जैसलमेर: नवरात्र में डिजिटल डिटॉक्स ट्रेंड… युवा नौ दिन सोशल मीडिया से दूर

जैसलमेर: नवरात्र में डिजिटल डिटॉक्स ट्रेंड… युवा नौ दिन सोशल मीडिया से दूर

नवरात्र के पावन अवसर पर इस बार शहर के युवाओं के बीच एक नई सोच आकार ले रही है। लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजिटल निर्भरता के बीच युवा अब डिजिटल डिटॉक्स अपनाकर नौ दिनों तक सोशल मीडिया से दूरी बना रहे हैं। युवाओं के अनुसार यह पहल मानसिक संतुलन और आत्मअनुशासन की दिशा में भी बड़ा कदम बनती जा रही है। शहर के कॉलेज छात्रों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों और नौकरीपेशा युवाओं ने इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म से खुद को अलग कर लिया है। उनका कहना है कि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से ध्यान भटकता है और मानसिक थकान बढ़ती है। ऐसे में नवरात्र उन्हें खुद से जुड़ने का बेहतर अवसर दे रहा है।

यूं बदल रही युवाओं की दिनचर्या

-सुबह की शुरुआत अब मोबाइल से नहीं, ध्यान और योग से

-सोशल मीडिया की जगह धार्मिक पाठ और पूजा-अर्चना

-परिवार के साथ समय बिताने की आदत में वृद्धि

-किताबें पढ़ने और आत्मचिंतन की ओर झुकाव

-रात में बेहतर नींद और दिनभर अधिक ऊर्जा का अनुभव

… इसलिए बढ़ रहा है डिजिटल डिटॉक्स ट्रेंड

-लगातार स्क्रीन टाइम से बढ़ता मानसिक तनाव

-एकाग्रता और उत्पादकता में कमी

-खुद के लिए समय निकालने की जरूरत

-नवरात्र के आध्यात्मिक माहौल का प्रभाव

यह है हकीकत

मनोचिकित्सकों के अनुसार सीमित समय के लिए डिजिटल माध्यमों से दूरी बनाना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है। इससे तनाव कम होता है, नींद की गुणवत्ता सुधरती है और व्यक्ति अपने लक्ष्य पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाता है।

जैसलमेर में यह ट्रेंड धीरे-धीरे एक सकारात्मक अभियान का रूप ले रहा है। युवा न केवल खुद इसमें शामिल हो रहे हैं, बल्कि अपने दोस्तों और परिवार को भी प्रेरित कर रहे हैं। यह बदलाव यह संकेत देता है कि तकनीक के इस दौर में भी संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

शांति और सुकून का अनुभव

नवरात्र में मैंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली है। पहले दिन थोड़ी परेशानी हुई, क्योंकि मोबाइल देखने की आदत थी। लेकिन अब मन काफी शांत है। ध्यान और पूजा में समय देने से एक अलग सुकून मिला है। पढ़ाई में भी पहले से ज्यादा फोकस आया है और समय का बेहतर उपयोग हो रहा है।

-राहुल चौधरी, छात्र

खुद को समझने का मौका

मैंने नौ दिनों के लिए सोशल मीडिया से ब्रेक लिया है। शुरुआत में बार-बार फोन चेक करने की आदत परेशान कर रही थी, लेकिन धीरे-धीरे नियंत्रण बढ़ गया। अब योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल किया है। इससे मानसिक शांति मिल रही है और खुद को समझने का मौका भी मिला है।

— पूजा विश्नोई, कॉलेज छात्रा

रिश्तों में आई मजबूती

ऑफिस के बाद मैं काफी समय मोबाइल पर बिताता था। इस बार नवरात्र में मैंने खुद को सीमित किया है। अब खाली समय में परिवार के साथ बैठता हूं और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेता हूं। इससे मानसिक तनाव कम हुआ है और रिश्तों में भी मजबूती आई है।

-अमन सिंह, नौकरीपेशा युवा

आत्मविकास की ओर कदम

डिजिटल डिटॉक्स मेरे लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है। सोशल मीडिया से दूर रहकर मैंने पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया है। ध्यान और योग से मन स्थिर हुआ है, जिससे एकाग्रता बढ़ी है। पहले जो समय मोबाइल पर व्यर्थ जाता था, अब वह आत्मविकास में लग रहा है।

— नेहा शर्मा, प्रतियोगी परीक्षार्थी

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