भास्कर न्यूज| सीतामढ़ी जिले में 4.5 लाख से अधिक किसान हैं, जिसमें महज 284532 किसान ही पीएम योजना में नामित है, इनमें भी महज 246105 किसान ही सक्रिय हैं। शेष किसान विभिन्न भी फार्मर रजिस्ट्री करवा सकते हैं, लेकिन अब तक महज 49.57 प्रतिशत किसान ही फार्मर रजिस्ट्री करवा सके हैं। हालांकि कृषि विभाग द्वारा इसे लेकर पूरी शक्ति लगा दी गई है। अब शिविर की तिथि भी 14 फरवरी तक दी गई है। लेकिन बार बार अंचल की किसानों के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया इसमें बाधित बन रही है। जिससे किसानों में अब आक्रोश भड़कने लगा है। पहले सीओ हड़ताल और अब कर्मचारियों का हड़ताल किसानों के प्रति इन संगठनों की प्रति रवैयों पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। अंचल से किसानों को सीधा जुड़ाव रहता है, वे यहीं पर अपना राजस्व जमा करते हैं। वहीं जमीन संबंधी कागजात से लेकर स्वामित्व के लिए निर्भर है, लेकिन अंचल के द्वारा उनके लाभ के समय इस प्रकार काम बाधित करने से वे परेशान है। हालांकि इस समय में किसान संगठन भी मौन है। कर्मचारी के हड़ताल के हानि से किसान आहत हैं। जिले के 273 पंचायतों में पीएम किसान निधि योजना के लिए 284532 किसान नामित है, इनमें 246105 किसान सक्रिय हैं, जिन्हें इसका लाभ मिल रहा है। लेकिन इनमें से अधिकतर किसानों के पास पुश्तानी जमा बंदी है। मौखिक बंटवारे पर ही वे अपना अधिकारी बनाए हुए हैं। इन पीएम किसान के लाभान्वितों में केवल 95738 किसानों का ही फार्मर रजिस्ट्री हो सका है, जो महज 34 प्रतिशत ही है। वहीं अन्य शेष बचे करीब अढ़ाई लाख किसानों में से महज 45299 किसानों का ही रजिस्ट्री हुआ है। जिसे मिलाकर कुल 141037 किसानों का रजिस्ट्री दिखाकर उपलब्धी 49.57 प्रतिशत प्रदर्शित की जा रही है। इधर वर्तमान में किसान जिनके पास वंशावली के अनुसार ही अभी तक जमीन है, वे अंचल में अपने नाम जमीन का खाता खोलवाने को लेकर परेशान है, लेकिन कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं। ऐसे में अधिक से अधिक किसानों का फार्मर रजिस्ट्री मुश्किल में पहुंच चुकी है। बार-बार अंचल के द्वारा किसान फार्मर रजिस्ट्री के दौरान अंचल के द्वारा हड़ताल से किसान परेशान है। किसान राम नरेश कुमार ने बताया उन्हें अपना जमाबंदी अलग करना है। लेकिन कभी सीओ हड़ताल पर रह रहे हैं तो अब कर्मचारी ने हाथ खड़े कर दिए है। जिससे परेशान है। इधर किसान विकास कुमार ने बताया कि वे कोशिश के बाद अपना परिमार्जन करवाने में सफल हुए हैं। लेकिन पहले बीडीओ और अब कर्मचारी का हड़ताल फार्मर रजिस्ट्री को प्रभावित कर रहा है। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन अभी भी सभी कागजात कर्मचारी के पास है, बिना इसके जमाबंदी व परिमार्जन के साथ ही रसीद कटवाना परेशानी है। इधर संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा उत्तर बिहार के संयोजक प्रो. आनंद किशोर ने अपनी बुलंद आवाज उठायी है। कहा कि सीओ और अब कर्मचारी का हड़ताल किसानों के प्रति अंचल का रवैया स्पष्ट कर रहा है। इनके रवैये के कारण ही दाखिल खारिज से लेकर परिमार्जन तक किसानों का शोषण होता रहा है। ^पंचायतों में किसान रजिस्ट्री को लेकर कार्य जारी है। विभाग किसानों को अधिक से अधिक योजनाओं से लाभान्वित करने को लेकर ठोस कदम उठा रही है। वर्तमान की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। – शांतनु कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी, सीतामढ़ी