फरीदाबाद में डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख ठगे:NIA और ATS का अधिकारी बनकर डराया, 7 दिन तक फंसाकर रखा , पुलिस में केस दर्ज

फरीदाबाद में डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख ठगे:NIA और ATS का अधिकारी बनकर डराया, 7 दिन तक फंसाकर रखा , पुलिस में केस दर्ज

फरीदाबाद में साइबर ठगों ने एनआईए और सरकारी एजेंसियों के नाम का सहारा लेकर एक व्यक्ति से 48 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को एनआईए और एटीएस का सीनियर अधिकारी बताकर पीड़ित को करीब सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और डर का माहौल बनाकर उससे लाखों रुपये ऐंठ लिए। साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आधार और सिम कार्ड का डर दिखाकर फंसाया पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि, पीड़ित सुरेश बल्लभगढ़ सेक्टर-8 का निवासी है, जो पहले एक निजी कंपनी में कार्यरत था। वर्ष 2014 में कंपनी बंद होने के बाद वह घर पर ही रह रहा है। पीड़ित के अनुसार 8 दिसंबर को उसके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को हरियाणा प्रशासनिक विभाग, चंडीगढ़ का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसके आधार कार्ड पर जारी एक सिम का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में किया गया है। आरोपी ने दावा किया कि गिरफ्तार आतंकवादी से पूछताछ में पता चला है कि इसी सिम के जरिए 7 से 8 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, जिसमें पीड़ित को 10 प्रतिशत कमीशन मिला है। एनआईए अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की धमकी इसके बाद आरोपी ने एक अन्य नंबर देकर संपर्क करने को कहा। जब पीड़ित ने उस नंबर पर कॉल किया तो सामने वाले ने खुद को एनआईए-एटीएस का वरिष्ठ अधिकारी बताया और कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में नाम आने के कारण उसकी गिरफ्तारी तय है। आरोपियों ने पीड़ित से उसके सभी बैंक खातों, एफडी और संपत्ति की पूरी जानकारी हासिल कर ली। 9 दिसंबर को दो अलग-अलग नंबरों से कॉल कर आरबीआई, सुप्रीम कोर्ट, संपत्ति जब्ती और गिरफ्तारी वारंट से जुड़े फर्जी दस्तावेज भी भेजे गए। 48 लाख रुपये आरटीजीएस से ट्रांसफर कराए ठगों ने दबाव बनाकर पीड़ित से उसकी एफडी तुड़वाने और सारे पैसे खाते में जमा कराने को कहा। साथ ही यह भी धमकी दी कि अगर जांच के दौरान रकम ट्रांसफर नहीं की गई तो तुरंत गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्क कर ली जाएगी। डर के चलते पीड़ित ने 11 दिसंबर को 40 लाख रुपये और 15 दिसंबर को 8 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के 15 दिन के भीतर पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। संपर्क टूटने पर हुआ ठगी का अहसास जब 15 दिन बीतने के बाद भी पैसे वापस नहीं मिले और आरोपियों से संपर्क नहीं हो सका, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ पुलिस मामला दर्ज कर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।

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