Diabetes in Children: राजस्थान में बच्चों के बीच एक चिंताजनक ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है, कम उम्र में ही डायबिटीज (शुगर) की बीमारी बढ़ रही है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि जहां बच्चों के हाथ में किताबें होनी चाहिए, वहीं अब कई बच्चों को इंसुलिन के इंजेक्शन भी लेने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पहले यह बीमारी आमतौर पर बड़ों में देखी जाती थी, लेकिन अब 8-12 साल के बच्चों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति लाइफस्टाइल में आए बदलाव और खानपान की गलत आदतों की वजह से हो रही है।
बच्चों में क्यों बढ़ रही है शुगर?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आजकल बच्चे बाहर खेलना कम और मोबाइल-टीवी पर ज्यादा समय बिताते हैं। फास्ट फूड, जंक फूड, मीठे पेय और पैकेज्ड खाने की आदत भी बड़ी वजह बन रही है। इसके कारण शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ने लगता है।
चौंकाने वाले आंकड़े
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर 100 बच्चों में से 2-3 बच्चे इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं। कई मामलों में यह बीमारी इतनी जल्दी पकड़ में नहीं आती, जिससे बाद में दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
क्या हैं लक्षण?
बच्चों में डायबिटीज के कुछ आम लक्षण इस तरह हो सकते हैं:
- बार-बार प्यास लगना
- जल्दी थक जाना
- बार-बार पेशाब आना
- अचानक वजन कम होना
- अगर ये लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
इलाज और सावधानी
डॉक्टरों का कहना है कि कुछ बच्चों को इंसुलिन लेना जरूरी हो जाता है, जिससे उनका शुगर लेवल कंट्रोल में रहे। लेकिन इसके साथ ही लाइफस्टाइल में बदलाव बहुत जरूरी है।
कैसे करें बचाव?
- बच्चों को रोजाना खेल-कूद के लिए प्रेरित करें
- जंक फूड और मीठी चीजें कम कराएं
- संतुलित और हेल्दी डाइट दें
- स्क्रीन टाइम सीमित करें
- समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराएं


