समस्तीपुर में बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले स्वास्थ्य कर्मियों ने 22 सूत्री मांगों को लेकर जिला सिविल सर्जन कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान कर्मियों ने सदर अस्पताल परिसर में जुलूस निकाला और जमकर नारेबाजी की। घेराव कार्यक्रम में नियमित कर्मचारी, संविदा पर कार्यरत कर्मचारी, पारा मेडिकल कर्मी, स्किन वर्कर, आशा, ममता, कोरियर, 102 एंबुलेंस चालक, टेक्नीशियन और स्वास्थ्य समिति में कार्यरत कर्मचारियों सहित आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मचारी शामिल थे। सभी एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान जिला सिविल सर्जन को एक मांग पत्र सौंपा गया। इसमें प्रमुख मांगों में चार श्रम कोड को बिहार में लागू न करने की मांग शामिल है। इसके अलावा, एनपीएस-ओपीएस समाप्त कर सभी कर्मचारियों को 1 सितंबर 2005 से पूर्ण पेंशन का लाभ देने की मांग भी की गई है। प्रतियोगिता परीक्षा के बजाय सक्षमता परीक्षा लेने की मांग मांग पत्र में स्वास्थ्य समितियों के कर्मचारियों को 22 जुलाई 2024 से 3 सितंबर 2024 तक के कार्य बहिष्कार अवधि का उपार्जित अवकाश स्वीकृत करते हुए मानदेय भुगतान करने की बात कही गई है। एएनएम को मातृत्व अवकाश, स्वच्छता प्रमाण पत्र सहित अन्य अवकाश निदेशालय स्तर से पूर्व की तरह आदेश निर्गत करने की भी मांग है। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत सभी संविदागत कर्मियों की सेवा नियमित करने के लिए प्रतियोगिता परीक्षा के बजाय सक्षमता परीक्षा लेने की मांग भी उठाई गई। इन सभी 22 सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सचिव के नाम से यह मांग पत्र जिला सिविल सर्जन को सौंपा।
पूरे जिले भर के स्वास्थ्य कर्मी एकजुट हुए इस मौके पर बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला मंत्री राजीव रंजन ने बताया कि 22 सूत्री मांगों को लेकर पूरे जिले भर के स्वास्थ्य कर्मी एकजुट हुए। महासंघ भवन कार्यालय परिसर से जुलूस निकालकर पूरे सदर अस्पताल में नारेबाजी की। जिला सिविल सर्जन कार्यालय का घेराव किया है। उन्होंने कहा कि अगर स्वास्थ्य विभाग उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आने वाले दिनों में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। समस्तीपुर में बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले स्वास्थ्य कर्मियों ने 22 सूत्री मांगों को लेकर जिला सिविल सर्जन कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान कर्मियों ने सदर अस्पताल परिसर में जुलूस निकाला और जमकर नारेबाजी की। घेराव कार्यक्रम में नियमित कर्मचारी, संविदा पर कार्यरत कर्मचारी, पारा मेडिकल कर्मी, स्किन वर्कर, आशा, ममता, कोरियर, 102 एंबुलेंस चालक, टेक्नीशियन और स्वास्थ्य समिति में कार्यरत कर्मचारियों सहित आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मचारी शामिल थे। सभी एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान जिला सिविल सर्जन को एक मांग पत्र सौंपा गया। इसमें प्रमुख मांगों में चार श्रम कोड को बिहार में लागू न करने की मांग शामिल है। इसके अलावा, एनपीएस-ओपीएस समाप्त कर सभी कर्मचारियों को 1 सितंबर 2005 से पूर्ण पेंशन का लाभ देने की मांग भी की गई है। प्रतियोगिता परीक्षा के बजाय सक्षमता परीक्षा लेने की मांग मांग पत्र में स्वास्थ्य समितियों के कर्मचारियों को 22 जुलाई 2024 से 3 सितंबर 2024 तक के कार्य बहिष्कार अवधि का उपार्जित अवकाश स्वीकृत करते हुए मानदेय भुगतान करने की बात कही गई है। एएनएम को मातृत्व अवकाश, स्वच्छता प्रमाण पत्र सहित अन्य अवकाश निदेशालय स्तर से पूर्व की तरह आदेश निर्गत करने की भी मांग है। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत सभी संविदागत कर्मियों की सेवा नियमित करने के लिए प्रतियोगिता परीक्षा के बजाय सक्षमता परीक्षा लेने की मांग भी उठाई गई। इन सभी 22 सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सचिव के नाम से यह मांग पत्र जिला सिविल सर्जन को सौंपा।
पूरे जिले भर के स्वास्थ्य कर्मी एकजुट हुए इस मौके पर बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला मंत्री राजीव रंजन ने बताया कि 22 सूत्री मांगों को लेकर पूरे जिले भर के स्वास्थ्य कर्मी एकजुट हुए। महासंघ भवन कार्यालय परिसर से जुलूस निकालकर पूरे सदर अस्पताल में नारेबाजी की। जिला सिविल सर्जन कार्यालय का घेराव किया है। उन्होंने कहा कि अगर स्वास्थ्य विभाग उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आने वाले दिनों में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।


