कैमूर के भगवानपुर अंचल में वन विभाग की 62.5 डिसमिल भूमि की अवैध बिक्री का मामला सामने आया है। यह भूमि कैमूर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र की अधिसूचित जमीन है। इस मामले में वर्तमान डीएफओ संजीव रंजन ने जिला अधिकारी से जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार, 5 जनवरी 2022 को भभुआ निबंधन कार्यालय में अखलासपुर निवासी शिवनाथ पाल, श्रीराम दहिन पाल और श्रीराम भजन पाल ने उमापुर गांव के सतीश कुमार एवं सुनील कुमार सिंह को यह जमीन बेच दी थी। हैरानी की बात यह है कि रजिस्ट्री के बाद अंचल कार्यालय द्वारा इसका दाखिल-खारिज भी कर दिया गया, जबकि यह भूमि वन संरक्षित क्षेत्र में आती है। DFO ने की थी कार्रवाई की मांग यह मामला लगभग चार साल पुराना है। चार महीने पहले जब यह तत्कालीन डीएफओ चंचल प्रकासम के संज्ञान में आया, तो उन्होंने अवर निबंधन अधिकारी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान डीएफओ संजीव रंजन ने अब इस संबंध में कैमूर जिला अधिकारी को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले की गहन जांच कर दोषी पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की है। डीएफओ संजीव रंजन ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और बिहार सरकार की अधिसूचना के अनुसार, यह भूमि हमेशा वन भूमि ही रहेगी, भले ही इसकी खरीद-बिक्री या दाखिल-खारिज क्यों न कर दिया गया हो। जनता से फर्जीवाड़े से बचने की अपील उन्होंने आम जनता से ऐसे फर्जीवाड़े से बचने की अपील की है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। डीएफओ ने यह भी आश्वस्त किया कि जांच पूरी होने के बाद इस मामले में संलिप्त सभी पदाधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह घटना वन संरक्षण कानूनों और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कैमूर के भगवानपुर अंचल में वन विभाग की 62.5 डिसमिल भूमि की अवैध बिक्री का मामला सामने आया है। यह भूमि कैमूर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र की अधिसूचित जमीन है। इस मामले में वर्तमान डीएफओ संजीव रंजन ने जिला अधिकारी से जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार, 5 जनवरी 2022 को भभुआ निबंधन कार्यालय में अखलासपुर निवासी शिवनाथ पाल, श्रीराम दहिन पाल और श्रीराम भजन पाल ने उमापुर गांव के सतीश कुमार एवं सुनील कुमार सिंह को यह जमीन बेच दी थी। हैरानी की बात यह है कि रजिस्ट्री के बाद अंचल कार्यालय द्वारा इसका दाखिल-खारिज भी कर दिया गया, जबकि यह भूमि वन संरक्षित क्षेत्र में आती है। DFO ने की थी कार्रवाई की मांग यह मामला लगभग चार साल पुराना है। चार महीने पहले जब यह तत्कालीन डीएफओ चंचल प्रकासम के संज्ञान में आया, तो उन्होंने अवर निबंधन अधिकारी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान डीएफओ संजीव रंजन ने अब इस संबंध में कैमूर जिला अधिकारी को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले की गहन जांच कर दोषी पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की है। डीएफओ संजीव रंजन ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और बिहार सरकार की अधिसूचना के अनुसार, यह भूमि हमेशा वन भूमि ही रहेगी, भले ही इसकी खरीद-बिक्री या दाखिल-खारिज क्यों न कर दिया गया हो। जनता से फर्जीवाड़े से बचने की अपील उन्होंने आम जनता से ऐसे फर्जीवाड़े से बचने की अपील की है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। डीएफओ ने यह भी आश्वस्त किया कि जांच पूरी होने के बाद इस मामले में संलिप्त सभी पदाधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह घटना वन संरक्षण कानूनों और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