भास्कर न्यूज| सीतामढ़ी जिले में 4.5 लाख से अधिक किसान हैं, जिसमें महज 284532 किसान ही पीएम योजना में नामित है, इनमें भी महज 246105 किसान ही सक्रिय हैं। शेष किसान विभिन्न भी फार्मर रजिस्ट्री करवा सकते हैं, लेकिन अब तक महज 49.57 प्रतिशत किसान ही फार्मर रजिस्ट्री करवा सके हैं। हालांकि कृषि विभाग द्वारा इसे लेकर पूरी शक्ति लगा दी गई है। अब शिविर की तिथि भी 14 फरवरी तक दी गई है। लेकिन बार बार अंचल की किसानों के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया इसमें बाधित बन रही है। जिससे किसानों में अब आक्रोश भड़कने लगा है। पहले सीओ हड़ताल और अब कर्मचारियों का हड़ताल किसानों के प्रति इन संगठनों की प्रति रवैयों पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। अंचल से किसानों को सीधा जुड़ाव रहता है, वे यहीं पर अपना राजस्व जमा करते हैं। वहीं जमीन संबंधी कागजात से लेकर स्वामित्व के लिए निर्भर है, लेकिन अंचल के द्वारा उनके लाभ के समय इस प्रकार काम बाधित करने से वे परेशान है। हालांकि इस समय में किसान संगठन भी मौन है। कर्मचारी के हड़ताल के हानि से किसान आहत हैं। जिले के 273 पंचायतों में पीएम किसान निधि योजना के लिए 284532 किसान नामित है, इनमें 246105 किसान सक्रिय हैं, जिन्हें इसका लाभ मिल रहा है। लेकिन इनमें से अधिकतर किसानों के पास पुश्तानी जमा बंदी है। मौखिक बंटवारे पर ही वे अपना अधिकारी बनाए हुए हैं। इन पीएम किसान के लाभान्वितों में केवल 95738 किसानों का ही फार्मर रजिस्ट्री हो सका है, जो महज 34 प्रतिशत ही है। वहीं अन्य शेष बचे करीब अढ़ाई लाख किसानों में से महज 45299 किसानों का ही रजिस्ट्री हुआ है। जिसे मिलाकर कुल 141037 किसानों का रजिस्ट्री दिखाकर उपलब्धी 49.57 प्रतिशत प्रदर्शित की जा रही है। इधर वर्तमान में किसान जिनके पास वंशावली के अनुसार ही अभी तक जमीन है, वे अंचल में अपने नाम जमीन का खाता खोलवाने को लेकर परेशान है, लेकिन कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं। ऐसे में अधिक से अधिक किसानों का फार्मर रजिस्ट्री मुश्किल में पहुंच चुकी है। बार-बार अंचल के द्वारा किसान फार्मर रजिस्ट्री के दौरान अंचल के द्वारा हड़ताल से किसान परेशान है। किसान राम नरेश कुमार ने बताया उन्हें अपना जमाबंदी अलग करना है। लेकिन कभी सीओ हड़ताल पर रह रहे हैं तो अब कर्मचारी ने हाथ खड़े कर दिए है। जिससे परेशान है। इधर किसान विकास कुमार ने बताया कि वे कोशिश के बाद अपना परिमार्जन करवाने में सफल हुए हैं। लेकिन पहले बीडीओ और अब कर्मचारी का हड़ताल फार्मर रजिस्ट्री को प्रभावित कर रहा है। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन अभी भी सभी कागजात कर्मचारी के पास है, बिना इसके जमाबंदी व परिमार्जन के साथ ही रसीद कटवाना परेशानी है। इधर संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा उत्तर बिहार के संयोजक प्रो. आनंद किशोर ने अपनी बुलंद आवाज उठायी है। कहा कि सीओ और अब कर्मचारी का हड़ताल किसानों के प्रति अंचल का रवैया स्पष्ट कर रहा है। इनके रवैये के कारण ही दाखिल खारिज से लेकर परिमार्जन तक किसानों का शोषण होता रहा है। ^पंचायतों में किसान रजिस्ट्री को लेकर कार्य जारी है। विभाग किसानों को अधिक से अधिक योजनाओं से लाभान्वित करने को लेकर ठोस कदम उठा रही है। वर्तमान की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। – शांतनु कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी, सीतामढ़ी


