐतिहासिक जन पुस्तकालय पहुंचे। उन्होंने यहां महाभारत की वर्षों पुरानी हस्तलिखित चौपाइयों सहित कई दुर्लभ ग्रंथों का गहन निरीक्षण किया। इन पांडुलिपियों की प्राचीनता और सांस्कृतिक महत्व से प्रभावित होकर, उन्होंने तत्काल इन दस्तावेजों को “ज्ञान भारतम् मिशन” के आधिकारिक ऐप पर अपलोड कर डिजिटल संरक्षण की प्रक्रिया शुरू की। निरीक्षण के दौरान, सामाजिक कार्यकर्ता लाल रतन सिंह ने पुस्तकालय की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि माधवपुर का यह जन पुस्तकालय क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान है और इसमें कई दुर्लभ तथा मूल्यवान ग्रंथ सुरक्षित हैं। उन्होंने प्रशासन से पुस्तकालय के शीघ्र जीर्णोद्धार और संरक्षण की मांग की, ताकि यह अमूल्य धरोहर नष्ट न हो। इसके बाद, पदाधिकारी घनश्याम कुमार परबत्ता निवासी स्वतंत्रता सेनानी द्वारिका दास के परिजनों से मिले। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक दस्तावेजों का अवलोकन किया। द्वारिका दास को स्वतंत्रता की 25वीं वर्षगांठ पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा राष्ट्रपति भवन में ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया था। वर्ष 1943 में हजारीबाग सेंट्रल जेल में रहते हुए उन्होंने अपने भाइयों को जो भावुक पत्र लिखा था, वह आज भी उनके परिवार द्वारा सुरक्षित रखा गया है। इस ऐतिहासिक चिट्ठी को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर संरक्षित किया गया, ताकि यह अमूल्य दस्तावेज समय की मार से बच सके और भविष्य की पीढ़ियां इससे प्रेरणा ले सकें। वहीं, खजरैठा निवासी श्रीबाबू गोपाल राय के परिजनों के पास वर्ष 1922 के पोस्टकार्ड पर लिखी गई कई पुरानी चिट्ठियां और दस्तावेज भी सुरक्षित पाए गए हैं। इन दस्तावेजों में उस दौर की भाषा, शैली और सामाजिक परिवेश की झलक मिलती है। पदाधिकारी ने आश्वासन दिया कि इन सभी पांडुलिपियों को भी चरणबद्ध तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर संरक्षित किया जाएगा। पदाधिकारी घनश्याम कुमार ने कहा कि “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत देशभर में एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, सूचीकरण और डिजिटलीकरण का लक्ष्य रखा गया है। खगड़िया जिले में भी इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि उनके घर, मंदिर, मठ, पुस्तकालय, विद्यालय या किसी भी निजी अथवा सरकारी संस्थान में 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेज, ग्रंथ या चिट्ठियां मौजूद हैं, तो वे इसकी सूचना दें, ताकि इन धरोहरों को सुरक्षित किया जा सके। मौके पर मौजूद जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश यादव ने गोगरी प्रखंड के चंदवाडीह क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए वहां वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में प्राचीन सभ्यता और लोकगाथाओं के कई प्रमाण मिलते हैं, जिन्हें उजागर कर इतिहास को समृद्ध किया जा सकता है।
इस दौरान विनय कुमार, वंशिकाश्री, अमित कुमार, जयराम दास, धर्मेंद्र कुमार पप्पू समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे जिले की सांस्कृतिक पहचान को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।  

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