बिहार सरकार ने धान अधिप्राप्ति वर्ष 2025-26 में कथित अनियमितताओं के मामले में लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 2 अप्रैल को इस संबंध में आदेश जारी किया है। आरोप है कि अतिरिक्त 8,000 मीट्रिक टन धान खरीद लक्ष्य के आवंटन में गड़बड़ी हुई है। जिले के लिए पहले 47,235 एमटी का लक्ष्य निर्धारित था, जिसके अतिरिक्त यह 8,000 एमटी का लक्ष्य दिया गया था। अतिरिक्त लक्ष्य के वितरण में मानकों का पालन नहीं जांच में पाया गया कि इस अतिरिक्त लक्ष्य के वितरण में निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। कुछ समितियों को अत्यधिक लक्ष्य आवंटित किया गया, जबकि कई को बहुत कम या शून्य आवंटन मिला। समीक्षा में यह भी सामने आया कि भंडारण क्षमता और पूर्व प्रदर्शन जैसे महत्वपूर्ण मानकों की अनदेखी की गई। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव रहा। जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण को भी अभिलेखीय तथ्यों से मेल नहीं खाने वाला पाया गया। अनुशासन एवं अपील नियमावली के तहत कार्रवाई सरकार ने इन अनियमितताओं को कर्तव्य में लापरवाही और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में माना है। अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के तहत यह कार्रवाई शुरू की गई है। इस मामले से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। बिहार सरकार ने धान अधिप्राप्ति वर्ष 2025-26 में कथित अनियमितताओं के मामले में लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 2 अप्रैल को इस संबंध में आदेश जारी किया है। आरोप है कि अतिरिक्त 8,000 मीट्रिक टन धान खरीद लक्ष्य के आवंटन में गड़बड़ी हुई है। जिले के लिए पहले 47,235 एमटी का लक्ष्य निर्धारित था, जिसके अतिरिक्त यह 8,000 एमटी का लक्ष्य दिया गया था। अतिरिक्त लक्ष्य के वितरण में मानकों का पालन नहीं जांच में पाया गया कि इस अतिरिक्त लक्ष्य के वितरण में निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। कुछ समितियों को अत्यधिक लक्ष्य आवंटित किया गया, जबकि कई को बहुत कम या शून्य आवंटन मिला। समीक्षा में यह भी सामने आया कि भंडारण क्षमता और पूर्व प्रदर्शन जैसे महत्वपूर्ण मानकों की अनदेखी की गई। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव रहा। जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण को भी अभिलेखीय तथ्यों से मेल नहीं खाने वाला पाया गया। अनुशासन एवं अपील नियमावली के तहत कार्रवाई सरकार ने इन अनियमितताओं को कर्तव्य में लापरवाही और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में माना है। अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के तहत यह कार्रवाई शुरू की गई है। इस मामले से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।


