गोपालगंज में दिव्यांग छात्रा 2KM पैदल जाती है स्कूल:ट्राईसाइकिल नहीं मिलने से परेशानी, डॉक्टर बनकर लोगों की करना चाहती है सेवा

गोपालगंज में दिव्यांग छात्रा 2KM पैदल जाती है स्कूल:ट्राईसाइकिल नहीं मिलने से परेशानी, डॉक्टर बनकर लोगों की करना चाहती है सेवा

गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड के रामनगर गांव में 15 वर्षीय दिव्यांग छात्रा सोनी कुमारी रोजाना दो किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती है। पैर से दिव्यांग होने के बावजूद सोनी का हौसला कम नहीं हुआ है। हालांकि, उसे अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ट्राईसाइकिल नहीं मिली है, जिससे उसकी राह और कठिन हो गई है। सोनी कुमारी भोरे प्रखंड के रामनगर गांव निवासी स्वर्गीय नंदकिशोर राम की बेटी है और कक्षा पहली की छात्रा है। उसके पिता का निधन 16 साल पहले टीबी की बीमारी से हो गया था, जब सोनी केवल एक साल की थी। इसके बाद घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी उसकी मां के कंधों पर आ गई। शारीरिक दिव्यांगता पढ़ाई में बन रही बाधा दो बहनों में छोटी सोनी को बचपन से ही पढ़ाई का बहुत शौक था, लेकिन आर्थिक तंगी और शारीरिक दिव्यांगता उसके रास्ते में बाधा बन रही थी। दो साल पहले, सोनी की मां गुलाइची देवी राजघाट गांव में खेत में काम करने गई थीं, जहां उनकी मुलाकात एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल अरुण कुमार से हुई। प्रिंसिपल अरुण कुमार ने सोनी की पढ़ाई के प्रति लगन देखकर उसे अपने स्कूल में निःशुल्क दाखिला दिया। तब से सोनी रोजाना अपने घर से दो किलोमीटर दूर राजघाट गांव स्थित स्कूल पैदल जाती है। उसकी मां गुलाइची देवी दूसरों के खेतों में मजदूरी करके परिवार का गुजारा करती हैं। गरीबी के बावजूद, मां अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। सोनी का सपना पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना है। डॉक्टर बनकर लोगों की करना चाहती है सेवा उसका कहना है कि वह उन लोगों की मदद करना चाहती है जो उसकी तरह असहाय और बीमार हैं। साथ ही वह डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती है। वहीं हाल ही में मशहूर गायिका व विधायक मैथिली ठाकुर ने इस छात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसने पूरे देश का ध्यान इस ओर खींचा है। उसकी राहें आसान नहीं हैं, क्योंकि उसके पास अब तक अपनी कोई ट्राईसाइकिल नहीं है। बैसाखियों या अन्य साधनों के अभाव में भी उसका शिक्षा के प्रति लगाव कम नहीं हुआ। छात्रा का जीवन दुखों और चुनौतियों से भरा रहा है। अब ऐसे में छात्रा के संघर्ष ही नहीं , बल्कि व्यवस्था की उन कमियों को भी उजागर करता है जहां एक जरूरतमंद दिव्यांग छात्रा 15 साल बाद भी बुनियादी सरकारी लाभ से वंचित है। गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड के रामनगर गांव में 15 वर्षीय दिव्यांग छात्रा सोनी कुमारी रोजाना दो किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती है। पैर से दिव्यांग होने के बावजूद सोनी का हौसला कम नहीं हुआ है। हालांकि, उसे अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ट्राईसाइकिल नहीं मिली है, जिससे उसकी राह और कठिन हो गई है। सोनी कुमारी भोरे प्रखंड के रामनगर गांव निवासी स्वर्गीय नंदकिशोर राम की बेटी है और कक्षा पहली की छात्रा है। उसके पिता का निधन 16 साल पहले टीबी की बीमारी से हो गया था, जब सोनी केवल एक साल की थी। इसके बाद घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी उसकी मां के कंधों पर आ गई। शारीरिक दिव्यांगता पढ़ाई में बन रही बाधा दो बहनों में छोटी सोनी को बचपन से ही पढ़ाई का बहुत शौक था, लेकिन आर्थिक तंगी और शारीरिक दिव्यांगता उसके रास्ते में बाधा बन रही थी। दो साल पहले, सोनी की मां गुलाइची देवी राजघाट गांव में खेत में काम करने गई थीं, जहां उनकी मुलाकात एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल अरुण कुमार से हुई। प्रिंसिपल अरुण कुमार ने सोनी की पढ़ाई के प्रति लगन देखकर उसे अपने स्कूल में निःशुल्क दाखिला दिया। तब से सोनी रोजाना अपने घर से दो किलोमीटर दूर राजघाट गांव स्थित स्कूल पैदल जाती है। उसकी मां गुलाइची देवी दूसरों के खेतों में मजदूरी करके परिवार का गुजारा करती हैं। गरीबी के बावजूद, मां अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। सोनी का सपना पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना है। डॉक्टर बनकर लोगों की करना चाहती है सेवा उसका कहना है कि वह उन लोगों की मदद करना चाहती है जो उसकी तरह असहाय और बीमार हैं। साथ ही वह डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती है। वहीं हाल ही में मशहूर गायिका व विधायक मैथिली ठाकुर ने इस छात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसने पूरे देश का ध्यान इस ओर खींचा है। उसकी राहें आसान नहीं हैं, क्योंकि उसके पास अब तक अपनी कोई ट्राईसाइकिल नहीं है। बैसाखियों या अन्य साधनों के अभाव में भी उसका शिक्षा के प्रति लगाव कम नहीं हुआ। छात्रा का जीवन दुखों और चुनौतियों से भरा रहा है। अब ऐसे में छात्रा के संघर्ष ही नहीं , बल्कि व्यवस्था की उन कमियों को भी उजागर करता है जहां एक जरूरतमंद दिव्यांग छात्रा 15 साल बाद भी बुनियादी सरकारी लाभ से वंचित है।  

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