मुंगेर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहे जिला शिक्षा पदाधिकारी कुणाल गौरव अब एक विवाद में घिर गए हैं। प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक संघ के मुख्य संरक्षक अमित विक्रम ने DEO पर महिला शिक्षिकाओं की ऑनलाइन सेल्फी उपस्थिति की तस्वीरों को जूम कर उनके पहनावे पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में शिक्षक संघ की ओर से बिहार राज्य महिला आयोग, पटना को 14 मार्च को लिखित शिकायत भेजी गई है। शिकायत में इस मामले की जांच कर डीईओ के खिलाफ पॉश एक्ट 2013 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। सेल्फी अटेंडेंस को लेकर उठाया गया मुद्दा शिकायत में कहा गया है कि जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से सेल्फी अटेंडेंस की व्यवस्था लागू है। शिक्षक विद्यालय पहुंचने और जाने के समय अपनी तस्वीर अपलोड कर उपस्थिति दर्ज करते हैं। संघ का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान महिला शिक्षिकाओं द्वारा अपलोड की गई तस्वीरों को जूम कर उनके पहनावे को लेकर अनावश्यक और आपत्तिजनक टिप्पणी की जा रही है, जिसे लेकर शिक्षकों में नाराजगी है। डीईओ कार्यालय से जारी हुआ था स्पष्टीकरण पत्र दरअसल इस मामले की पृष्ठभूमि में 11 मार्च को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से पत्रांक संख्या 304 जारी किया गया था। इस पत्र के माध्यम से हवेली खड़गपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय मिश्री टोला दुलारपुर में कार्यरत एक वरीय शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा गया था। पत्र में कहा गया था कि ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति की समीक्षा के दौरान फरवरी माह में 6, 7, 10 तथा 12 से 28 फरवरी तक कई दिनों में छायाचित्र प्रदर्शित नहीं होने के बावजूद सेल्फी अटेंडेंस दर्ज पाया गया। इसके अलावा 7, 12 और 13 फरवरी को आउट टाइम दर्ज नहीं होने की भी बात कही गई थी। ड्रेस को लेकर भी किया गया उल्लेख स्पष्टीकरण पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि 9 फरवरी को दर्ज सेल्फी अटेंडेंस में इन-टाइम के दौरान अमर्यादित ड्रेस में छायाचित्र प्रदर्शित हुआ है। इसी सहित अन्य बिंदुओं पर संबंधित शिक्षिका से जवाब मांगा गया था। शिक्षिका ने विभाग को भेजा जवाब संबंधित शिक्षिका ने 13 मार्च को विभाग को लिखित जवाब भेजा है। अपने स्पष्टीकरण में उन्होंने कहा कि उस समय ठंड का मौसम था, इसलिए उन्होंने गर्म कपड़े पहने हुए थे और दुपट्टा सूट के साइड में लगा हुआ था। उन्होंने बताया कि उपस्थिति दर्ज करते समय दुपट्टा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा था, जिसके लिए उन्होंने खेद जताया और भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं होने देने की बात कही। साथ ही पत्र में उठाए गए अन्य सभी बिंदुओं का भी जवाब विभाग को भेज दिया गया है। सोशल मीडिया पर भी उठा मुद्दा इसी मामले को लेकर शिक्षक संघ के मुख्य संरक्षक अमित विक्रम ने सोशल मीडिया पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला शिक्षिका की तस्वीर को जूम कर उनके पहनावे पर टिप्पणी करना अनुचित है और इससे शिक्षिकाओं की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। डीईओ ने आरोपों को बताया निराधार वहीं इस मामले में जब जिला शिक्षा पदाधिकारी कुणाल गौरव से संपर्क किया गया तो उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार निरीक्षण और कार्रवाई की जा रही है। लेकिन कुछ लोग मनगढ़ंत आरोप लगाकर उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल इस मामले में महिला आयोग के स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। इस मामले को लेकर जब डॉ.