शिव भक्ति से आता है वैराग्य व विवेक : आचार्य कमलेश्वर

रानीपतरा | भटगामा हाट में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजन के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। दूसरे दिन की कथा में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा कथा पंडाल हर हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य कमलेश्वर द्विवेदी उर्फ प्रेम जी ने अपने ओजस्वी प्रवचन में शिव तत्व की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव केवल देवों के देव नहीं, बल्कि वे जीवन को सरल, संयमित और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। शिव भक्ति से मनुष्य के भीतर वैराग्य, विवेक और करुणा का विकास होता है। उन्होंने ने शिव के भोले स्वरूप, औघड़ लीला और गृहस्थ व सन्यासी जीवन के अद्भुत संतुलन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिव हमें सिखाते हैं कि अभाव में भी आनंद और विषम परिस्थितियों में भी स्थिरता कैसे रखी जाए। रानीपतरा | भटगामा हाट में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजन के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। दूसरे दिन की कथा में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा कथा पंडाल हर हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य कमलेश्वर द्विवेदी उर्फ प्रेम जी ने अपने ओजस्वी प्रवचन में शिव तत्व की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव केवल देवों के देव नहीं, बल्कि वे जीवन को सरल, संयमित और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। शिव भक्ति से मनुष्य के भीतर वैराग्य, विवेक और करुणा का विकास होता है। उन्होंने ने शिव के भोले स्वरूप, औघड़ लीला और गृहस्थ व सन्यासी जीवन के अद्भुत संतुलन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिव हमें सिखाते हैं कि अभाव में भी आनंद और विषम परिस्थितियों में भी स्थिरता कैसे रखी जाए।  

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