गोपालगंज में स्थानीय कलाकारों ने विभिन्न महोत्सवों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी अनदेखी के विरोध में प्रदर्शन किया। गुरुवार को शहर के मौनिया चौक पर हुए इस प्रदर्शन में कलाकारों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी कलाकारों का कहना है कि वे गोपालगंज जिले के निवासी हैं और वर्षों से अपनी कला से जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। इसके बावजूद, जब भी जिले में कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम, महोत्सव या सरकारी आयोजन होता है, तो बाहरी जिलों और राज्यों से कलाकारों को बुलाया जाता है। स्थानीय प्रतिभाओं को नजरअंदाज करने का आरोप इन बाहरी कलाकारों पर भारी खर्च किया जाता है, जबकि स्थानीय प्रतिभाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया जाता है। कलाकारों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के बजाय बाहरी कलाकारों को प्राथमिकता देना अन्यायपूर्ण है। इस उपेक्षा से न केवल स्थानीय कलाकारों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी प्रभावित हो रहे हैं। कई कलाकारों ने बताया कि वे अपनी जीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं और यदि उन्हें अपने ही जिले में अवसर नहीं मिलेंगे, तो उनकी स्थिति और भी खराब हो जाएगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों को मिले प्राथमिकता विरोध प्रदर्शन के दौरान कलाकारों ने मांग की कि जिले में होने वाले सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने अपनी कला के प्रदर्शन और रोजगार के अवसर प्राप्त करने के लिए विशेष योजनाएं और मंच उपलब्ध कराने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। फिलहाल, मौके पर प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने नहीं पहुंचा, जिससे कलाकारों में और नाराजगी देखी गई। स्थानीय कलाकारों का यह विरोध अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। गोपालगंज में स्थानीय कलाकारों ने विभिन्न महोत्सवों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी अनदेखी के विरोध में प्रदर्शन किया। गुरुवार को शहर के मौनिया चौक पर हुए इस प्रदर्शन में कलाकारों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी कलाकारों का कहना है कि वे गोपालगंज जिले के निवासी हैं और वर्षों से अपनी कला से जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। इसके बावजूद, जब भी जिले में कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम, महोत्सव या सरकारी आयोजन होता है, तो बाहरी जिलों और राज्यों से कलाकारों को बुलाया जाता है। स्थानीय प्रतिभाओं को नजरअंदाज करने का आरोप इन बाहरी कलाकारों पर भारी खर्च किया जाता है, जबकि स्थानीय प्रतिभाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया जाता है। कलाकारों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के बजाय बाहरी कलाकारों को प्राथमिकता देना अन्यायपूर्ण है। इस उपेक्षा से न केवल स्थानीय कलाकारों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी प्रभावित हो रहे हैं। कई कलाकारों ने बताया कि वे अपनी जीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं और यदि उन्हें अपने ही जिले में अवसर नहीं मिलेंगे, तो उनकी स्थिति और भी खराब हो जाएगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों को मिले प्राथमिकता विरोध प्रदर्शन के दौरान कलाकारों ने मांग की कि जिले में होने वाले सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने अपनी कला के प्रदर्शन और रोजगार के अवसर प्राप्त करने के लिए विशेष योजनाएं और मंच उपलब्ध कराने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। फिलहाल, मौके पर प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने नहीं पहुंचा, जिससे कलाकारों में और नाराजगी देखी गई। स्थानीय कलाकारों का यह विरोध अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।


