रायबरेली के सलोन विकास खंड स्थित कंपोजिट विद्यालय बगहा में मिड-डे मील और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय खेत और ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन विकास भवन में धरने के साथ शुरू हुआ और बाद में जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने विद्यालय की प्रधानाध्यापिका पर आरोप लगाया कि मध्यान्ह भोजन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनका कहना था कि बच्चों को अक्सर सिर्फ भात और नमक दिया जाता है, और कई हफ्तों तक भोजन बनाया ही नहीं जाता। अभिभावकों द्वारा शिकायत करने पर प्रधानाध्यापिका द्वारा अभद्रता और धमकाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष फूल चंद्र मौर्या ने बताया कि वित्तीय वर्ष के अंत में भी विद्यालय के जीर्णोद्धार, फर्नीचर, खेल सामग्री और रंगाई-पुताई जैसे मदों के लिए आवंटित धन का उपयोग नहीं किया गया है। खेग्रामस के जिला सचिव मो. नईम ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष भी अधिकांश धन प्रधानाध्यापिका ने अपने निजी खाते में स्थानांतरित करवा लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि सेवानिवृत्त शिक्षक द्वारा विभिन्न फर्मों को भेजे गए कार्यादेश के सापेक्ष सामग्री खरीदने के बजाय नकदीकरण किया गया। विद्यालय की स्थिति भी दयनीय बताई गई। सारा फर्नीचर टूटा हुआ है और कबाड़ की तरह एक कमरे में पड़ा है। खेल सामग्री की खरीद नहीं की गई है और पिछले दो साल से विद्यालय की रंगाई-पुताई नहीं हुई है। परिसर में जंगल उग आया है और साफ-सफाई का भी अभाव है। प्रदर्शनकारियों ने मिड-डे मील के लिए बच्चों की संख्या अधिक दिखाने, भोजन न बनने पर भी फर्जी लेखा-जोखा तैयार करने और उपस्थिति से हमेशा ज्यादा संख्या दर्शाने का आरोप लगाया। राम गोपाल ने कहा कि कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति भी दर्ज नहीं की जाती, जो भोजन के आंकड़ों में हेरफेर का संकेत है। उनका कहना था कि कभी जिले के अग्रणी विद्यालयों में गिना जाने वाला यह विद्यालय अब खत्म होने की कगार पर है। प्रदर्शन के बाद, ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर इन सभी अनियमितताओं की जांच और प्रधानाध्यापिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बाद में जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन देकर प्रधानाध्यापिका की छुट्टी निरस्त कर उन्हें कार्यालय से संबद्ध कर किसी अन्य प्रधानाध्यापक की नियुक्ति किए जाने ,मध्यान्ह भोजन में की गई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराए जाने , वित्तीय वर्ष 2024-25 के आवंटित धन का दुरुपयोग करने की भौतिक जांच कर उसकी रिकवरी सुनिश्चित करते हुए दंडित करने व वित्तीय वर्ष 2025- 26 के आवंटित धन के उपयोग के लिए किसी अन्य सक्षम अधिकारी / शिक्षक या कमेटी का गठन कर उसे अधिकृत करने तथा अभिभावकों व विद्यालय की रसोइया कर्मियों से दुर्व्यवहार की जांच कराए जाने की मांग की गईं।


