बस्तर में डिजिटल स्ट्राइक:सरेंडर नक्सलियों को ट्रेनिंग के बाद दे रहे वेलकम किट, इससे ट्रैकिंग आसान

बस्तर के घने जंगलों और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में नक्सलियों के खिलाफ चल रही लड़ाई अब एक नए और डिजिटल मोड़ पर आ गई है। छत्तीसगढ़ का गृह विभाग अब बंदूक की जगह तकनीक और विश्वास के सहारे नक्सलवाद की जड़ें खोदने की तैयारी में है। इस रणनीति के केंद्र में वे नक्सली हैं, जो हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। शासन इन आत्मसमर्पित नक्सलियों का एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर रही है जिसकी पहुंच अब बस्तर के उन गांवों तक हो गई है, जहाँ कभी वर्दीधारी जवानों का पहुंचना भी मुश्किल था।
ट्रेनिंग और किट देकर नई पहचान के साथ नई जिम्मेदारी
आत्मसमर्पण के बाद इन युवाओं को सीधे मैदान में नहीं उतारा जा रहा है। शासन द्वारा उन्हें विशेष प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) दी जा रही है, जिसमें उन्हें संवाद कौशल और सूचना तंत्र के संचालन के गुर सिखाए जा रहे हैं। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, गृह विभाग की ओर से प्रत्येक को एक ‘वेलकम किट’ प्रदान की जा रही है। डिजिटल डेटाबेस: एक क्लिक पर पूरी कुंडली
इस विशेष अभियान के तहत गृह विभाग ने तकनीक का बखूबी इस्तेमाल किया है। आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को न केवल मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, बल्कि उन्हें एक डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया है। विभाग के पास अब एक ऐसा रिकॉर्ड मौजूद है, जिसमें इन सभी पूर्व नक्सलियों के नाम, गांव और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। एक क्लिक करते ही यह पता चल जाता है कि कौन सा व्यक्ति किस क्षेत्र में सक्रिय है। ध्वस्त होता नक्सलियों का खुफिया तंत्र
नक्सली संगठन हमेशा से अपने स्थानीय नेटवर्क ‘संगम सदस्यों’ के जरिए गांवों पर पकड़ बनाए रखते थे। लेकिन अब पासा पलट चुका है। समर्पण कर चुके ये युवा उन्हीं रास्तों, चेहरों और रणनीतियों से वाकिफ हैं, जिनका इस्तेमाल नक्सली करते हैं। अब गांव के भीतर होने वाली किसी भी संदिग्ध हलचल या नक्सलियों की मौजूदगी की खबर मिनटों में जिला मुख्यालय और सुरक्षा कैंपों तक पहुंच रही है। विश्वास की बहाली और विकास की राह
गृह विभाग की इस पहल का एक बड़ा मनोवैज्ञानिक असर भी देखने को मिल रहा है। जब ग्रामीण अपने ही बीच के किसी युवक को सरकार की मदद करते और बेहतर जीवन जीते देखते हैं, तो उनका डर कम होता है। यह नेटवर्क न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भी सेतु का काम करेगा। बस्तर में मोबाइल की एक ‘रिंग’ अब नक्सली खेमे में घबराहट पैदा कर रही है।

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