कुशीनगर के दुदही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आशा एवं आशा संगिनियों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन 24वें दिन बुधवार को स्थगित कर दिया गया। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) के लिखित आश्वासन के बाद यह फैसला लिया गया। यह धरना वर्षों से लंबित मानदेय, प्रोत्साहन राशि और अन्य मांगों को लेकर चल रहा था। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए एसीएमओ एस.एन. त्रिपाठी दुदही सीएचसी पहुंचे। एसीएमओ एस.एन. त्रिपाठी ने आशाओं के प्रतिनिधियों के साथ बंद कमरे में वार्ता की। इस दौरान आशा कर्मियों ने अपनी समस्याएं विस्तार से बताईं। आशा संघ की ब्लॉक अध्यक्ष रीता पटेल ने कहा कि आशा और आशा संगिनी स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें नियमित मानदेय और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। वार्ता के दौरान आशा एवं आशा संगिनियों ने कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें आशा एवं आशा संगिनी को मानद स्वयंसेवक के बजाय सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, प्रोत्साहन राशि के स्थान पर न्यूनतम वेतन लागू करना, ईपीएफ व ईएसआई की सुविधा देना, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित करना, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख रुपये का जीवन बीमा प्रदान करना शामिल था। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम वेतन लागू होने तक आशा को ₹21,000 और आशा संगिनी को ₹28,000 मासिक मानदेय दिए जाने की मांग भी की गई। गोल्डन आयुष्मान कार्ड एवं आभा आईडी निर्माण कार्य का लंबित भुगतान एकमुश्त करने तथा वर्ष 2019 से अब तक की सभी लंबित प्रोत्साहन एवं राज्य अनुदान राशि के तत्काल भुगतान की भी मांग उठाई गई।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी एस.एन. त्रिपाठी ने आशाओं की सभी मांगों को गंभीरता से सुना। उन्होंने लिखित रूप में आश्वासन दिया कि समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी और शीघ्र कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा। आशा कर्मियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं और वर्षों से लंबित भुगतान नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


