बुलंदशहर रोड स्थित श्री मां मनसा देवी मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज ने ध्रुव चरित्र, सती प्रसंग और भगवान नृसिंह के प्राकट्य की कथा सुनाई। यह कथा मंदिर के 16वें वार्षिक उत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे कथा पंडाल छोटा पड़ गया। तीसरे दिन की कथा का मुख्य आकर्षण ध्रुव चरित्र रहा। कथाव्यास ने मात्र पांच वर्ष की आयु में बालक ध्रुव के वन गमन और उनकी कठोर तपस्या का सजीव वर्णन किया। इसे सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। आचार्य भारद्वाज ने कहा कि ध्रुव जैसी दृढ़ इच्छाशक्ति और गुरु के प्रति निष्ठा से परमात्मा को प्राप्त करना संभव है। ध्रुव की तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान प्रकट हुए, तो भक्तों ने ‘जय श्री कृष्ण’ के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया। कथा की शुरुआत में माता सती के प्रसंग को सुनाया गया। कथावाचक ने बताया कि बिना बुलाए कहीं जाने पर मान-सम्मान की हानि होती है, भले ही वह पिता का घर क्यों न हो। उन्होंने दक्ष प्रजापति के अहंकार और सती द्वारा योगाग्नि में अपने शरीर के त्याग की घटना का वर्णन किया। कथा के अगले चरण में भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान नृसिंह के प्राकट्य की कथा सुनाई गई। हिरण्यकशिपु के वध और प्रह्लाद की अटूट भक्ति के प्रसंग के दौरान भगवान नृसिंह की भव्य झांकी निकाली गई। झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। वक्ता ने जड़ भरत की कथा के माध्यम से मोह-माया के बंधन को समझाया। उन्होंने कहा कि यह बंधन मनुष्य को बार-बार जन्म-मरण के चक्र में फंसाता है। इसलिए मनुष्य को सदैव जागरूक रहकर प्रभु का स्मरण करना चाहिए। कथा के अंत में मुख्य यजमान शिवकुमार मित्तल, रितु मित्तल, मधुसूदन गोयल और अंशिका गोयल ने भागवत आरती की। मीडिया प्रभारी महेश तोमर ने बताया कि चतुर्थ दिवस की कथा में बालि वामन चरित्र, श्री रामावतार और कृष्ण जन्म की कथा का वर्णन किया जाएगा।