ओमप्रकाश से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें इस मामले की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि उनके पास इस संबंध में न तो कोई लिखित शिकायत पहुंची है और न ही विभागीय स्तर पर कोई औपचारिक सूचना दी गई है। डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि यदि इस मामले में लिखित शिकायत प्राप्त होती है, तो नियमानुसार इसकी जांच कराई जाएगी और तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मुंगेर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहे जिला शिक्षा पदाधिकारी कुणाल गौरव अब एक विवाद में घिर गए हैं। प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक संघ के मुख्य संरक्षक अमित विक्रम ने DEO पर महिला शिक्षिकाओं की ऑनलाइन सेल्फी उपस्थिति की तस्वीरों को जूम कर उनके पहनावे पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में शिक्षक संघ की ओर से बिहार राज्य महिला आयोग, पटना को 14 मार्च को लिखित शिकायत भेजी गई है। शिकायत में इस मामले की जांच कर डीईओ के खिलाफ पॉश एक्ट 2013 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। सेल्फी अटेंडेंस को लेकर उठाया गया मुद्दा शिकायत में कहा गया है कि जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से सेल्फी अटेंडेंस की व्यवस्था लागू है। शिक्षक विद्यालय पहुंचने और जाने के समय अपनी तस्वीर अपलोड कर उपस्थिति दर्ज करते हैं। संघ का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान महिला शिक्षिकाओं द्वारा अपलोड की गई तस्वीरों को जूम कर उनके पहनावे को लेकर अनावश्यक और आपत्तिजनक टिप्पणी की जा रही है, जिसे लेकर शिक्षकों में नाराजगी है। डीईओ कार्यालय से जारी हुआ था स्पष्टीकरण पत्र दरअसल इस मामले की पृष्ठभूमि में 11 मार्च को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से पत्रांक संख्या 304 जारी किया गया था। इस पत्र के माध्यम से हवेली खड़गपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय मिश्री टोला दुलारपुर में कार्यरत एक वरीय शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा गया था। पत्र में कहा गया था कि ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति की समीक्षा के दौरान फरवरी माह में 6, 7, 10 तथा 12 से 28 फरवरी तक कई दिनों में छायाचित्र प्रदर्शित नहीं होने के बावजूद सेल्फी अटेंडेंस दर्ज पाया गया। इसके अलावा 7, 12 और 13 फरवरी को आउट टाइम दर्ज नहीं होने की भी बात कही गई थी। ड्रेस को लेकर भी किया गया उल्लेख स्पष्टीकरण पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि 9 फरवरी को दर्ज सेल्फी अटेंडेंस में इन-टाइम के दौरान अमर्यादित ड्रेस में छायाचित्र प्रदर्शित हुआ है। इसी सहित अन्य बिंदुओं पर संबंधित शिक्षिका से जवाब मांगा गया था। शिक्षिका ने विभाग को भेजा जवाब संबंधित शिक्षिका ने 13 मार्च को विभाग को लिखित जवाब भेजा है। अपने स्पष्टीकरण में उन्होंने कहा कि उस समय ठंड का मौसम था, इसलिए उन्होंने गर्म कपड़े पहने हुए थे और दुपट्टा सूट के साइड में लगा हुआ था। उन्होंने बताया कि उपस्थिति दर्ज करते समय दुपट्टा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा था, जिसके लिए उन्होंने खेद जताया और भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं होने देने की बात कही। साथ ही पत्र में उठाए गए अन्य सभी बिंदुओं का भी जवाब विभाग को भेज दिया गया है। सोशल मीडिया पर भी उठा मुद्दा इसी मामले को लेकर शिक्षक संघ के मुख्य संरक्षक अमित विक्रम ने सोशल मीडिया पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला शिक्षिका की तस्वीर को जूम कर उनके पहनावे पर टिप्पणी करना अनुचित है और इससे शिक्षिकाओं की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। डीईओ ने आरोपों को बताया निराधार वहीं इस मामले में जब जिला शिक्षा पदाधिकारी कुणाल गौरव से संपर्क किया गया तो उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार निरीक्षण और कार्रवाई की जा रही है। लेकिन कुछ लोग मनगढ़ंत आरोप लगाकर उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल इस मामले में महिला आयोग के स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। इस मामले को लेकर जब डॉ.ओमप्रकाश से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें इस मामले की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि उनके पास इस संबंध में न तो कोई लिखित शिकायत पहुंची है और न ही विभागीय स्तर पर कोई औपचारिक सूचना दी गई है। डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि यदि इस मामले में लिखित शिकायत प्राप्त होती है, तो नियमानुसार इसकी जांच कराई जाएगी और तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


