डिजिटल अरेस्ट : दंपती से 1 करोड़ 34 लाख की ठगी

डिजिटल अरेस्ट : दंपती से 1 करोड़ 34 लाख की ठगी

अकेले रहने वाले दंपती के साथ और खासकर बुजुर्ग को सायबर ठग आसानी से निशाना बनाते हैं। कुछ ऐसा ही रतलाम के डीडीनगर पुलिस थाना क्षेत्र के एक सेवानिवृत्त प्राध्यापक और उनकी पत्नी के साथ हुआ है। उन्हें डिजिटल अरेस्ट करके 1 करोड़ 34 लाख रुपए की ठगी का सनसनीखेज मामला पुलिस ने उजागर किया है। इस मामले में पुलिस ने एक नाबालिग सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। डिजिटल ठगी के ये आरोपी मप्र ही नहीं राजस्थान, गुजरात, कश्मीर और आसाम से जुड़े हुए हैं। पुलिस इस मामले के मास्टरमाइंड बिहार के सिनान जिले के अंबारी गांव निवासी राजेश कुमार पिता रामप्रसाद सेन (55) को भीगिरफ्तार कर लिया है। उसे रतलाम ले आई है। सभी को कोर्ट में पेश किया जहां से कुछ को जेल भेजा और कुछ को पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

रतलाम. सेवानिवृत्त प्राध्यापक और उनकी पत्नी को 28 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे 1 करोड़ 34 लाख रुपए की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। यह मामला उस समय पुलिस के संज्ञान में आया जब पीडि़त दंपति स्वयं पुलिस को शिकायत करने पहुंचे। पुलिस को उन्होंने 15 दिसंबर को शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय सायबर फ्रॉड नेटवर्क का बड़ा खुलासा किया है। एसपी अमित कुमार के अनुसार अब तक 10 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं जो मप्र सहित गुजरात, बिहार, आसाम, कश्मीर के रहने वाले हैं। ये लोग संगठित गिरोह चलाकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। आरोपियों के तार कंबोडिया तक जुड़े हुए पाए गए हैं। पुलिस इस राशि में से 11 लाख रुपए होल्ड करवा चुकी है।

ऐसे दिया ठगी को अंजाम

एसपी कुमार के अनुसार बिहार के कुछ युवकों ने संगठित होकर आसाम के लोगों से जुड़े। इन लोगों ने दंपति के मोबाइल फोन पर मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते उनकी सिम का उपयोग बड़े फ्रॉड में होने का बताया। उन्हें कहा गया कि मुंबई स्थित कैनरा बैंक में लगभग 247 करोड़ की मनी लांड्रिंग हुई है। इसमें उनका आधारा कार्ड और अन्य दस्तावेज लगे हैं। उन्हें तत्काल गिरफ्तारी का भय दिखाते हुए वाट्सएप कॉल के माध्यम से मानसिक दबाव में लिया। उनसे आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लेकर उनके मोबाइल में सिगनल एप इंस्टाल करवाकर वीडियो कॉल में बताया कियहां उन्होंने न्यायालय जैसा सेटअप, जज, वकील और गवाहों नाटकीय दृश्य दिखाकर दंपति 15 नवंबर से 12 दिसंबर तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान उनके खातों से 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए भय दिखाकर अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। उन्हें भय दिखाने के दौरान पूरी जानकारी लेकर बताया कि पुत्र जो कनाड़ा में रहता है उसे इंडिया नहीं आने देंगे। एकमात्र बेटे को वापस नहीं आने के भय से दंपति उनके बताए खातों में राशि ट्रांसफर करते गए।

ये हैं आरोपी और राशि

जबलपुर से पुलिस ने अशोक पिता राधेश्याम जायसवाल (61), सनी पिता सोनू जायसवाल (34), सारांश उर्फ शानू पिता योगेंद्र तिवारी (18) और एक विधि विरुद्ध बालक हैं। इन्होंने 14 लाख रुपए खातों में डलवाए थे। नीमच के नयागांव से पवन पिता कैलाश कुमावत (23) ने 14 लाख रुपए प्राप्त किए थे। गोरखपुर उत्तरप्रदश से अमरेंद्र कुमार पिता बड़ेलाल प्रसाद मौर्य (34) ने अपने खाते में 50 लाख डलवाए थे। अमरेंद्र आईटच नामक एनजीओ चलाता है। जामनगर गुजरात से आरिफ घाटा, हमिद खान पठान, शाहिद कुरैशी और सादिक हसन मामा को गिरफ्तार किया। इन्हें ठगी के 20 लाख पहुंचे। इससे इन्होंने कंबोडिया राशि भेजकर क्रिप्टो करेंसी खरीदी और 5 लाख रुपए कमाए।

असम और बिहार टीमें रवाना

एसपी कुमार ने बताया इतनी बड़ी डिजिटल ठगी की वारदात सामने आने के बाद सायबर सेल प्रभारी अमित कोरी, टीआई शंकरसिंह चौहान, उपनिरीक्षक अनुराग यादव, प्रवीण वास्कले, जीवन बारिया, सायबर सेल के हिम्मतसिंह, मनमोहन शर्मा, लक्ष्मीनारायण सूर्यवंशी, राहुल पाटीदार, तुषार सिसौदिया, विपुल भावसार, मयंक व्यास, पवन जाट, सुनील और संजय कुशवाह की टीम गठित की। टीम ने कड़ी मेहनत करके इन्हें अलग-अलग राज्यों से दबौच लिया। बिहार के राजेश कुमार को पुलिस मंगलवार की रात रतलाम ले आई। गुजरात और आसाम के फरार आरोपियों की तलाश में टीमें रवाना की गई है।

तीन लिंक पर पुलिस सक्रिय

एसपी कुमार ने बताया डिजिटल अरेस्ट के इस बड़े मामले में पुलिस मास्टर माइंड आसाम का फरार आरोपी और बिहार के सिवान का राजेश कुमार है। यह किराए से खाते लेते और उसमें राशि भेजकर वापस लेते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन देते थे। पुलिस इसी सिलसिले में कश्मी के युवक और युवती की लिंक, जामनगर गुजरात की लिंक और जबलपुर की लिंक की गहनता से खोजबीन कर रही है। एसपी के अनुसार भोपाल से भी इन आरोपियों लिंक जुड़े हुए हैं।

यह भी जांच में लिया

  • आरोपियों के बीच सोशल मीडिया के जरिये संपर्क हुआ था। इसमें पाकिस्तान के प्लस 92 की सिरीज का नंबर है।
  • आरोपियों ने कई अन्य जगह भी ठगी की है। इनके उपयोग में आने वाले म्यूल बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।
    बेटे को पता था राशि निकल रही
    एसपी ने बताया कि दंपति के खातों से राशि निकल रही तो बेटे को कनाड़ा में पता चल रहा था क्योंकि उसके पास मैसेज जा रहे थे। वह इनसे पूछता तो ये लोग नहीं बताते। यही नहीं इन्होंने परिचितों से लोन भी लिया। 28 दिनों में किसी को यह बात नहीं बताई कि उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया हुआ है। खाते से सारी राशि निकलने के बाद मकान गिरवी रखने की नौबत आ चुकी थी। इसी बीच बेटा जब कनाड़ा से घर लौटा तो पता चला कि वह सुरक्षित है। फिर इन लगों ने पुलिस को शिकायत की और अब बड़ा नेटवर्क का खुलासा हुआ।

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