उदयपुर में देवास प्रोजेक्ट 2029 में पूरा होगा:थर्ड और फोर्थ स्टेज-2 क्लीयरेंस के लिए दिल्ली भेजा प्रस्ताव, जल्द स्वीकृति की उम्मीद

उदयपुर में देवास प्रोजेक्ट 2029 में पूरा होगा:थर्ड और फोर्थ स्टेज-2 क्लीयरेंस के लिए दिल्ली भेजा प्रस्ताव, जल्द स्वीकृति की उम्मीद

उदयपुर की झीलों की प्यास बुझाने के लिए देवास तृतीय और चतुर्थ चरण का काम अब तेज होने वाला है। दिल्ली से पहले चरण की पर्यावरण क्लीयरेंस मिलने के बाद, अब स्टेज-2 की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही केंद्र से हरी झंडी मिल जाएगी, इसके बाद 2029 तक यह प्रोजेक्ट पूरा जाएगा। इस परियोजना पर 1690.55 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसका लक्ष्य हर साल 1000 MCFt पानी उदयपुर की झीलों में लाना है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शहर की झीलों में निर्बाध पेयजल रहेगा। अब तक पर्यावरण क्लीयरेंस के इंतजार में काम की गति धीमी (आंशिक) थी, लेकिन स्टेज-1 की मंजूरी ने मुख्य बाधा हटा दी है। विभाग ने बांध और सुरंग निर्माण के लिए भोपाल और हैदराबाद की कंपनियों को कार्यादेश भी जारी कर दिए हैं। उदयपुर के जल प्रबंधन का सफर 1973 में देवास-प्रथम से शुरू हुआ था, जो देवास-द्वितीय (2015) से होता हुआ अब अपने सबसे बड़े पड़ाव (तृतीय और चतुर्थ चरण) पर है। जहां शुरुआती परियोजनाओं की क्षमता कम थी, वहीं नया प्रोजेक्ट आने वाले कई दशकों तक शहर की पेयजल आपूर्ति और पर्यटन की रीढ़ यानी झीलों को लबालब रखेगा। बहुप्रतिक्षित देवास थर्ड एवं फोर्थ को लेकर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली से 02 दिसंबर 2025 को पहले चरण की क्लीयरेंस मिलने के बाद अब स्टेज-2 की क्लीयरेंस को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है। जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता मनोज जैन ने बताया कि स्टेज-1 क्लीयरेंस के दौरान हुई बैठक के अनुसार स्टेज-2 का प्रस्ताव तैयार किया गया था। अब जल्द इसकी स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। यह स्वीकृति मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट को गति दी जाएगी।फिलहाल इस प्रोजेक्ट का आंशिक स्तर पर कार्य चल रहा है। यह प्रोजेक्ट 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। क्लीयरेंस नहीं होने से हुए आंशिक कार्य
अधीक्षण अभियंता जैन ने बताया कि प्रोजेक्ट को लेकर पहले तैयारी की जा चुकी थी, लेकिन पर्यावरण क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण प्रोजेक्ट में आंशिक कार्य ही करवाए जा रहे थे। स्टेज-1 की क्लीयरेंस मिलना इस प्रोजेक्ट के लिए बड़ी उपलब्धि है। यानी, अब पर्यावरण क्लीयरेंस को लेकर कोई समस्या नहीं है। स्टेज-1 के साथ स्टेज-2 की क्लीयरेंस भी लेना जरूरी होती है। ऐसे में स्टेज-2 की पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए प्रस्ताव बनाकर नई दिल्ली भेज दिया है। जहां से शीघ्र स्वीकृति मिलने की संभावना है। 2029 में पूरा होगा 1690 करोड़ का यह प्रोजेक्ट
बताया गया कि देवास थर्ड एवं फोर्थ की अनुमानित लागत 1690.55 करोड़ है एवं यह प्रोजेक्ट 2029 तक पूरा किया जाना है। इससे 1000 एमसीएफटी वार्षिक जल अपवर्तन उदयपुर शहर की झीलों में किया जा सकेगा। परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से जारी हो चुकी है। बांध निर्माण के कार्य का कार्यादेश 396.93 करोड़ रूपए का भोपाल तथा टनल निर्माण कार्य का 432.74 करोड़ रूपए का कार्यादेश हैदराबाद की फर्म को जारी गया है। यह है देवास थर्ड और फोर्थ का स्वरूप
देवास-थर्ड – इस परियोजना के अंतर्गत गोगुन्दा तहसील के नाथियाथल गांव के समीप 703 एमसीएफटी क्षमता का बांध निर्मित किया जाएगा। यहां से 10.50 किलोमीटर लंबी सुरंग द्वारा जल को देवास-द्वितीय (आकोदड़ा बांध) तक लाया जाएगा और फिर मौजूदा प्रणाली से पिछोला झील तक पहुंचाया जाएगा। देवास-फोर्थ – इस परियोजना के तहत अम्बा गांव के पास 390 एमसीएफटी क्षमता का बांध बनेगा, जिसे 4.15 किलोमीटर की सुरंग से देवास-तृतीय से जोड़ा जाएगा। परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद शहर को आने वाले कई दशकों तक निर्बाध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। उदयपुर की तत्कालीन पेयजल आपूर्ति मांग सुनिश्चित करने 1973-74 में देवास- प्रथम (गोराणा बांध) का निर्माण किया गया, जिसकी सकल क्षमता 120 एमसीएफटी है। 2011 में उदयपुर शहर की पेयजल मांग अनुसार देवास द्वितीय परियोजना की परिकल्पना की गई। देवास द्वितीय परियोजना के अंतर्गत ही मादड़ी बांध कुल क्षमता 85 एमसीएफटी का निर्माण किया गया। इससे निकलने वाली 1.21 किलोमीटर की सुरंग को आकोदडा की मुख्य सुरंग से जोड़ा गया। देवास द्वितीय के अंतर्गत 302 एमसीएफटी क्षमता का आकोदड़ा बांध का निर्माण किया गया। इससे 11.05 किलोमीटर लम्बी सुरंग का निर्माण कर बांध से उदयपुर शहर की पिछोला झील में 550 एमसीएफटी वार्षिक जल अपवर्तन की योजना बनाई गई। उक्त परियोजना 2015 में पूर्ण कर ली गई।

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