शाम 7 बजे शुद्धिकरण के बाद खुले मंदिरों के पट, दर्शनों के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब
भीलवाड़ा में मंगलवार को चंद्रग्रहण और सूतक काल का गहरा असर देखने को मिला। ग्रहण के कारण सुबह 9 बजे से ही सभी प्रमुख मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। दिनभर भगवान और भक्त के बीच दूरी बनी रही। आम दिनों में जहां मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रहती है, वहीं मंगलवार को दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। शाम को 7 बजे ग्रहण मोक्ष और मंदिरों के शुद्धिकरण के बाद ही देव-दर्शन सुलभ हो सके। पूर्णिमा और मंगलवार का संयोग होने के कारण शाम को मंदिरों में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
घंटियों पर बंधे कपड़े, दिनभर चले भजन-कीर्तन
सूतक काल को देखते हुए शहर के मंदिरों में खास एहतियात बरती गई। मंदिरों के फाटकों पर ताले जड़ दिए गए और भगवान व घंटियों को किसी का स्पर्श न हो, इसके लिए घंटियों को भी कपड़े से बांध दिया गया था।
संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरी ने बताया कि सूतक और चंद्रग्रहण के चलते दिनभर मंदिर के पट बंद रखे गए। पेच के बालाजी के पंडित आशुतोष शर्मा ने बताया कि चंद्रग्रहण शाम 6:45 से 6:47 तक ग्रस्तोदित दृश्य रहा। सुबह 9:45 बजे सूतक शुरू होने के कारण सुबह 5 बजे ही मंगला आरती, शृंगार और नैवेद्य अर्पण कर मूर्तियों को गुलाल से सराबोर कर दिया गया था। इसके बाद पट बंद कर दिए गए।


